Tuesday, February 8, 2022

अमेरिका की धमकी, रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो खत्म कर देंगे गैस पाइपलाइन


Russia Ukraine Conflict: अमेरिका की धमकी, रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो खत्म कर देंगे गैस पाइपलाइन, जानें भारत पर क्या होगा असर
 रूस ने यूक्रेन की सीमा पर हजारों सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है। साथ ही नई सैन्य बटालियन भी तैनात की जा रही है।

रूस और यूक्रेन के बीच गहराते युद्ध संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने कहा है कि यदि रूस यूक्रेन पर हमला करता तो हम रूस की गैस पाइपलाइन को खत्म कर देंगे। ऐसे में यदि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध होता है तो उसके असर से भारत भी नहीं बच पाएगा। भारत में भी गैस और पेट्रोल डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

जर्मन नेता से मिले जो बिडेन

इस बीच अमेरिका ने कूटनीतिक घेराबंदी करते हुए सोमवार को जर्मनी की नए नेता से मुलाकात की थी। उसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने कहा कि रूस यदि हमला करता है तो हम रूस और जर्मनी के बीच गैस पाइप लाइन के खत्म कर देंगे। वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पलटवार करते हुए कहा कि सिर्फ अमेरिकी और उसके सहयोगी देश ही आक्रमण की बातें कर रहे हैं।

रूस-यूक्रेन सीमा पर बढ़ा सैन्य बल

गौरतलब है कि रूस ने यूक्रेन की सीमा पर हजारों सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है। साथ ही नई सैन्य बटालियन भी तैनात की जा रही है। यही कारण है कि व्हाइट हाउस लगातार युद्ध की आशंका व्यक्त कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन यूरोपीय संघ और अन्य सहयोगी देशों की मदद से रूस के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के लिए समर्थन को मजबूत करना चाहता है।

इसलिए बढ़ रही भारत की चिंता

स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार भारत को अधिकांश सैन्य हथियारों की सप्लाई रूस से होती है और यह एक बेहद अहम पक्ष है। लद्दाख में चीन और भारत के सैनिक आमने-सामने हैं, ऐसे में यूक्रेन के मामले में भारत, रूस को नाराज करते ज्यादा जोखिम लेने की स्थिति में नहीं है। वहीं दूसरी तरफ भारत अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों का भी अहम साझेदार है, इसलिए भारत इस युद्ध के चलते धर्मसंकट की स्थिति में पहुंच सकता है।

दुनिया के दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है रूस

यदि रूस और यूक्रेन में बीच युद्ध संकट गहराता है तो भारत में भी गैस व पेट्रोल डीजल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। दरअसल रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। युद्ध के चलते आशंका जताई जा रही है कि गैस ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रूस और यूक्रेन में तनाव बना रहा तो क्रूड ऑयल की कीमत फिर से आसमान पर पहुंच जाएगी।

सपा प्रत्याशी का अखिलेश को ठेंगा, कहा- पार्टी जाए भाड़ में; देश के लिए बीजेपी को समर्थन देने की भी कही बात


गाजियाबाद। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को उनके ही एक प्रत्याशी ने ठेंगा दिखा दिया। ये प्रत्याशी हैं गाजियाबाद से अमरपाल शर्मा। अमरपाल सोमवार को प्रचार कर रहे थे। एक जगह कुछ लोगों को उन्होंने जुटाया और उन्हें संबोधित करने लगे। अपने संबोधन में अमरपाल ने जो कहा, वो अखिलेश यादव के लिए किसी झटके से कम नहीं होगा। अमरपाल शर्मा ने यहां सपा के बारे में ऐसी बात कही, जैसा किसी पार्टी के उम्मीदवार की जुबान से आपने नहीं सुना होगा। अमरपाल ने सपा के बारे में क्या कहा, ये आपको आज हम बताते हैं।

