Monday, November 22, 2021

संयुक्त किसान मोर्चा ने पीएम मोदी को पत्र लिख कर की 6 मांगे


दिल्ली : पिछले एक साल से किसान कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे है. इस आंदोलन के चलते आखिरकार मोदी सरकार को किसानों के सामने झुकना ही पड़ा और तीनों कृषि कानून को रॉड करने का ऐलान किया.लेकिन इसके बावजूद भी किसान अपना आंदोलन ख़त्म नहीं करेंगे। किसानों की मांग है की जब तक सरकार MSP पर कानून नहीं लाएगी और अन्य मुद्दों पर बात नहीं करेगी तब तक तेज आंदोलन जारी रहेगा. 


संयुक्त किसान मोर्चा ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि सरकार को तुरंत किसानों से वार्ता बहाल करनी चाहिए, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. मोर्चा ने कहा कि आपके संबोधन में किसानों की प्रमुख मांगों पर ठोस घोषणा की कमी के कारण किसान निराश हैं. 

किसानों ने पीएम मोदी को पत्र में लिखा है कि देश के करोड़ों किसानों ने 19 नवंबर 2021 की सुबह राष्ट्र के नाम आपका संदेश सुना. हमने गौर किया कि 11 राउंड वार्ता के बाद आपने द्विपक्षीय समाधान की बजाय एकतरफा घोषणा का रास्ता चुना, लेकिन हमें खुशी है कि आपने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है. हम इस घोषणा का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि आपकी सरकार इस वचन को जल्द से जल्द निभाएगी.

1. खेती की संपूर्ण लागत पर आधारित न्यूनतम समर्थन मूल्य ( MSP ) को सभी कृषि उपज के ऊपर, सभी किसानों का कानूनी हक बना दिया जाए ताकि देश के हर किसान को अपनी पूरी फसल पर कम से कम सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी मिल सके.

2. सरकार द्वारा प्रस्तावित “विद्युत अधिनियम संशोधन विधेयक, 2020/2021” का ड्राफ्ट वापस लिया जाए (वार्ता के दौरान सरकार ने वादा किया था कि इसे वापस लिया जाएगा, लेकिन फिर वादाखिलाफी करते हुए इसे संसद की कार्य सूची में शामिल किया गया था).

3. “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इससे जुड़े क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अधिनियम, 2021” में किसानों को सजा देने का प्रावधान हटाया जाए ( इस साल सरकार ने कुछ किसान विरोधी प्रावधान तो हटा दिए लेकिन सेक्शन 15 के माध्यम से फिर किसान को सजा की गुंजाइश बना दी गई है).

आपके संबोधन में इन बड़ी मांगों पर ठोस घोषणा ना  होने से किसानों को निराशा हुई है. किसान ने उम्मीद लगाई थी कि इस ऐतिहासिक आंदोलन से न सिर्फ तीन कानूनों की बला टलेगी, बल्कि उसे अपनी मेहनत के दाम की कानूनी गारंटी भी मिलेगी.

प्रधानमंत्री जी, पिछले एक वर्ष में इस ऐतिहासिक आंदोलन के दौरान कुछ और मुद्दे भी उठे हैं जिनका तत्काल निपटारा करना अनिवार्य है:

4. दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और अनेक राज्यों में हजारों किसानों को इस आंदोलन के दौरान (जून 2020 से अब तक) सैकड़ों मुकदमों में फंसाया गया है. इन केसों को तत्काल वापस लिया जाए.

5. लखीमपुर खीरी हत्याकांड के सूत्रधार और सेक्शन 120B के अभियुक्त अजय मिश्रा टेनी आज भी खुले घूम रहे हैं और आपके मंत्रिमंडल में मंत्री बने हुए हैं. वह आपके और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ मंच भी साझा कर रहे हैं. उन्हें बर्खास्त और गिरफ्तार किया जाए.

6. इस आंदोलन के दौरान अब तक लगभग 700 किसान शहादत दे चुके हैं. उनके परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास की व्यवस्था हो. शहीद किसानों की स्मृति में एक शहीद स्मारक बनाने के लिए सिंधू बॉर्डर पर जमीन दी जाए.

