Thursday, January 20, 2022

भारतीय सेना की तत्काल कार्रवाई, चीनी सेना ने सकुशल लौटाया अगवा भारतीय युवक तिरोम



अरुणाचल प्रदेश से चीन की पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी द्वारा अगवा किया गया 17 वर्षीय किशोर मिराम टैरोन सकुशल भारत लौट आया है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक इस घटना की जानकारी होने के तुरंत बाद भारतीय सेना की तरफ से पीएलए से संपर्क किया गया था। भारतीय सेना ने चीनी सेना के इस कदम पर सख्त आपत्ति जताई थी। हालांकि पुष्टि होने के बाद युवक को सकुशल वापस भारतीय सीमा में भेज दिया गया है।

अरुणाचल प्रदेश के सांसद तापिर गाव ने दावा किया था कि अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले के एक 17 वर्षीय किशोर का पीएलएल ने अपहरण कर लिया है। सांसद ने बुधवार कहा कि चीनी सेना पीएलए ने मंगलवार को सेउंगला इलाके के लुंगटा जोर इलाके से बच्चे का अपहरण किया है। इस बच्चे की पहचानन मिराम टैरॉन के रूप में की थी। गाओ ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि टैरॉन के दोस्त जॉनी येइंग ने PLA द्वारा अपहरण के बारे में अधिकारियों को जानकारी दी है।

त्सांगपो नदी के तट पर हुआ अपहरण
सांसद ने कहा कि घटना उस स्थान पर हुई, जिस स्थान पर त्सांगपो नदी अरुणाचल प्रदेश में भारत में प्रवेश करती है। आपको बता दें कि त्सांगपो नदी को ही अरुणाचल प्रदेश में शियांग और असम में ब्रह्मपुत्र कहा जाता है। इससे पहले सांसद गाओ ने ट्वीट कर कहा था, चीनी पीएलए ने जिदो गांव की 17 वर्षीय मिराम तारोन का अपहरण कर लिया।

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘बच्चे की जल्द रिहाई के लिए सभी भारतीय सरकारी एजेंसियों से अनुरोध किया गया है। गाओ ने यह भी कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक को घटना के बारे में जानकारी दे दी है। साथ ही सांसद ने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय सेना को टैग किया।

चीनी सेना पहले भी कर चुकी ऐसी हरकत
चीनी सेना ने ऐसी करतूत पहली बार नहीं की है। चीन की पीएलए ने इस तरह की शर्मनाक हरकत पहले सितंबर 2020 में भी की थी। तब पीएलए ने अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले से 5 युवकों का अपहरण कर लिया और लगभग एक सप्ताह के बाद उन्हें रिहा कर दिया। ताजा घटना ऐसे समय में आई है, जब भारतीय सेना का अप्रैल 2020 से पूर्वी लद्दाख में पीएलए के साथ गतिरोध चल रहा है।

भारत चीन में सीमा विवाद जारी
भारत लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक चीन के साथ 3,400 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) साझा करता है। यह सीमा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है। इसे तीन सेक्टरों में बांटा गया है- पश्चिमी सेक्टर यानी जम्मू और कश्मीर, मध्य सेक्टर यानी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड और पूर्वी सेक्टर यानी सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश। हालांकि, दोनों देशों के बीच कोई पूर्ण सीमांकन नहीं है क्योंकि दोनों के बीच कई इलाकों को लेकर सीमा विवाद है।

Wednesday, January 19, 2022

BJP में शामिल होने के दावे पर सामने आया शिवपाल का बयान


लखनऊ, 19 जनवरी: प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने यूपी बीजेपी ज्वाइनिंग कमिटी के चेयरमैन डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेई के उस दावे को खारिज किया है जिसमें उन्होंने शिवपाल के बीजेपी में शामिल होने की बात कही है। शिवपाल ने कहा, 'श्री लक्ष्मीकांत बाजपेई जी के इस दावे में कोई सच्चाई नहीं है कि मैं भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकता हूं, यह दावा पूर्णतया निराधार और तथ्यहीन है।'
shivpal yadav says Laxmikant Bajpai claim that I can join BJP is baseless

बता दें, लक्ष्मीकांत बाजपेई ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा था कि शिवपाल सिंह भाजपा के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश से अपना परिवार नहीं संभल रहा है। अखिलेश यादव से अपने परिवार की टूटन नहीं संभल रही। अपर्णा यादव के भाजपा में शामिल होने पर लक्ष्मीकांत बाजपेई ने कहा कि इससे दोनों को फायदा होगा। शिवपाल ने कहा, 'श्री लक्ष्मीकांत बाजपेई जी के इस दावे में कोई सच्चाई नहीं है कि मैं भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकता हूं, यह दावा पूर्णतया निराधार और तथ्यहीन है।'