sp candidate amarpal sharma

अमरपाल शर्मा ने माइक हाथ में पकड़ा और कहा कि भाड़ में जाए पार्टी (सपा)। आपका पार्टी से लेना-देना नहीं है। मेरा पार्टी से लेना है। आप व्यक्तित्व को वोट करो, दल को वोट मत करो। अमरपाल यहीं नहीं रुके। उन्होंने बीजेपी का नाम लिए बगैर उसे भी समर्थन देने की बात कह दी। सपा प्रत्याशी ने कहा कि आप सभी दल (बीजेपी) को जब देश की बात हो तो वोट दो। मैं भी उस वक्त आपके साथ खड़ा मिलूंगा। अमरपाल की ये वाणी सुनकर वहां मौजूद लोग समझ नहीं पा रहे थे कि वो कहें तो क्या कहें। ये पहला मौका है, जब सपा के किसी नेता ने अपनी ही पार्टी को भाड़ में जाने की बात कही है। आप भी सुनिए कि अमरपाल ने क्या कहा।

बता दें कि अखिलेश यादव ने जहां बीजेपी में तोड़फोड़ मचाई, वहीं, तमाम नेता टिकट कटने की वजह से सपा का कैंप छोड़ भी गए। कांग्रेस से टूटकर इमरान मसूद सपा में आए, लेकिन उन्हें भी अखिलेश ने टिकट नहीं दिया। वहीं, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर ने अखिलेश से गठबंधन करना चाहा, लेकिन उन्हें मनचाही सीट नहीं मिली। चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि अखिलेश ने दलितों का अपमान तक किया। अब अमरपाल शर्मा के सपा भाड़ में जाए कहने पर अखिलेश यादव क्या कदम उठाते हैं, इस पर सबकी नजर है।

Monday, February 7, 2022

कश्मीर मुद्दे पर रूस ने मीडिया को किया खारिज, कहा- ये भारत-Pak का आपसी मामला


रेडफिश डिजिटल, कश्मीर प्रोपगेंडा, पुतिन सरकार

कश्मीर मामले पर ‘रूसी मीडिया’ के प्रोपगेंडे को रूस की पुतिन सरकार ने लताड़ लगाई है। कश्मीर के हालातों को फिलिस्तीन से जोड़ने वाली डॉक्यूमेंट्री की झलक दिखाते हुए रेडफिश डिजिटल मीडिया ने कुछ समय पहले एक ट्वीट किया था। इसी ट्वीट पर पुतिन सरकार की प्रतिक्रिया आई और उन्होंने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कश्मीर पर होने वाली कोई भी बात भारत-पाकिस्तान का आपसी मसला है।

उल्लेखनीय है कि ट्विटर पर रेडफिश डिजिटल मीडिया को रूस का सरकारी मीडिया बताया गया है। रेडफिश ने खुद को तमाम अवार्ड जीतने वाले मीडिया के तौर पर ट्विटर पर पेश किया है। जानकारी के मुताबिक, इसी मीडिया ने पिछले दिनों एक डॉक्यूमेंट्री शेयर की थी जिसमें कश्मीर के हालातों की तुलना फिलिस्तीन से हो रखी थी। जब डॉक्यूमेंट्री देख लोगों ने इस पर आवाज उठाई और इसका विरोध हुआ तो रूसी दूतावास को इस मामले पर अपना बयान जारी करना पड़ा।

रूसी दूतावास ने एक बयान में साफ कहा, ”कश्मीर के मुद्दे और द्विपक्षीय विवादों में रूस के हस्तक्षेप नहीं करने के सिद्धांत को लेकर उसके आधिकारिक रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। कश्मीर मसले का समाधान सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच ही हो सकता है और यह केवल 1972 के शिमला समझौते (Simla Agreement of 1972) और 1999 के लाहौर डिक्लेरेशन (Lahore Declaration of 1999) के तहत ही पूरा होगा।”