सीतापुर में त‍िलक से पहले जीजा ने मारी साली को गोली, बेटी और खुद को भी क‍िया शूट


पिसावां के मूड़कला गांव में राजकमल गुप्ता की ससुराल है। वह शाहजहांपुर के सरांय मुहल्ले के रहने वाले हैं। राजकमल रविवार सुबह ससुराल आए थे। बेटी मोहिनी गुप्ता (18) भैया दूज से ननिहाल में थी। अपराह्न तीन बजे की घटना ससुराल वाले घर के अंदर की बताई जा रही है।

सीतापुर में त‍िलक से पहले जीजा ने मारी साली को गोली, बेटी और खुद को भी क‍िया शूट; जान‍िए पूरा मामला
इसमें राजकमल गुप्ता की मौके पर ही मौत हो गई है, जबकि उसकी बेटी व साली अभी जीवित हैं।

सीतापुर, शाहजहांपुर के राजकमल गुप्ता ने साली के साथ ही अपनी बेटी को गोली से उड़ा दिया। फिर अपने पेट पर भी गोली मार ली। इसमें राजकमल गुप्ता की मौके पर ही मौत हो गई है, जबकि उसकी बेटी व साली अभी जीवित हैं उन्हें इलाज के लिए पुलिस सीएचसी पर लाई है। घटना का कारण अभी परिवार वाले नहीं बता रहे हैं।

पिसावां के मूड़कला गांव में राजकमल गुप्ता की ससुराल है। वह शाहजहांपुर के सरांय मुहल्ले के रहने वाले हैं। राजकमल रविवार सुबह ससुराल आए थे। बेटी मोहिनी गुप्ता (18) भैया दूज से ननिहाल में थी। अपराह्न तीन बजे की घटना ससुराल वाले घर के अंदर की बताई जा रही है। घर के कमरे में बेटी मोहिनी गुप्ता व उसकी मौसी वंदना गुप्ता (22) थीं। उसी बीच मोहिनी के पिता राजकमल भी कमरे में दाखिल हुए और वहीं उन्होंने तमंचा से पहले बेटी मोहिनी के सीने पर फिर वंदना के माथे पर गोली दाग दी। इसके बाद वह खुद के पेट में गोली मार ली। घटना के बाद घर व गांव में शोर मच गया। खबर मिली तो कुछ देर में ही पुलिस आ गई। पुलिस ने घायल दोनों युवतियों को सरकारी जीप से लाकर सीएचसी में भर्ती कराया है। वहीं, राजकमल गुप्ता की घटनास्थल पर ही मौत हो गई है।

वंदना के तिलक की चल रही थी तैयारी : बताया जा रहा है कि राजकमल की साली वंदना गुप्ता का विवाह तय है। घर में उसके तिलक की तैयारियां चल रही थीं। तिलक व विवाह की तारीखें अभी निश्चित होनी बाकी थीं। विवाह तय होने के बाद से घर में चहल-पहल बढ़ गई थी। बाजार से सामान भी लाया जाने लगा था।

पूर्व प्रधान के बड़े दामाद थे राजकमल : बताया जा रहा है कि मृतक राजकमल गुप्ता की ससुराल मूड़ाकलां में पूर्व प्रधान रामरतन गुप्ता के घर है। रामरतन की बड़ी बेटी सोमन गुप्ता राजकमल को ब्याही थीं। सोमन चार बहने हैं। इनमें पूनम, संध्या व वंदना छोटी हैं। वंदना को छोड़ अन्य तीनों बहनें विवाहित हैं।

कोई नहीं बता रहा घटना का कारण : मृतक राजकमल गुप्ता ने खुद के साथ ही अपनी बेटी व साली को गोली क्यों मारी। इसका जवाब ससुराल का कोई भी व्यक्ति नहीं दे रहा है। सभी अपने को घटना के कारण से अनभिज्ञ बता रहे हैं। वैसे मोहिनी गुप्ता राजकमल की इकलौती संतान बताई जा रही है।

