Friday, December 10, 2021

लद्दाख में दम तोड़ रहे चीनी कमांडर, जनरल बिपिन रावत के निधन पर ग्‍लोबल टाइम्‍स ने उगला जहर

बीजिंग
चीन के सरकारी भोंपू ग्‍लोबल टाइम्‍स ने भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ (CDS) के हेलिकॉप्‍टर हादसे में मौत पर भारतीय सेना के खिलाफ जहर उगला है। ग्‍लोबल टाइम्‍स ने इस हादसे को भारतीय सेना की खामी करार दिया। उसने दावा किया कि रावत के निधन से भारतीय सेना को आधुनिक बनाने के मिशन को भारी झटका लगा है। चीन की सत्‍तारूढ़ कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ने भारतीय सेना के खिलाफ यह आरोप ऐसे समय पर मढ़े हैं, जब खुद उसके कमांडर अक्‍साई चिन में पड़ रही भीषण ठंड का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं और दम तोड़ रहे हैं।

जनरल रावत के निधन पर ग्लोबल टाइम्स ने बेशर्मी से भरे बयान देने शुरू कर दिए हैं। ग्लोबल टाइम्स ने सीडीएस के हेलिकॉप्टर हादसे को भारतीय सेना की खामी करार दिया। यह नहीं उसने जनरल रावत को चीन विरोधी करार दिया। ग्लोबल टाइम्स ने जहर उगलते हुए लिखा कि बुधवार को एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में भारत के रक्षा प्रमुख की मौत ने न केवल भारतीय सेना के अनुशासन और युद्ध की तैयारियों की कमी को उजागर किया, बल्कि देश के सैन्य आधुनिकीकरण को भी भारी झटका दिया। अखबार ने विश्लेषकों के हवाले से लिखा कि चीन विरोधी शीर्ष रक्षा अधिकारी के चले जाने के बावजूद दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में चीन के प्रति भारत के आक्रामक रुख में बदलाव की संभावना नहीं है।

‘भारतीय सैनिक मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन नहीं करते’
ग्लोबल टाइम्स ने विश्लेषकों के हवाला देते हुए दावा किया कि दुर्घटना के सभी संभावित कारण रूसी मूल के हेलीकॉप्टर के बजाय मानवीय कारकों की ओर इशारा करते हैं। वेई डोंगक्सू ने यह भी कहा कि हालांकि, भारतीय सेना कई प्रकार के हेलीकॉप्टरों का संचालन करती है, जिनमें घरेलू रूप से विकसित हेलिकॉप्टर, दूसरे देशों से ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी से भारत में बनाए गए हेलिकॉप्टर, अमेरिका और रूस से खरीदे गए हेलिकॉप्टर शामिल हैं। इस कारण हेलिकॉप्टर में लॉजिस्टिक सपोर्ट और मेंटिनेंस की समस्या होगी।

चीन के सरकारी अखबार ने दावा किया कि भारतीय सैनिक अक्सर मानक संचालन प्रक्रियाओं और नियमों का पालन नहीं करते हैं। चीन भले ही दुख की इस घड़ी में भारतीय सेना पर आरोप लगा रहा हो लेकिन खुद उसके सैनिक और कमांडर लद्दाख की ठंड को नहीं झेल पा रहे हैं। चीन उन्‍हें बचा नहीं पा रहा है और यही वजह है कि वे मैदान छोड़कर या तो भाग रहे हैं या उनकी मौत हो जा रही है।