एबेंसी ने आगे अपने बयान में ये जानकारी भी दी कि रेडफिश का रूसी सरकारी मीडिया से लेना-देना नहीं है। चैनल ने भ्रामक लेबल अपने ट्विटर पर लगाया हुआ है। इस मीडिया को सरकार का समर्थन नहीं है। चैनल पूर्णत: स्वतंत्र है और ये अपनी संपादकीय नीतियों से चलता है। दूतावास के बयान में मामले की जटिलता व ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए मीडिया चैनल को संतुलित रहने की सलाह दी गई।

बड़ा बेआबरू होकर निकला पाकिस्तान, कश्मीरियों ने ही फेरा अरमानों पर पानी


  • पाकिस्तान की हरकत का कश्मीरियों ने दिया जवाब
  • KASHMIR SOLIDARITY DAY पर पाक के खिलाफ निकाली रैली
  • भारत का दुष्प्रचार करने के लिए दिवस का किया गया था आयोजन
बड़ा बेआबरू होकर निकला पाकिस्तान, कश्मीरियों ने ही फेरा अरमानों पर पानी

नई दिल्लीः पाकिस्तान ने कश्मीर मामले पर दुष्प्रचार करने के लिए 5 फरवरी को पूरी दुनिया में 'KASHMIR SOLIDARITY DAY' मनाया.  इसको मनाने के लिए पाकिस्तान के विदेश विभाग ने पूरी दुनिया में अपने दूतावासों और उच्चायोगों को खास निर्देश दिए. हालांकि, लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी इस कवायद का कोई नतीज़ा नहीं निकला.

POK में विरोध प्रदर्शन

वहीं, कश्मीर में हुए पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शनों ने इस आयोजन की हवा निकाल दी. रही-सही कसर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हुए पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शनों ने पूरी कर दी, जिनमें वहां के निवासियों ने कश्मीर के नाम पर सालों से शोषण के विरोध में आवाज़ उठाई और श्रीनगर की प्रगति के मुका़बले इस्लामाबाद के भी पीछे होने की बात कह दी.

भारत के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए लगाई थी ताकत

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने 3 फरवरी को पूरी दुनिया में अपने मिशन व दूतावासों को आदेश दिया कि 5 फरवरी को KASHMIR SOLIDARITY DAY पर भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने में पूरी ताक़त लगा दें. आयोजनों पर प्रतिबंधों के कारण डिजिटल, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ सोशल मीडिया पर भारत के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा जहर उगलने के निर्देश के साथ एक डाक्यूमेंट भी तैयार करके भेजा गया, जिसे सोशल मीडिया पर फैलाना था.

कई प्रतियोगिताओं का किया गया था आयोजन

इसके लिए ट्विटर कैंपेन के अलावा, डिबेट्स, वेबिनार, लेख और पेंटिंग प्रतियोगिताएं आयोजित की जानी थी. पाकिस्तान की अमेरिका, नॉर्वे, जर्मनी, आस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया सहित खाड़ी, पूर्वी यूरोप, और एशिया के पाकिस्तानी मिशनों ने पूरे उत्साह के साथ इस अभियान में हिस्सा लिया. पाकिस्तान की मेन स्ट्रीम मीडिया के प्रिंट और टीवी ने सरकारी आदेश के मुताबिक, इस आयोजन को सफ़ल बनाने के लिए पूरी ताक़त लगा दी. पाकिस्तान की सरकारी प्रचार एजेंसी ISPR के सहयोगी ट्विटर इंन्फ्लुएंसर्स ने लगातार ट्वीट पर माहौल बनाया.

फर्जी ट्विटर हैंडल का किया इस्तेमाल

इसके अलावा फर्ज़ी ट्विटर हैंडल्स के ज़रिए एक नई ट्रोल आर्मी बनाई गई. 27 जनवरी से हर रोज़ फर्ज़ी हैंडल बनाए गए.  4 फरवरी को ही इस दिन लगभग 1000 नए हैंडल्स बनाए गए और ट्वीट किए गए. केवल 4 फरवरी को ही इन हैंडल्स से लगभग 3 लाख ट्वीट किए गए, ताकि कश्मीर सालिडेरिटी डे को वायरल किया जा सके. जानकारों के मुताबिक इन आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए. 