पुलिस भी घटना के कारण से अनभिज्ञ : पिसावां थानाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह व सीओ सुशील कुमार सिंह मौके पर पहुंचे हैं। यह लोग भी घटना का कारण अभी नहीं बता पा रहे हैं। खबर मिलते ही एसपी आरपी सिंह भी मौके पर पहुंच रहे हैं।

Sunday, November 21, 2021

किसान मोर्चे की बैठक में फैसला: पहले से तय कार्यक्रम नहीं रोके जायेंगे, 22 को लखनऊ में रैली

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानूनों के वापस लिए जाने के एलान के बाद आज संयुक्त किसान मोर्चा की कोर कमेटी की बैठक हुई। बैठक में तय किया गया कि एमएसपी की गारंटी के लिए कानून बनाये जाने तथा अन्य मांगो के समर्थन में किसान आंदोलन जारी रहेगा तथा पहले से तय कार्यक्रम नहीं रोके जायेंगे।

शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानूनों के वापसी के एलान को लेकर बैठक में किसान नेताओं ने कहा कि मोदी जी ने एक तरफ घोषणा कर भ्रम पैदा करने की कोशिश की है। बैठक में फैसला लिया गया कि पीएम मोदी के तीनों कृषि कानून वापस लेने के फैसले की घोषणा के बावजूद किसान पीछे हटने को तैयार नहीं है।

700 किसानो की शहादत की ज़िम्मेदार केंद्र सरकार:

किसान मोर्चा ने आंदोलन के एक साल के दौरान 700 किसानों की मौत के लिए केंद्र सरकार को जिम्‍मेदार ठहराया है। किसानों के परिवार को आर्थिक मदद की मांग की है। संयुक्‍त किसान मोर्चा ने आरोप लगाया है कि लखीमपुर में किसानों की ‘हत्‍या’ केंद्र सरकार के अड़ियल रवैये का नतीजा है। बैठक में किसान मोर्चा ने शहीद किसानों के स्मारक के लिए जगह की मांग की है। मोर्चे ने कहा कि किसानों पर दर्ज केस भी वापिस लिए जाएँ।
अभी आधी जीत मिली है:

संयुक्त किसान मोर्चे ने कृषि कानूनों की वापसी को आधी जीत बताया है। किसान मोर्चा ने कहा, लखनऊ, दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन और पार्लिमेंट कूच 22, 26और 29 नवंबर को पहले की तरह ही जारी रहेंगे।

बैठक के बाद भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि 22, 26 और 29 नवंबर को जो कार्यक्रम होने वाले हैं उन्हें रोका नहीं जाएगा। अगर सरकार को बातचीत करनी है तो वो बात कर सकते हैं। शुरू में ही ये बातचीत हो गई होती तो इतने किसानों की मृत्यु नहीं होती।

किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा कि आज की बैठक में फैसला लिया गया कि हमारे 22, 26 और 29 नवंबर को जो कार्यक्रम होने वाले हैं वो जारी रहेंगे। 22 को लखनऊ रैली, 26 को पूरे देश में किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर जश्न मनाया जाएगा और 29 को ट्रैक्टर मार्च (संसद तक) होगा। आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि 22 तारीख को लखनऊ की रैली को कामयाब करना है। अगर लखीमपुर खीरी में हमारे साथियों को परेशान करने की कोशिश की जाती है तो फिर हम लखीमपुर खीरी इलाके में आंदोलन चलाएंगे।

वहीँ सिंघू बॉर्डर पर किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकार ने तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लेने के लिए बोला है तो वो इसको कब तक वापस लेंगे इसके बारे में कुछ ठोस नहीं है। MSP पर अभी कोई ठोस बात नहीं हुई है और जो मामले किसानों पर दर्ज़ हुए हैं उनको भी वापस लेना चाहिए।

चीन किसी भी दिन अचानक अमेरिका पर परमाणु हमला कर सकता है, यूएस सबसे बड़े मिलिट्री अफसर की चेतावनी


