Wednesday, February 9, 2022

रूसी नौसेना के 6 युद्धपोत भूमध्य सागर से दुनिया को चकमा देते हुए काला सागर पहुँचे


मॉस्को: यूक्रेन से तनाव के बीच बाल्टिक सागर से चले रूसी नौसेना (Russian Navy Ships) के 6 युद्धपोत अब काला सागर (Russian Navy Black Sea Fleet) पहुंच चुके हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय (Russian Defence Ministry) ने पहले बताया था कि इन युद्धपोतों को भूमध्य सागर के इलाके में तैनात किया जाएगा।
इनके किसी युद्धाभ्यास में भी हिस्सा लेने की बात कही गई थी। लेकिन, पल-पल बदलते हालात (Russia Ukraine War) के कारण इन युद्धपोतों को यूक्रेन के सबसे नजदीक काला सागर में भेजा गया है। संभावना जताई जा रही है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) सीधे तौर पर अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो से भिड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
नाटो ने भी रूस की आक्रामकता का जवाब देने के लिए पूर्वी यूरोप के कई देशों में सैनिकों, हथियारों और युद्धपोतों को तैनात कर दिया है। इस समय अमेरिकी नौसेना, इटैलियन नौसेना और फ्रेंच नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर भी इसी इलाके में गश्त लगा रहे हैं। ऐसे में रूस के सामने चुनौती न सिर्फ नाटो की सैन्य क्षमता का मुकाबला करना है, बल्कि यूक्रेन पर भी दबाव बनाए रखना है।
  • नाटो के खिलाफ कार्रवाई में निभाएंगे बड़ी भूमिका
    कई डिफेंस एक्सपर्ट्स ने आशंका जताई है कि नाटो के खिलाफ कार्रवाई में रूसी नौसेना के ये युद्धपोत बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इनमें से पांच 775 रोपुचा क्लास के एम्फीबियस वॉरफेयर शिप हैं, जबकि एक प्रोजेक्ट 11711 इवान ग्रेन क्लास लैंडिंग शिप है। रूस ने 31 जनवरी को बाल्टिक सागर से इनमें से पहले तीन युद्धपोतों को एक साथ भेजा था। इसके बाद 2 फरवरी को तीन और युद्धपोतों को भेजा गया। खराब मौसम होने के बावजूद ये सभी 6 युद्धपोत समय से पहले ही काला सागर इलाके में पहुंच गए हैं।
  • क्या होता है एम्फीबियस युद्धपोत
    एम्फीबियस युद्धपोतों को दुश्मन के समुद्री तट पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये शिप उथले पानी में भी आसानी से तैर सकते हैं। ऐसे युद्धपोतों पर बड़ी संख्या में सैनिक, टैंक, आर्मर्ड व्हीकल और दूसरे उपकरण तैनात रहते हैं। इनके जरिए सेना को तेजी से समुद्री किनारों पर पहुंचाया जा सकता है। एम्फीबियस शिप किसी भी नौसेना की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती हैं। तटीय इलाकों पर हमला करने, हथियार और रसद पहुंचाने में एम्फीबियस पोत का बहुत बड़ा योगदान होता है। इनके अंदर हथियार, उपकरणों, गाड़ियों और सैनिकों के लिए बहुत जगह होती है।

Tuesday, February 8, 2022

सपा के पूर्व सांसद का विवादित बयान, बोले- एक बार कटर चल जाए तो ''गायों'' का उद्धार हो जाए


फर्रुखाबाद: समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद का गाय को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है।  पूर्व सांसद ने कहा की गाय गौशालाओं में भूख-प्यास से मर रही है। बिना दूध देने वालीं गायों को क्या सिर पर रखकर घूमोगे। एक बार कटर चल जाए तो उनका उद्धार हो जाएगा। गाय के नाम पर गौ रक्षा हो रही है। लेकिन फिर भी गाय मर रही है।

फर्रुखाबाद के समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद चंद्र भूषण सिंह बीते दिन भोजपुर विधानसभा के समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अरशद जमाल सिद्दीकी के मोहम्दाबाद चुनाव कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर पत्रकार वार्ता में गायों की दुर्दशा के बारे कहा कि गौशालाओं में गायों की मौत हो रही है। गाय के नाम पर गौरक्षा हो रही है फिर भी गाये मर रही है। गाय किसान की फसलों को खा रही है। गायों की दुर्दशा से मौत हो रही है। एक बार कटर चल जाए उनका उद्धार हो जाएगा। ग्रामीण रात रात भर जाग कर गायों से खेतों की रखवाली कर रहे है। ऐसे में ग्रामीणों की हत्या भी हो रही है।

पूर्व सांसद के गायों को लेकर विवादित बयान पर लोग काफी रुष्ट नज़र आ रहे है। जब इस मामले में हिंदू जागरण मंच के प्रांतीय सलाहकार दीपक द्विवेदी से बात की उन्होंने बताया की ऐसा बोलने पर इन्हें सजा का प्रावधान है, सांसद जी लोगों को गाय मारने के लिए उत्सहित कर रहे है।  वही फर्रुखाबाद के रहने वाले गौरव शर्मा बताते कि अगर बूढ़ी हो गयी गाय पर कटर चलना सही है तो बूढ़े हो चुके सांसद पर क्या चाहिए?

प्रताप मिश्रा बोले इनके लिए सपा रूपी गटर काफी है।

धरती पर जन्मी 'अजीबोगरीब बकरी', खोपड़ी के बीच में हैं आंखें



 बकरी पालने वाले ने जब 'अजीबोगरीब बकरी' को देखा तो वो हैरान रहा गया. उसने कहा कि उसकी बकरी पौराणिक कथाओं के भयानक जानवर जैसी लगती है.