कश्मीरियों ने निकाली रैली

वहीं, इस पूरी मोर्चाबंदी की कश्मीरियों ने धज्जियां उड़ा दी. भारत में कश्मीर के अलग-अलग शहरों और गांवों में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी के खिलाफ़ रैलियां निकाली गईं. रैली में आए युवाओं ने खुलकर कश्मीर में 30 साल से चल रहे खून-खराबे के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि वो हर हालत में भारतीय रहेंगे. वहीं, पाक अधिकृत कश्मीर (POK) में पाकिस्तान के खिलाफ़ गुस्सा तेज़ी से फूट पड़ा. मंग, हज़ीरा और बाग में पाकिस्तान विरोधी रैलियां निकाली गईं.  इन रैलियों में 5 फरवरी को फ्रॉड डे का नाम दिया गया. मंग में अवामी वर्कर्स पार्टी के एक कार्यकर्ता ने आम लोगों से खुलकर कहा कि पाकिस्तान ने POK को कभी बराबरी का दर्ज़ा नहीं दिया और श्रीनगर की प्रगति का मुक़ाबला पीओके के शहर क्या इस्लामाबाद तक नहीं कर सकता है.

जमाते इस्लामी ने की थी इस दिवस की शुरुआत

KASHMIR SOLIDARITY DAY की शुरुआत 1990 में जमाते इस्लामी ने की थी. इसके अगले साल नवाज़ शरीफ़ ने इस दिन हड़ताल आयोजित करके, इसे बड़ा बनाया. इसमें कई प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन भी भाग लेते हैं और भारत विरोधी अभियान चलाने वालों ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करना शुरू किया है. 2007 में आतंकवादी संगठन लश्करे तैयबा की संस्था जमात उद दावा ने इस दिन पर बड़ा आयोजन किया था, जिसमें लश्करे तैयबा के मुखिया हाफ़िज़ सईद को प्रमुख वक्ता के तौर पर बुलाया गया था.

'गद्दारों का गुणगान करती थीं लता मंगेशकर, जहन्नुम भी नसीब नहीं होगा': इस्लामी कट्टरपंथियों ने निकाली भड़ास


लता मंगेशकर, निधन, सुर साम्राज्ञी

जहाँ सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के निधन के बाद पूरा देश और दुनिया में भर संगीत प्रेमी लोग शोक में हैं, वहीं कुछ असामाजिक तत्व ऐसे हैं जो सोशल मीडिया पर इसका जश्न मना रहे हैं। ‘HaHa’ के रिएक्शंस भी दे रहे हैं। ऐसे ही लोगों में से एक है हमदान अंसारी। एक ट्विटर हैंडल ने जब लता मंगेशकर की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की, तब हमदान अंसारी ने हँसी वाली 5 इमोजी शेयर कर के मजाक बनाया। उक्त ट्विटर यूजर ने यूपी पुलिस से इस मामले में कार्र्रवाई की माँग की है।

हमदान अंसारी ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “अल्लाह से दुआ करो जहन्नुम जगह दे दे, लेकिन उसका तो वहाँ का भी नसीब नहीं लगता।” इसके बाद उसने ‘नेता जी’ नाम के उस ट्विटर यूजर को भी धमकाया, जिसने लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि दी थी। उसने लिखा, “निकल ले वरना तेरा भी इंतकाल कर दूँगा।” हालाँकि, यूपी पुलिस को टैग किए जाने के बाद डर के मारे उसने अपनी ट्वीट्स को डिलीट कर दिया। लोगों ने उस पर कार्रवाई की माँग की है।

वहीं मोहम्मद शाह आलम नाम के एक व्यक्ति ने लता मंगेशकर से जुडी NDTV की एक खबर पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “अच्छी गायिका थीं, लेकिन ये भी विवादों से घिरी रहती थीं। मौकापरस्त और स्वार्थी चरित्र वाली थीं। ये वही हैं, जब इनके घर के सामने फ्लाईओवर बन रहा था तो इन्होंने देश छोड़ने की धमकी दे डाली थी। ये वही हैं, जिन्होंने कई गायकों का करियर ख़त्म करा दिया। इन्होंने गद्दारों को महान बताया। गद्दारों को महान बताने वाला भला ‘भारत रत्न’ कैसे हो सकता है?”