बीमारियों से तड़प रहे चीनी सैनिक, सबसे बड़े कमांडर की मौत

दरअसल, पूर्वी लद्दाख में भारतीय जमीन पर कब्‍जा करने की हसरत रखने वाले चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग को उनका यह सपना बहुत भारी पड़ रहा है। चीन की पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी ने पूर्वी लद्दाख में वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर करीब 50 हजार सैनिक तैनात कर रखे हैं। लद्दाख की भीषण ठंड और कम ऑक्‍सीजन अब चीनी सैनिकों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। वे पेट से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसी बीमारी की चपेट में आने से चीनी सेना के सबसे बड़े पश्चिमी थिएटर कमांड के कमांडर रहे झांग जुडोंग की मौत हो गई है। वह मात्र 6 महीने ही लद्दाख की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को झेल पाए।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अभी कुछ महीने पहले ही पीएलए कमांडर झांग ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया था। अखबार ने कहा कि झांग जुडोंग को पेट के साथ कैंसर की बीमारी से भी जूझना पड़ रहा था। आलम यह है क‍ि पिछले नौ महीने में तीन बार चीन को अपने वेस्टर्न थिएटर कमांड के कमांडर को बदलना पड़ा है। चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की वेस्टर्न कमांड का मुख्यालय तिब्बत में स्थित है। चीनी सेना की यही कमांड भारत के लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैले लाइन ऑफ कंट्रोल (LaC) पर तैनात हैं।


चीनी राष्‍ट्रपति के पसंदीदा थे जनरल झांग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पहले जून महीने में जनरल झांग की जगह पर इस पद पर जनरल शू क्यूलिंग को तैनात किया था। वहीं दो महीने बाद ही वेस्टर्न थिएटर कमांड की जिम्मेदारी जनरल वांग हैजियांग को सौंप दी गई। दिसंबर 2020 में जनरल झांग जुडोंग को कमांडर बनाया गया था। दो सैन्‍य सूत्रों ने बताया कि जनरल झांग जुडोंग 58 साल के थे और गत एक अक्‍टूबर को उनकी मौत हो गई। जून महीने में अपने पद से हटते समय जनरल झांग ने कोई कारण नहीं बताया था। चीनी सेना के एक सूत्र ने कहा कि जनरल झांग और शू दोनों ही उभरते हुए सितारे की तरह से थे। वे चीनी राष्‍ट्रपति के पसंदीदा जनरल थे और शी जिनपिंग उन पर बहुत ज्‍यादा भरोसा करते थे।

न्‍यूजीलैंड में सिगरेट पर लगेगा सबसे कड़ा प्रतिबंध, आजीवन खरीद नहीं सकेंगे युवा


वेलिंगटन

न्‍यूजीलैंड तंबाकू उद्योग पर सबसे कड़ी कार्रवाई करने जा रहा है और देश के युवा अब आजीवन सिगरेट नहीं खरीद सकेंगे। न्‍यूजीलैंड ने इस कठोर कदम को उठाने के समर्थन में दलील दी कि स्‍मोकिंग को रोकने के लिए उठाए जा रहे अन्‍य उपाय बहुत समय ले रहे हैं। करीब 50 लाख की आबादी वाले इस देश में साल 2008 के बाद जन्‍मा कोई भी युवा सिगरेट या तंबाकू उत्‍पाद अपने पूरे जीवन में नहीं खरीद पाएगा।

माना जा रहा है कि यह कठोर कानून अगले साल से लागू हो जाएगा। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉक्‍टर आयशा वेराल ने कहा, ‘हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि युवा कभी भी स्‍मोकिंग करना शुरू ही नहीं करें।’ इस प्रस्‍ताव को गुरुवार को सबके सामने लाया गया है। इसके तहत तंबाकू प्रॉडक्‍ट बेचने वाली दुकानों की संख्‍या को भी कम किया जाएगा। यही नहीं सभी उत्‍पादों में निकोटिन के स्‍तर को भी घटाया जाएगा।

साल 2027 देश में आएगी सिगरेट नहीं पीने वाली पीढ़ी
मंत्री वेराल ने कहा, ‘हम युवाओं को स्‍मोकिंग के लिए इस्‍तेमाल होने वाले तंबाकू प्रॉडक्‍ट की युवाओं को सप्‍लाइ करने या उन्‍हें बेचने को एक अपराध बनाएंगे। अगर कुछ नहीं बदला तो हमें स्‍मोकिंग करने वालों की संख्‍या को 5 प्रतिशत के नीचे लाने में कई दशक लग जाएंगे और यह सरकार लोगों को पीछे छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।’ वर्तमान समय में न्‍यूजीलैंड में 15 साल तक के 11.6 फीसदी युवा सिगरेट पीते हैं।