Aparna Yadav के बाद अब Shivpal Singh Yadav भी देंगे Akhilesh Yadav को झटका? BJP ने किया यह बड़ा दावा


भाजपा ने शिवपाल यादव को लेकर बड़ा दावा कर यूपी का सियासी तापमान बढ़ा दिया है

Uttar Pradesh Chunav News: भाजपा ने शिवपाल यादव को लेकर बड़ा दावा कर यूपी का सियासी तापमान बढ़ा दिया.

UP Chunav 2022: उत्तर प्रदेश (UP Chunav 2022) में होने वाले विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP News) ने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) से बदला लेना शुरू कर दिया है. मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव (Aparna Yadav) को अपने खेमे में शामिल कर भाजपा ने अखिलेश यादव को बड़ा झटका दिया है. अपर्णा यादव (Aparna Yadav Joins BJP) के बाद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को एक और झटका लग सकता है, इसका दावा भाजपा ने किया है. यूपी बीजेपी ज्वाइनिंग कमिटी के चेयरमैन डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेई ने यह बयान देकर उत्तर प्रदेश का सियासी पारा और बढ़ा दिया है कि अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) भी भाजपा के संपर्क में हैं.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश (UP Chunav 2022) में होने वाले विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP News) ने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) से बदला लेना शुरू कर दिया है. मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव (Aparna Yadav) को अपने खेमे में शामिल कर भाजपा ने अखिलेश यादव को बड़ा झटका दिया है. अपर्णा यादव (Aparna Yadav Joins BJP) के बाद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को एक और झटका लग सकता है, इसका दावा भाजपा ने किया है. यूपी बीजेपी ज्वाइनिंग कमिटी के चेयरमैन डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेई ने यह बयान देकर उत्तर प्रदेश का सियासी पारा और बढ़ा दिया है कि अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) भी भाजपा के संपर्क में हैं.

यूपी बीजेपी ज्वाइनिंग कमिटी के चेयरमैन डॉ लक्ष्मीकांत बाजपेई ने न्यूज18 से खास बातचीत में कहा कि शिवपाल सिंह भाजपा के संपर्क में हैं. शिवपाल यादव को सपा प्रमुख अखिलेश ने झटका दिया और अब शिवपाल बीजेपी के संपर्क में हैं. उन्होंने कहा कि अखिलेश से अपना परिवार नहीं संभल रहा है. अखिलेश यादव से अपने परिवार की टूटन नहीं संभल रही. अपर्णा यादव के भाजपा में शामिल होने पर लक्ष्मीकांत बाजपेई ने कहा कि इससे दोनों को फायदा होगा.

शिवपाल को लेकर भाजपा के दावे से उत्तर प्रदेश की सियासत में सनसनी फैल गई है. मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव ने जिस तरह से भाजपा का दामन थामकर अखिलेश को झटका दिया है, ऐसे में राजनीति में कुछ भी संभव है. माना जा रहा है कि लखनऊ कैंट विधानसभा सीट को लेकर अपर्णा यादव और अखिलेश यादव के बीच बात बिगड़ गई थी, जिसकी वजह से उन्होंने भाजपा के साथ जाने का फैसला किया. सूत्रों की मानें तो भाजपा अपर्णा को इस सीट से चुनावी मैदान में उतार सकती है.

गौरतलब है कि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से मतभेदों के बाद शिवपाल सिंह यादव ने अपनी अलग पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन किया था. समाजवादी पार्टी में वर्चस्व को लेकर दोनों के बीच लड़ाई थी. हालांकि, अब शिवपाल यादव की पार्टी का अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन हो गया है. इससे पहले शिवपाल ने कहा था कि अखिलेश यादव से कोई मतभेद नहीं है. उनको अपना नेता मान लिया है. उन्होंने कहा था कि मैं अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाऊंगा.

साइकिल सिंबल पर चुनाव लड़ने का ऐलान
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने इससे पहले बड़ा बयान देते हुए कहा था कि चुनाव में हम अपने सिंबल पर नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के साइकिल सिंबल पर कैंडिडेट उतारेंगे. इसके साथ शिवपाल ने कहा कि टिकटों का फैसला अखिलेश यादव पर छोड़ दिया है. शिवपाल यादव ने कहा था कि उन्‍होंने अखिलेश को अपना नेता मान लिया है.