यूक्रेन पर ‘किसी भी दिन’ हो सकता है हमला: अमेरिका


विलमिंगटन (अमेरिका)| अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने रविवार को कहा कि रूस यूक्रेन पर ‘किसी भी दिन’ हमला कर सकता है।

उन्होंने कहा कि संघर्ष की शुरुआत हुई तो मानवता को बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार की यह दूसरी चेतावनी है।

इसके पहले अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की थी कि रूस ने महीने के मध्य तक अपनी मंशा के अनुरूप कम से कम 70 फीसदी सैन्य साजोसामान एकत्र कर लिया था।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इसका मकसद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन के खिलाफ हमला करने का विकल्प मुहैया कराना है।

सुलिवन ने कहा, ‘‘अगर युद्ध छिड़ता है, तो यूक्रेन को बड़ी मानवीय कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन अपनी तैयारियों और प्रतिक्रिया के आधार पर हमारा विश्वास है कि रूस को भी इसके लिए रणनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी।’’ उन्होंने सीधे तौर पर उन खबरों का जिक्र नहीं किया जिसके मुताबिक व्हाइट हाउस ने सांसदों को जानकारी दी है कि रूस आक्रमण करके कीव पर त्वरित कब्जा कर सकता है जिसमें 50,000 लोग हताहत हो सकते हैं।

सुलिवन ने कहा कि अब भी एक राजनयिक समाधान संभव है। प्रशासन ने हाल के दिनों में चेतावनी दी थी कि रूस तेजी से यूक्रेन के क्षेत्र पर आक्रमण करने का इरादा रखता है।

बाइडन प्रशासन के अधिकारियों ने पिछले सप्ताह कहा था कि खुफिया जानकारी के मुताबिक क्रेमलिन ने यूक्रेन के सुरक्षा बलों द्वारा हमला करने की कहानी गढ़ने के लिए एक विस्तृत साजिश पर काम किया था, ताकि रूस को अपने पड़ोसी के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का बहाना मिल सके।

धर्म संसद में कही गई बातें हिंदुत्व नहीं, संघ बांटने का काम नहीं करता

बेहद सीधे और सपाट लहजे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने धर्म संसद के बैनर तले आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में हिंदुत्व औऱ हिंदू से जुड़ी बातों से खुद को किनारे कर लिया है. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लोकतंत्र और वीर सावरकर का जिक्र करते हुए धर्म संसद की बातों से असहमति जताई है. गौरतलब है कि विगत दिनों दो स्थानों पर आयोजित धर्म संसद में बेहद भड़काऊ बातें कही गई थीं. उसका जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस और हिंदुत्व में विश्वास रखने वाले लोग ऐसी बातों पर भरोसा नहीं करते हैं.

गुस्से में कही गई बात हिंदुत्व नहीं
हिंदुत्व और राष्ट्रीय अखंडता विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला में उन्होंने कहा, धर्म संसद से निकली बातें हिंदू और हिंदुत्व की परिभाषा के अनुसार नहीं थीं. अगर कोई बात किसी समय गुस्से में कही जाए तो वह हिंदुत्व नहीं है. वीर सावरकर का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि सावरकर ने हिंदू समुदाय की एकता और उसे संगठित करने की बात कही थी. हालांकि उनकी यह बात भगवद गीता का संदर्भ में कही थी. किसी को खत्म करने या नुकसान पहुंचाने के परिप्रेक्ष्य में नहीं.

परम तत्व दर्शन