वहीं न्‍यूजीलैंड के मूल निवासियों माओरी में यह आंकड़ा 29 फीसदी है। सरकार माओरी हेल्‍थ टास्‍क फोर्स से आने वाले महीनों में विचार विमर्श करेगी। इसके बाद इसे अगले साल जून महीने में संसद में पेश किया जाएगा। न्‍यूजीलैंड सरकार की योजना है कि साल 2022 के अंत तक इस बेहद कठोर कानून को लागू कर दिया जाए। इसके बाद प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से साल 2024 से लागू किया जाएगा। इसके तहत दुकानों संख्‍या को बहुत कम कर दिया जाएगा। साल 2027 देश में एक ऐसी पीढ़ी का लक्ष्‍य रखा गया है जो सिगरेट नहीं पीती हो।

Wednesday, December 8, 2021

बाइडन-पुतिन बैठक : यूक्रेन सीमा पर तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका की रूस को प्रतिबंध लगाने की चेतावनी

वाशिगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और रूस के उनके समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के बीच मंगलवार को दो घंटे तक वीडियो कॉल के जरिए हुई बातचीत में अमेरिका ने मॉस्को को स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर उसने यूक्रेन पर आक्रमण किया तो उस पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे और रूसी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचेगा।

यूक्रेन सीमा पर रूस के हजारों सैनिकों के जमावड़े के बाद दोनों नेताओं के बीच यह बहु प्रतीक्षित बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और पश्चिम देशों में रूस द्बारा यूक्रेन पर हमला करने की आशंका को लेकर चिता बढ़ रही है।

पुतिन इस बैठक में बाइडन से यह गारंटी चाहते थे कि नाटो सैन्य गठबंधन यूक्रेन समेत अन्य जगहों पर अपना विस्तार नहीं करेगा।

यूक्रेन के सवाल पर तनाव कम करने की अभी कोई गुंजाइश नहीं दिखायी दी और अमेरिका ने कूटनीति और तनाव कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया तथा रूस को आक्रमण के गंभीर परिणाम भुगतने की कड़ी चेतावनियां दी।

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन ने दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद कहा कि बाइडन ने ''राष्ट्रपति पुतिन को साफ तौर पर कहा कि अगर रूस, यूक्रेन पर आक्रमण करता है तो अमेरिका और हमारे यूरोपीय सहयोगी देश सख्त आर्थिक पाबंदियों के साथ प्रतिक्रिया देंगे।’’

उन्होंने कहा कि बाइडन ने कहा कि तनाव बढ़ने की स्थिति में अमेरिका ''यूक्रेन को अतिरिक्त रक्षात्मक सामान मुहैया कराएगा और हम पूर्वी सीमा पर अपने नाटो सहयोगियों को अतिरिक्त क्षमताओं के साथ मजबूत करेंगे।’’

अमेरिका की एक शीर्ष दूत विक्टोरिया नुलैंड ने कहा कि यूक्रेन पर हमला करने से रूस और जर्मनी के बीच एक विवादित पाइपलाइन भी खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने मंगलवार को सीनेट की विदेश संबंधों की समिति को बताया कि अगर रूस हमला करता है ''हम उम्मीद करते हैं कि पाइपलाइन निलंबित कर दी जाएगी।’’

पुतिन के विदेश मामलों के सलाहकार युरी उशाकोव ने पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान प्रतिबंध की चेतावनियों को खारिज किया। उन्होंने कहा, ''हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने संभावित प्रतिबंधों के बारे में बात की है लेकिन हमारे राष्ट्रपति ने जोर दिया कि रूस को किसकी आवश्यकता है। प्रतिबंध कोई नयी बात नहीं है, वे लंबे समय से लगे हुए हैं और उनका कोई असर नहीं पड़ेगा।’’