वॉशिंगटन. अमेरिकी सेना के दूसरे सबसे बड़े अधिकारी ने एक चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि चीन किसी भी दिन अमेरिका पर अचानक परमाणु हमला कर सकता है। अमेरिका ने जुलाई में बीजिंग द्वारा हाइपरसोनिक हथियारों (Hypersonic Weapons) की जांच के नये ब्यौरे पर भी प्रकाश डाला है। उस वक्त बीजिंग ने आवाज की गति से 5 गुना तेज गति से मिसाइल लांच की थी।
पूरा धरती का चक्कर लगाया चीन की मिसाइल ने
ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के उपाध्यक्ष जनरल जॉन हायटेन ने 27 जुलाई को चीन के हारपारसोनिक हथियारों (Hypersonic Weapons) के परीक्षण पर टिप्पणी करते हुए सीबीएस न्यूज से कहा है। उन्होंने लम्बी रेंज की मिसाइल का परीक्षण किया है। इसने पूरी दुनिया का चक्कर लगाया। हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन को छोड़ा जो वापिस चीन लौट गया। जब हायटेन से पूछा गया कि क्या मिसाइल का निशाना ठीक रहा तो उन्होंने कहा है कि काफी नजदीक रहा है।

मिसाइल टेस्ट को मानने से चीन का इनकार

गौरतलब है कि चीन ने हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण से इनकार किया है और कहा है कि वह पुन: उपयोग किए जाने वाले अंतरिक्ष यान का परीक्षण कर रहा था । चीन का हथियार कई किलोमीटर से निशाना चूक गया लेकिन ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ के मुताबिक किसी देश के हाइपरसोनिक हथियार ने पहली बार पृथ्वी का चक्कर लगाया है।

राष्ट्रपति बाइडेन कमला हैरिस को सौंपेंगे अमेरिका की सत्ता की कमान


Joe Biden-Kamala Harris News: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन अगले कुछ दिनों के लिए अस्थायी रूप से उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को अपनी शक्तियों का हस्तांतरण करेंगे।

US President Joe Biden will transfer power to Vice President Kamala Harris Briefly During A Colonoscopy
बाइडेन कमला हैरिस को सौपेंगे अमेरिका की सत्ता की कमान

मुख्य बातें

  • अगले कुछ दिनों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगी कमला हैरिस
  • चिकित्सा वजहों से वाल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर जा रहे हैं बाइडन
  • 78 वर्षीय बाइडेन पिछली बार 2019 में हुए थे अस्पताल में भर्ती

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन अगले कुछ दिनों के लिए उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को अपनी सभी शक्तियां सौंपने जा रहे हैं, जिसकी जानकारी खुद व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर दी हैं। दरअसल अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन शुक्रवार को वाल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर जा रहे हैं जहां राष्ट्रपति के तौर पर पहली बार उनकी नियमित चिकित्सा जांच की जाएगी।

बुश के कार्यकाल में हुआ था ऐसा

ऐसी ही प्रक्रिया का पालन 2002 और 2007 में भी किया गया था  जब राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश सत्ता में थे और अब संविधान में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए, राष्ट्रपति बाइडेन थोड़े समय के लिए उपराष्ट्रपति को सत्ता हस्तांतरित करेंगे। उपराष्ट्रपति इस दौरान वेस्ट विंग में अपने कार्यालय से काम कर सकती हैं। 78 वर्षीय बाइडेन पिछली बार 2019 में  अस्पताल में भर्ती हुए थे तब उन्होंने अपने शरीर की पूरी जांच कराई थी और तब चिकित्सकों ने पूर्व उपराष्ट्रपति को ‘स्वस्थ’ और ‘राष्ट्रपति का कर्तव्य सफलतापूर्वक निभाने के लिए उपयुक्त’ पाया था।। 79 साल के बाइडेन राष्ट्रपति के रूप में सेवा करने वाले सबसे उम्रदराज शख्स हैं।