‘पाकिस्तान में 5-स्टार सुविधाओं का लाभ उठा रहे अपराधी’ UN में भारत का D-कंपनी और दाऊद की तरफ इशारा


संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में भारत के राजदूत ने कहा कि 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम धमाकों (Mumbai Bomb Blasts) के लिए जिम्मेदार अपराधी पाकिस्तान में पांच-सितारा सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं और उन्हें सरकारी संरक्षण मिला हुआ है. उनका परोक्ष इशारा अंतरराष्ट्रीय अपराधी दाऊद इब्राहीम की तरफ था. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टी एस तिरुमूर्ति (TS Tirumurti) ने मंगलवार को ‘ग्लोबल काउंटर-टेररिज्म काउंसिल’ द्वारा आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक कार्रवाई सम्मेलन 2022’ में ये बातें कहीं.

उन्होंने कहा कि आतंकवाद और देशों के बीच संगठित अपराध के संपर्कों को पूरी तरह पहचाना जाना चाहिए और उन पर पुरजोर तरीके से ध्यान देना चाहिए (India on D-Company in UN). उन्होंने कहा, ‘हमने देखा है कि 1993 के मुंबई बम विस्फोटों के लिए जिम्मेदार अपराधियों के सिंडीकेट को ना केवल सरकारी सुरक्षा दी गई है बल्कि वह पांच-सितारा सुविधाओं का लुत्फ उठा रहा है.’ तिरुमूर्ति के बयानों को डी-कंपनी और उसके सरगना दाऊद इब्राहीम से जोड़कर देखा जा रहा है जिसके पाकिस्तान में छिपे होने की बात मानी जाती है।

दाऊद की मौजूदगी को कबूल किया

पाकिस्तान ने अगस्त 2020 में पहली बार अपने यहां दाऊद की मौजूदगी को कबूल किया था. इससे पहले, वहां की सरकार ने 88 प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों और उनके नेताओं पर पाबंदियां लगाई थीं, जिनमें भारत द्वारा वांछित अंतरराष्ट्रीय अपराधी दाऊद का भी नाम था (Pakistan Terrorism). संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 2022 के लिए आतंकवाद निरोधक कार्रवाई समिति के अध्यक्ष तिरुमूर्ति ने कहा कि ‘1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति’ समेत संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध प्रणलियां आतंकवाद के वित्तपोषण, आतंकवादियों की यात्राओं को रोकने और आतंकवादियों तक हथियारों की पहुंच पर लगाम लगाने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं.

उपायों का क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इन उपायों का क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. भारतीय राजदूत ने कहा, ‘यह महत्वपूर्ण है कि परिषद द्वारा स्थापित सभी प्रतिबंध व्यवस्थाएं अपनी कार्य प्रणाली और निर्णय लेने में उचित प्रक्रिया का पालन करें. निर्णय लेने की प्रक्रिया और आतंकवादी संगठनों (Terrorist Organisation) को सूचीबद्ध करने या सूची से हटाने के कदम उद्देश्यपरक, त्वरित, प्रामाणिक, साक्ष्य आधारित और पारदर्शी होने चाहिए और राजनीतिक एवं धार्मिक विचार-विमर्श के लिए नहीं होने चाहिए.’

Monday, January 3, 2022

पाक: 1971 के आत्मसमर्पण से भी ज्यादा शर्मनाक है पाकिस्तान सरकार का ये बिल

इस्लामाबाद. आतंकवाद (terrorism) का गढ़ बन चुका पाकिस्तान (pakistan) देश चलाने के लिए दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं (international institutions) के कर्ज (debt) पर बुरी तरह निर्भर है। इसी कर्ज की मजबूरी में पाकिस्तान की सरकार (government of pakistan) को कुछ ऐसे कदम उठाने पड़ रहे हैं जिसकी दुनिया भर में बदनामी हो रही है। पाक के वित्त मंत्री शौकत तरीन ने 30 दिसंबर को फाइनेंस (सप्लीमेंट्री) बिल 2021(Finance Bill 2021) , जिसे विपक्ष मिनी बजट (Mini Budget) कह रहा है, पेश किया। इस बिल को लेकर विपक्षी पार्टियों (Opposition Parties) ने इमरान खान सरकार (imran khan government) को घेरा है और सत्ताधारी पार्टी पर पाकिस्तान को आईएमएफ (IMF) के हाथों बेचने का आरोप लगाया है। यहां तक कि पाकिस्तान के विपक्षी दल के सांसद ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि सरकार का ये कदम 1971 की जंग (war) में किए गए आत्मसमर्पण से भी ज्यादा शर्मनाक है।

पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के मुताबिक  फाइनेंस (Supplementary) विधेयक के तहत 144  सामानों पर 17% जीएसटी (GST) लगाया जाएगा।  इनमें मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन, इंपोर्ट खाद्य तेल, चिकन, दवायों के लिए कच्चा सामान, कृषि के लिए बीज, बैटरी, आटा, पैक्ड डेयरी प्रोडक्टस, गन्ने आदि पर टैक्स लगाना शामिल है। ये टैक्स पाकिस्तान सरकार के राजस्व को बढ़ाने के मकसद से लगाए गए हैं। इस मिनी बजट से महंगाई से जूझ रही पाकिस्तानी जनता पर टैक्स (tax) का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

इमरान सरकार इस बिल को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की समीक्षा बैठक को देखते हुए लाई है। आईएमएफ ने पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर का फंड देने की घोषणा की थी लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें भी रखी थीं। जैसे- पाकिस्तान सरकार अपना बजट घाटा कम करे और राजस्व बढ़ाएं। 12 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) पाकिस्तान की सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की समीक्षा करने वाला है। आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड द्वारा मंजूरी मिलने के बाद ही लगभग 1 अरब डॉलर की किस्त पाकिस्तान को मिल सकेगी।

इमरान सरकार के इस बिल पर विपक्षी दलों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार के पास अब अपने आर्थिक नीतियों पर फैसले लेने की ताकत नहीं रह गई है। सरकार आईएमएफ के दबाव में आकर हर कदम उठा रही है।

पाकिस्तान की प्रमुख विपक्षी पार्टी 'पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज' (PML-N) के नेता ख्वाजा आसिफ ने सदन में पूर्वी पाकिस्तान यानी बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में पाकिस्तान की हार का जिक्र करते हुए कहा, पाकिस्तान की आर्थिक संप्रभुता का समर्पण, 1971 में आत्मसमर्पण से ज्यादा खतरनाक है।  ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सरकार इस बिल के तहत स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान का नियंत्रण IMF को दे रही है। उन्होंने आगे कहा कि आप स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान का नियंत्रण IMF के हाथों में दे रहे हैं। कृपया पाकिस्तान के लोगों पर रहम करें। पाकिस्तान को मत बेचें। आपने लोगों को इजाजत दी और पाकिस्तान तीन सालों तक लुटता रहा।

विपक्षी के आरोपों का जवाब देते हुए पाकिस्तान के योजना और विकास मंत्री असद उमर ने कहा कि विपक्ष SBP संशोधन विधेयक पर शोर मचाकर 'देश को डराने' की कोशिश कर रहा है। मंत्री ने कहा कि उनमें और हमारे बीच अंतर ये है कि जब वे डेंगू को रोकने के लिए भी काम करते हैं, तो उन्हें खुद इसके बारे में विज्ञापन देना पड़ता है। लेकिन जब हम कोविड-19 को रोकने के लिए काम करते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेतृत्व वाली सरकार की प्रशंसा करती हैं।

बिल को लेकर पाकिस्तान की संसद में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी उछाला गया। मंत्री असद उमर ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सरकार की आलोचना करने के लिए विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने PML-N सुप्रीमो नवाज शरीफ पर निशाना साधते हुए कहा, नवाज शरीफ ने मोदी को अपने घर आमंत्रित किया था।'

एक वकील जो बन गया 'रावण', पश्चिमी यूपी को बनाया गढ़, जानें विधानसभा चुनाव में कितनी है चंद्रशेखर की ताकत