उन्होंने राष्ट्रपतियों के वीडियो कांफ्रेंस को ''स्पष्ट और व्यावसायिक उद्देश्यों’’ वाला बताया और कहा कि दोनों नेताओं ने कई मौकों पर एक-दूसरे के साथ मजाकिया अंदाज में भी बातचीत की।

व्हाइट हाउस में सुलिवन ने कहा, ''यह एक उपयोगी बैठक थी।’’
गौरतलब है कि रूस ने यूक्रेन सीमा के समीप हजारों सैनिकों को तैनात किया है। यूक्रेन के अधिकारियों ने रूस पर युद्धग्रस्त पूर्वी यूक्रेन में टैंकों और स्नाइपरों को भेजकर संकट को और बढ़ाने का आरोप लगाया।

अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने स्वतंत्र रूप से इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है लेकिन एक अधिकारी ने बताया कि व्हाइट हाउस ने आक्रमण की आशंका को लेकर रूस के समक्ष अपनी चिताएं व्यक्त की है।

क्रेमलिन ने कहा, ''पुतिन ने इस पर जोर दिया कि रूस पर जिम्मेदारी तय करना गलत है क्योंकि नाटो यूक्रेन सीमा पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने की खतरनाक कोशिशें कर रहा है और रूसी सीमा के समीप अपनी सैन्य क्षमता का विस्तार कर रहा है।’’

बाइडन ने व्हाइट हाउस के स्थिति कक्ष से और पुतिन ने सोची में अपने आवास से बातचीत की, जो बाइडन के कार्यकाल की महत्वपूर्ण बैठकों में से एक है और ऐसे वक्त में हुई है जब अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने बताया कि रूस ने यूक्रेन सीमा के समीप 70,000  से अधिक सैनिकों को भेजा है और उसने अगले साल की शुरुआत में संभावित हमले की तैयारियां कर ली है।

सुलिवन ने कहा कि बाइडन और पुतिन ने ''ईरान मुद्दे पर सार्थक बातचीत’’ की और इसे ऐसा क्षेत्र बताया जिस पर दोनों देश सहयोग कर सकते हैं।

बीजेपी नेता हर्षवर्धन पाटिल की बेटी बनने जा रही है ठाकरे परिवार की बहू, 28 दिसंबर को होगी शादी


बीजेपी नेता हर्षवर्धन पाटिल की बेटी बनने जा रही है ठाकरे परिवार की बहू, 28 दिसंबर को होगी शादी

राजनीति में नेता लोग एक दूसरे के कट्टर दुश्मन होते है। एक दूसरे की पार्टियों की बुराईयां करते हैं लेकिन निजी जीवन में कई लोग एक दूसरे के रिश्तेदार होते हैं। एक ऐसा ही राजनीतिक संबंध महाराष्ट्र में जुड़ने जा रहा है। बीजेपी नेता हर्षवर्धन पाटिल ने मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे से मुलाकात की।

मुंबई। राजनीति में नेता लोग एक दूसरे के कट्टर दुश्मन होते है। एक दूसरे की पार्टियों की बुराईयां करते हैं लेकिन निजी जीवन में कई लोग एक दूसरे के रिश्तेदार होते हैं। एक ऐसा ही राजनीतिक संबंध महाराष्ट्र में जुड़ने जा रहा है। बीजेपी नेता हर्षवर्धन पाटिल ने मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे से मुलाकात की। हर्षवर्धन पाटिल मुंबई के शिवाजी पार्क इलाके में राज ठाकरे के नए आवास 'शिवतीर्थ' गए थे।