इस तरह सौंपेगे शक्तियां

2009 से बाइडन के चिकित्सक डॉ. केविन ओ कोनोर ने तीन पन्नों के नोट में लिखा कि तब राष्ट्रपति के उम्मीदवार रहे बाइडन पूरी तरह स्वस्थ थे।अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन कुछ दिनों के लिए उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को अपनी सभी ताकतें सौंपने जा रहे हैं। अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति को दी गईं सभी शक्तियां कुछ दिनों के लिए उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के पास रहेगी। अगर इस दौरान कोई विशेष परिस्थिति बनती है तो कमला हैरिस अमेरिका के राष्ट्रपति की तरह इन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकतीं हैं।

संविधान में है ये प्रावधान

अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन के अनुसरण में, बाइडेन सीनेट के अस्थायी अध्यक्ष और प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष को लिखे एक पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसमें कहा गया है कि वह संज्ञाहरण के तहत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं, इसलिए इस दौरान कमला हैरिस कार्यवाहक राष्ट्रपति बनी रहेगी। ठीक होने के बाद इसी तरह का पत्र भेजकर अपनी पद पर फिर कार्य करेंगे। हैरिस उपराष्ट्रपति बनने वाली दक्षिण एशियाई मूल की पहली महिला होंगी जो कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में सेवा करते हुए कम समय के लिए इतिहास रचेंगी।

Friday, November 19, 2021

हिंदू महासभा का ऐलान: 6 दिसंबर को मथुरा मस्जिद में स्थापित करेगी कृष्ण मूर्ति


मथुरा। अखिल भारत हिंदू महासभा ने घोषणा की है कि वह देवता के ‘वास्तविक जन्मस्थान’ पर भगवान कृष्ण की एक मूर्ति स्थापित करेगी, जो दावा करते हैं कि वह यहां एक प्रमुख मंदिर के पास मस्जिद में है। इसके तहत महासभा ने शाही मस्जिद ईदगाह में लड्डू गोपाल का जलाभिषेक करने का ऐलान किया है। जानकारी के मुताबिक देश के विभिन्न हिस्सों से पवित्र नदियों का जल लेकर महासभा के पदाधिकारी मथुरा पहुंचेंगे। इस जल से आराध्य का अभिषेक किया जाएगा और उनका पूजन होगा। लड्डू गोपाल का विग्रह खुद महासभा ईदगाह में ले जाएगी। गौरतलब है कि स्थानीय अदालतें कटरा केशव देव मंदिर के करीब स्थित 17वीं शताब्दी की मस्जिद को ‘हटाने’ की मांग करने वाली याचिकाओं की एक श्रृंखला पर सुनवाई कर रही हैं।

हिंदू महासभा के नेता राज्यश्री चौधरी ने कहा कि प्रतिमा को छह दिसंबर को ‘महा जल अभिषेक’ के बाद जगह को ‘शुद्ध’ करने के लिए स्थापित किया जाएगा। मस्जिद के अंदर मूर्ति की स्थापना के लिए चुनी गई तारीख 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस की सालगिरह के साथ मेल खाती है। हालांकि हिंदू महासभा के नेता राज्यश्री चौधरी ने 1992 की घटना और मथुरा योजना के बीच कोई संबंध होने से इनकार किया। शाही ईदगाह के अंदर अनुष्ठान करने के लिए महासभा की धमकी ऐसे समय में आई है जब स्थानीय अदालतें कटरा केशव देव मंदिर के करीब स्थित 17वीं शताब्दी की मस्जिद को ‘हटाने’ की मांग करने वाली याचिकाओं की एक श्रृंखला पर सुनवाई कर रही हैं। ‘महा जल अभिषेक’ के लिए पवित्र नदियों का पानी लाया जाएगा। चौधरी ने कहा कि हमें अब तक राजनीतिक आजादी मिली है, लेकिन आध्यात्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आजादी अभी हासिल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि महासभा का मकसद आजाद भारत, सनातन भारत को वापस लाना है। महासभा चाहती है कि आजाद भारत उभर कर आए। हमारा मस्जिद या किसी परिसर से कोई मतलब नहीं है। ये मस्जिद नहीं ईदगाह है और इसका मतलब है पब्लिक मीटिंग प्लेस, तो फिर ये विवादित कैसे? यहां कोई भी कभी भी जा सकता है। ईदगाह में हम खोदाई करेंगे तो आज भी ठाकुर केशवदेव मंदिर से जुड़ी मूर्तियां निकलेंगी। 