साल 2017 में सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलितों और सवर्णों के बीच हिंसा की एक घटना हुई। इस हिंसा के दौरान एक संगठन उभरकर सामने आया, जिसका नाम था भीम आर्मी। भीम आर्मी का पूरा नाम 'भारत एकता मिशन भीम आर्मी' है। इसका गठन करीब 6 साल पहले किया गया था। इस संगठन के संस्थापक और अध्यक्ष हैं चंद्रशेखर। उन्होंने अपना उपनाम 'रावण' रखा हुआ है। रावण पेशे से वकील हैं।
क्यों कहते हैं खुद को रावण:
देहरादून से लॉ की पढ़ाई करने वाले चंद्रशेखर खुद को 'रावण' कहलाना पसंद करते हैं। इसके पीछे चंद्रशेखर का तर्क था कि 'भले ही रावण का नकारात्मक चित्रण किया जाता रहा हो लेकिन जो व्यक्ति अपनी बहन के सम्मान के लिए लड़ सकता हो और अपना सब कुछ दांव पर लगा सकता हो वो ग़लत कैसे हो सकता है।'
गांव के कुछ युवाओं ने मिलकर बनाई भीम आर्मी:
शब्बीरपुर में हुई हिंसा के बाद 'रावण' ने 9 मई 2017 को सहारनपुर के रामनगर में महापंचायत बुलाई। इस महापंचायत के लिए पुलिस ने अनुमति नहीं दी, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए महापंचायत की सूचना भेजी गई। सैंकड़ों की संख्या में लोग इसमें शामिल होने के लिए पहुंचे, जिन्हें रोकने के दौरान पुलिस और भीम आर्मी के समर्थकों के बीच संघर्ष हुआ और इसके बाद चंद्रशेखर के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। करीब छह साल पहले 2011 में गांव के कुछ युवाओं के साथ मिलकर चंद्रशेखर ने 'भारत एकता मिशन भीम आर्मी' का गठन किया था। भीम आर्मी आज दलित युवाओं का एक पसंदीदा संगठन बन गया है।
किस उद्देश्य से हुई संगठन की स्थापना:
भीम आर्मी की स्थापना दलित समुदाय में शिक्षा के प्रसार को लेकर अक्टूबर 2015 में हुई थी, इसके बाद सितंबर 2016 में सहारनपुर के छुटमलपुर में स्थित एएचपी इंटर कॉलेज में दलित छात्रों की कथित पिटाई के विरोध में हुए प्रदर्शन से ये संगठन चर्चा में आया। चंद्रशेखर का दावा है कि भीम आर्मी के सदस्य दलित समुदाय के बच्चों के साथ हो रहे कथित भेदभाव का मुखर विरोध करते हैं और इसी के कारण इस संगठन की पहुंच दूर दराज़ के गांवों तक हुई है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का 'ब्राह्मण कार्ड', विजय रथ यात्रा से पहुंचकर परशुराम मंदिर का करेंगे उद्घाटन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भगवान परशुराम का मंदिर आज आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। समाजवादी पार्टी (SP) के नेता संतोष पांडे ने भगवान परशुराम का ये मंदिर लखनऊ में पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के किनारे बनवाया है। 

SP President Akhilesh Yadav played Brahmin card will inaugurate Parashuram temple after reaching Vijay Rath Yatra

लखनऊ: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में विधानसभा चुनाव (UP Vidhansabha chunav 2022) से पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh yadav) ने एक बार फिर प्रदेश के ब्राह्मण वोटरों को साधने के लिए ब्राह्मण कार्ड खेला है। समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) की विजय रथ यात्रा (Vijay rath yatra) के 10 वें चरण की रविवार को शुरूआत हो गई। लखनऊ के गोसाईगंज से शुरू हुई अखिलेश की विजय रथ यात्रा तकरीबन 15 किलोमीटर के बाद महुराकला में समाप्त होगी। वहां पहुंचकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव परशुराम मंदिर का उद्घाटन भी करेंगे। 

यूपी में विकास हो गया है ठप- अखिलेश यादव
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा कि लगभग साढ़े 4 साल से ज्यादा के समय में उत्तर प्रदेश की जनता को दुख, तकलीफ और परेशानी मिली है, जहां विकास होना चाहिए था। आज विकास पूरी तरह से ठप दिखाई दे रहा है। विकास आगे नहीं बढ़ पा रहा है। 

बीजेपी की सरकार में बढ़ी महंगाई- अखिलेश यादव
उन्होंने आगे कहा कि बिजनेस को बढ़ावा मिलना चाहिए था। बिजनेस भी आज उस गति से नहीं बढ़ पा रहा है जिसके कारण आज महंगाई भी बढ़ी है। बेरोजगारी भी बढ़ी है। अगर किसी भी आंकड़े को उठाकर देख लें आज UP हर आंकड़े में पीछे दिखाई दे रहा है। चाहे स्वास्थ्य के आंकड़े हों देश में आपका उत्तर प्रदेश बहुत पीछे दिखाई दे रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी जहां आगे बढ़ना चाहिए था UP आगे नहीं बढ़ रहा है बल्कि पीछे बढ़ रहा है।

विजय रथ यात्रा के दौरान अखिलेश यादव ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जिस चकगजरिया स्थान से हम लोग अपनी विजय रथ यात्रा शुरू करने जा रहे हैं। यह स्थान वो है, जहां एक समय पर जंगल था, डेयरी का थोड़ा बहुत काम होता था। सपा सरकार में बना चकगजरिया ना केवल लखनऊ के लिए बल्कि देश के लिए उदाहरण है।

परम तत्व दर्शन