बीजेपी नेता की बेटी बनने जा रही हैं ठाकरे परिवार की बहू 

हर्षवर्धन पाटिल ने राज ठाकरे को अपनी बेटी अंकित पाटिल की शादी का इंविटेशन दिया। इस दौरान अंकिता पाटिल ने भी राज ठाकरे से मुलाकात की। आपको बता दें कि  हर्षवर्धन पाटिल की बेटी अंकिता पाटिल ठाकरे परिवार की बहू बनने जा रही हैं। अंकिता कि शादी निहार ठाकरे से होने जा रही है। निहार शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के दिवंगत बेटे बिंदु माधव ठाकरे के बेटे हैं। वह मुंबई में वकालत कर रहे हैं। वहीं अंकिता पाटिल बीजेपी नेता की बेटी हैं लेकिन वह कांग्रेस की सदस्य हैं।  28 दिसंबर को मुंबई के ताज होटल में ये शादी होगी।

अंकिता ने शेयर की राज ठाकरे के साथ तस्वीर 

अंकिता पाटिल ने फेसबुक पर राज ठाकरे से मुलाकात की एक फोटो शेयर की है। उन्होंने कैप्शन दिया है कि वह मुंबई में राज ठाकरे से मिली थे। पता चला है कि अंकिता पटेल ने राज ठाकरे को शादी में आमंत्रित करने के लिए उनसे मुलाकात की थी।

कौन हैं अंकिता पाटिल?

अंकिता पाटिल बीजेपी नेता हर्षवर्धन पाटिल की बेटी हैं। पुणे में बावड़ा-लखेवाड़ी जिला परिषद समूह का उपचुनाव लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद हुआ था जिसमें अंकिता पाटिल ने जीत के साथ राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने जिला परिषद का चुनाव रिकॉर्ड बहुमत से जीता था। हर्षवर्धन पाटिल भले ही बीजेपी में शामिल हो गए हैं, लेकिन अंकिता पाटिल अभी भी कांग्रेस में हैं। अंकिता पाटिल 2014 के चुनावों के लिए प्रचार और सोशल मीडिया की प्रभारी थीं। बाद में उन्हें एक निजी चीनी उद्योग संघ के सदस्य के रूप में काम करने का अवसर मिला।

कांग्रेस से बीजेपी में आए हर्षवर्धन पाटिल

राज्य में विधानसभा चुनाव के अवसर पर हर्षवर्धन पाटिल और अजीत पवार के बीच झगड़ा हुआ था। लोकसभा में सुप्रिया सुले का समर्थन करने के बावजूद, हर्षवर्धन पाटिल ने कांग्रेस छोड़ दी थी और भाजपा में शामिल हो गए थे, यह आरोप लगाते हुए कि एनसीपी ने उन्हें विधानसभा में इंदापुर सीट नहीं दी थी। जब उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ी तो उन्होंने सहयोगी राकांपा में आग लगा दी थी। हालांकि, इंदापुर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के बावजूद हर्षवर्धन पाटिल लगातार दूसरी बार हार गए।

Monday, December 6, 2021

तुर्की के राष्‍ट्रपति एर्दोगान को जान से मारने की कोशिश , कार में लगाया गया था बम


तुर्की के राष्‍ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान को जान से मारने की कोशिश की गई है। तुर्की की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने एक कार से बम बरामद किया है जिसे देश के दक्षिणीपूर्वी प्रांत सिर्त में एर्दोगान के काफिले में तैनात किया जाना था। सिर्त में एक कार्यक्रम में एर्दोगान को शामिल होना था। बताया जा रहा है कि इस बम को पुलिस की सुरक्षा कार के नीचे लगाया गया था। तुर्की की पुलिस ने यह खुलासा ऐसे समय पर किया है जब देश की अर्थव्‍यवस्‍था रसातल में पहुंच गई है और एर्दोगान आलोचना के घेरे में हैं।