'कृषि कानूनों को निरस्त करने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण', सुप्रीम कोर्ट के पैनल के सदस्‍य ने जताई नाराजगी


कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन पर बैठे किसान (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान करते हुए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की, जिसके विरोध में किसान बीते करीब एक साल से आंदोलन कर रहे हैं। यह कानून बीते साल सितंबर में लाया गया था, जिसके बाद ही पंजाब सहित देश के कई हिस्‍सों में किसानों का विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया था। बाद में किसानों ने दिल्‍ली की ओर रुख गया, जिसके बाद यह एक बड़ा आंदोलन बन गया।

कृषि कानूनों के विरोध में दिल्‍ली बॉर्डर पर किसानों का धरना 26 नवंबर, 2020 से ही जारी है और अब जब प्रधानमंत्री ने इन विवादास्‍पद कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया है तो किसानों ने इसका स्‍वागत क‍िया है। इन सबके बीच इस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्‍त पैनल के एक सदस्‍य की प्रतिक्रिया भी आई है। उन्‍होंने इसे दुर्भाग्‍यपूर्ण करार देते हुए कहा कि इससे विरोध-प्रदर्शन समाप्‍त होने की संभावना नहीं है।

'सरकार का फैसला दुर्भाग्‍यपूर्ण'

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पैनल के सदस्य अनिल जयसिंह घनवट ने कहा, 'तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने का सरकार का फैसला बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे प्रदर्शनों को समाप्त करने में मदद मिलने की संभावना नहीं है।' उन्‍होंने कहा कि यदि शीर्ष अदालत कृषि कानूनों पर रिपोर्ट जारी नहीं करती है, तो वह इसे जारी करेंगे। उन्‍होंने यहां तक कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की बेहतरी की बजाय राजनीति को तवज्‍जो दिया।

उन्‍होंने कहा, 'कृषि कानूनों को रद्द करने का निर्णय पूरी तरह से राजनीतिक है, जिसका उद्देश्य आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव जीतना है। हमारे पैनल ने तीन कृषि कानूनों पर कई सुधार और समाधान प्रस्तुत किए थे, लेकिन गतिरोध को हल करने के लिए इसका इस्तेमाल करने के बजाय पीएम मोदी और बीजेपी ने पीछे हटना चुना। वे सिर्फ चुनाव जीतना चाहते हैं और कुछ नहीं।'

समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, नाराजगी भरे लहजे में उन्‍होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट में हमारी सिफारिशों को पेश करने के बावजूद, ऐसा लगता है कि इस सरकार ने इसे पढ़ा भी नहीं। पार्टी (बीजेपी) के राजनीतिक हितों के लिए किसानों के हितों की बलि दी गई है। कृषि कानूनों को निरस्त करने के निर्णय ने अब कृषि और इसके विपणन क्षेत्र में सभी प्रकार के सुधारों के दरवाजे बंद कर दिए हैं।'

पैनल ने कोर्ट को सौंपी है रिपोर्ट

कृषि कानूनों को लेकर किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी, 2021 को इस पैनल का गठन किया था। समिति ने इस पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। कमेटी का कहना है कि उसने रिपोर्ट 19 मार्च को ही सौप दी थी, जिसमें तमाम हित धारकों के सुझाव और ओपिनियन रखा गया है। तीन सदस्‍यीय समिति के एक सदस्‍य अनिल जयसिंह घनवट ने देश के चीफ जस्टिस को इस संबंध में सितंबर में एक पत्र भी लिखा था, जिसमें रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की अपील की गई थी। उन्‍होंने यह भी कहा था कि अगर रिपोर्ट में शामिल अनुशंसाओं पर अहम होता है तो इससे किसानों की समस्‍याओं का समाधान हो सकता है।

परम तत्व दर्शन