तुर्की की पुलिस के बम डिस्‍पोजल दस्‍ते ने बम को नष्‍ट कर दिया है और फरेंसिक एक्‍सपर्ट बम की जांच कर रहे हैं। साथ ही पुलिस वाहन में फिंगर प्रिंट की तलाश की जा रही है। पुलिस गाड़ी में बम लगाकर हत्‍या का प्रयास करने वाले लोगों की तलाश कर रही है। अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस खुलासे के बाद भी एर्दोगान कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्‍होंने अपने भाषण में कहा कि देश और इलाके के भविष्‍य में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है।

एर्दोगान ने कहा कि उनका देश आगे भी देश के अंदर और बाहर आतंकवाद के खात्‍मे तक लड़ाई जारी रखेगा। बताया जा रहा है कि यह कार एक पुलिस अधिकारी की थी जिसे एर्दोगान के काफिले में शामिल होना था। इस बम का खुलासा उस समय हुआ जब इस पुलिस अधिकारी के एक दोस्‍त ने देखा कि कार के नीचे कुछ लगा है। इसके बाद उसकी जांच की गई तो बम का खुलासा हुआ।

बता दें कि तुर्की में पहले भी राष्‍ट्रपति एर्दोगान को मारने के प्रयास हो चुके हैं। साल 2016 में एर्दोगान को मारने का प्रयास हुआ था। इस दौरान 50 विद्रोही हेलिकॉप्‍टर से वहां पहुंच गए थे, जहां एर्दोगान छुट्टी मना रहे थे। इन विद्रोहियों के पहुंचने से ठीक पहले एर्दोगान फरार हो गए थे। इस मामले में तुर्की की एक अदालत ने 40 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साजिश रचने वाले लोगों में कई पूर्व सैनिक और आला अफसर शामिल थे।

किसानों की मांग कर सकती है देश को बर्बाद ऐसे में बिना एम एस पी क़ानून बनाये कैसे हो सकता है किसानों का कल्याण: प्रताप मिश्रा


किसान हमारा अन्नदाता है . उसी की मेहनत का परिणाम होता है कि हमारे घरों से कोई भूखा नहीं जाता .उसी की मेहनत की वजह से देश की अर्थव्यवस्था टिकी हुई है ..और ऐसे किसानों को तो हमें सरआखों पर बैठाना चाहिए .लेकिन आज आलम ये है कि किसान खेतों में कम और सड़को पर ज्यादा दिख रहे हैं. बीते एक साल से किसान आंदोलन उग्र दिखाई दिया क्योंकि उनको नए कृषि कानून रद्द करवाने थे . आखिरकार पीएम मोदी को किसान संगठनों के आगे झुकना पड़ा और नए कानूनों को वापस लेना पड़ा .लेकिन अब किसान एमएसपी के कानून को लेकर अड़ गए है ..लेकिन ये मांग जितनी आसान दिखती है उतनी है नहीं..सोचिए अगर सभी युवा सरकारी नौकरी की मांग लेकर सड़क पर बैठ जाएं तो क्या होगा? सभी लोग एक तय उम्र तक सैलरी और फिर उसके बाद पेंशन की गारंटी देने की मांग करें तो क्या होगा? हर तरह के सामान का उत्पादन करने वाले अपना उत्पाद न बिकने पर सरकार से उसे खरीदने की गारंटी मांगे तो क्या होगा? मोदी सरकार ने किसान आंदोलन की वजह से तीन कृषि कानूनों को वापस ले लिया है. इसे आंदोलकारी किसानों की जीत बताई जा रही है. और अब वे न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी कि एम.एस.पी पर कानून बनाने के मुद्दे को जोर-शोर उठा रहे हैं. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि मौजूदा समय में एमएसपी कानून लाना संभव भी है या नहीं? क्या सरकार की जेब इतनी बड़ी है कि वो इतना बड़ा फैसला ले सके? क्या एमएसपी कानून लाने से सच में किसानों का भला होगा और उनकी स्थिति सुधरेगी? अगर नहीं तो ऐसा क्या किया जाना चाहिए जिससे किसानों की स्थिति में बड़ा बदलाव आए.. ये समझना जरूरी है कि अगर एमएसपी का कानून बन जाए तो सरकार किसानों की फसल खरीदने के लिए मजबूर  हो जाएंगी. अभी तक वो इस दबाव से मुक्त है क्योंकि एमएसपी सिर्फ एक नीति है कानून नहीं. अगर कानून आने के बाद भी किसानों को उनकी फसलों की कीमत नहीं मिलती है तो वो कोर्ट जा सकते हैं. ऐसे में एमएसपी उनका हक होगा और सरकार को उसे मानना ही होगा.  एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर ये कानून बन गया तो सरकारें दिवालिया हो जाएंगी ..तो ये भी समझना जरूरी है कि आखिर किसानों की स्थिति में सुधार के लिए क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट्स ऐसा मानते है कि सरकार की पाबंदियों की वजह से किसानों को नुकसान हो रहा है. सरकार मनचाहे ढंग से स्टॉक लिमिट लगा देती है, एक्सपोर्ट बैन कर देती है,. काफी तरह की पाबंदियां है. किसानों के ऊपर एक सरकारी तलवार लटकती रहती है,.. एक्सपोर्ट में अनिश्चिताओं के कारण कृषि क्षेत्र में सुधार संभव नहीं है. सरकार को एक रुपया भी खर्च करने की जरूरत नहीं है. बस किसानों को तकनीक की आजादी और मार्केट की आजादी देने की जरूरत है. जिस दिन प्रधानमंत्री ये ऐलान कर देंगे कि कम से कम अगले 25 साल तक कोई पाबंदियां नहीं लगाएंगे. तो शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आएगा. बड़ी-बड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश के लिए आ जाएगी.लेकिन अगर यही स्थिति रही जो मौजूदा समय में है तो बस बैठकें होती रहेगीं मगर कोई हल नहीं निकलेगा।

मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव ने अखिलेश को दिया नया नाम


लखनऊ: समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहती है। एक फिर अपर्णा ने अपने बयान को लेकर चर्चा में है इस बार उन्होने अखिलेश को लेकर बयान दिया है जो राजनितिक तौर पर का महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अपर्णा यादव ने पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को समाजवाद का दूसरा नाम करार देते हुए केंद्र सरकार द्वारा तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने का श्रेय उन्हें दिया। अमेठी में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘धरतीपुत्र मुलायम सिंह और अखिलेश भैय्या जिन्दाबाद’ का नारा लगाते हुए कहा कि समाजवाद का दूसरा नाम अखिलेश हैं।

सपा की सरकार बनने पर अमेठी की सड़कें चमकेंगी

आपको बता दे अपर्णा आए दिन  पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ करती नजर आती हैं। ऐसे में उनका यह ताजा बयान राजनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। अपर्णा ने अमेठी से भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर हमला बोलते हुए कहा, ”अमेठी को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, मगर अमेठी में विकास तो कहीं नजर नहीं आ रहा है। मैं जिस तरफ से आयी वहां सड़कों पर गड्ढे ही नजर आये। सपा की सरकार बनने पर अमेठी की सड़कें चमकेंगी।

आज की सरकार सिर्फ फोटो खिंचवाती है

उन्होने मुलायम सिंह यादव का तारीफ करते हुए भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि नेता जी  ने महिलाओं के लिए शौचालय बनवाये, महिलाओं को सबसे पहले रसोई गैस देने का काम किया लेकिन लाभार्थियों के साथ कभी फोटो नहीं खिंचवाई। भाजपा का नाम लिए बीना कहा आज की सरकार फोटो खिंचवाती है।  समाजवादी पार्टी ने काम किया है इसलिए जनता एक बार फिर सपा की सरकार बनाएं। नेहरू-गांधी परिवार का गढ़ माने जाने वाले अमेठी में पहली बार आई अपर्णा ने कहा कि डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं। अगर दाम कम नहीं हुए तो इस बार जनता साइकिल यात्रा निकालेगी। इस बार जनता सपा को चुनेगी।

परम तत्व दर्शन