धरती पर जन्मी 'अजीबोगरीब बकरी', खोपड़ी के बीच में हैं आंखें

अंकारा: तुर्की (Turkey) में एक अजीबोगरीब बकरी (Strange Goat) पैदा हुई है, जिसकी आंखें खोपड़ी के बीच में है. इस 'अजीबोगरीब बकरी' को देखकर उसका मालिक भी हैरान रह गया. बकरी के मालिक ने कहा कि वो बीते 25 साल से जानवर पाल रहा है लेकिन उसने कभी ऐसा जानवर नहीं देखा, जिसकी आंखें उसके सिर के बीचो-बीच हों.

डेली स्टार में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, बकरी पालने वाले ने बताया कि जब उसे पता चला कि एक बकरी पैदा हुई है तो वो मौके पर पहुंचा. लेकिन बकरी को देखकर वो हैरान रह गया. बकरी की आंखें खोपड़ी के बिल्कुल बीचो-बीच थीं. उसने बताया कि बकरी को देखने के बाद उसे ऐसा लगा कि वो Cyclops को देख रहा है, जिसे ग्रीक की पौराणिक कथाओं में एक भयानक जानवर बताया गया है.

बकरी पालने वाले ने बताया कि जो भी इस 'अजीबोगरीब बकरी' को देखता है वो हैरान रह जाता है. उसने कहा कि वो इस 'अजीबोगरीब बकरी' को नहीं पाल सकता है. वो चाहता है कि अधिकारी इस बकरी को ले जाएं और पालें.

हताय मुस्तफा कमाल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अहमद ने कहा कि Cebocephaly की वजह से बकरी की खोपड़ी में आंखें बीचो-बीच में हैं. चिकित्सा विसंगति के कारण उसकी दो आंखें बिल्कुल एक ही में मिल गई हैं.

उन्होंने कहा कि Cebocephaly में प्रत्येक आंख अलग-अलग कक्षीय सॉकेट में नहीं होती है. ऐसे मामले में नाक में भी एक बदलाव होता है. नाक चपटी होती है और नथुना एक ही होता है. इसमें कान भी बाकी जानवरों की तरह सामान्य नहीं होते हैं. इसके अलावा निचला जबड़ा अपेक्षाकृत बड़ा होता है. Cebocephaly की चिकित्सा विसंगति इंसानों और जानवरों दोनों में हो सकती है

पाकिस्तान में सेना पर हमला, पांच जवान मारे गए


पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह के कुर्रम जिले में पाकिस्तानी सेना की एक चौकी को अफगानिस्तान के अंदर से निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी तालिबान के संघर्ष-विराम समझौते से हटने के बाद से इस तरह के हमले बढ़े हैं।पाकिस्तान आर्मी पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, खैबर पख्तून ख्वाह प्रांत के कुर्रम जिले में अफगानिस्तान के अंदर से सेना की चौकी पर आतंकवादियों ने गोलियां चलाईं, जिसमें उसके कम से कम पांच जवान मारे गए।

बयान के मुताबिक पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने भी फायरिंग का जवाब दिया, जिसमें आतंकियों को भी भारी नुकसान हुआ है। हालांकि इस बात की पुष्टि किसी स्वतंत्र सूत्र ने नहीं की है। हमलावरों ने कथित तौर पर अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत से सटे एक चौकी अंगोर तांगी को निशाना बनाया और सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच गोलीबारी रविवार रात करीब आठ बजे शुरू हुई और कई घंटों तक चली।

हमले में कई पाकिस्तानी सैनिकों के घायल होने की भी खबर है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) या पाकिस्तान तालिबान, जिसने काबुल के पतन के बाद अफगान तालिबान के साथ एक संबद्ध को नवीनीकृत किया है। उसने रविवार के हमले की जिम्मेदारी ली है। उसने एक बयान जारी कर हमले की जिम्मेदारी ली है।

अफगानिस्तान बना आतंकियों का अड्डा, तालिबान ने नहीं उठाए कोई कदम : यूएन रिपोर्ट

अफगानिस्तान की स्तिथि को लेकर संयुक्त राष्ट्र के विषेशज्ञों ने एक रिपोर्ट में कहा है कि अफगानिस्तान में हाल में सत्ता में आए तालिबान के अल कायदा के साथ पूर्व संबंधों के कारण देश चरमपंथियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बन रहा है और आतंकवादी संगठनों के हालिया इतिहास में उन्हें वहां पहले से अधिक स्वतंत्रता मिली हुई है। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने कहा कि अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट समूह दोनों से जुड़े चरमपंथी अफ्रीका, खासकर अशांत साहेल में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामिक स्टेट इराक और सीरिया में एक ग्रामीण विद्रोह के रूप में सक्रिय है।

तालिबान ने नहीं उठाए है कोई कदम : रिपोर्ट

रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा कि इंडोनेशिया और फिलीपींस दोनों ने इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा से जुड़े आतंकवाद से निपटने में एक महत्वपूर्ण बढ़त की जानकारी भी दी है। अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लगे प्रतिबंधों की निगरानी करने वाली विशेषज्ञों की समिति ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सौंपी गई एक रिपोर्ट में कहा कि अमेरिका और नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन) सैनिकों की 20 वर्ष बाद अफगानिस्तान से अराजकता भरी वापसी के बाद 15 अगस्त को तालिबान सत्ता में आया और तब से 2021 के अंतिम छह महीनों में कई घटनाएं हुई हैं। विशेषज्ञों ने कहा, हाल में ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि तालिबान ने देश में विदेशी आतंकवादियों की गतिविधियों को सीमित करने के लिए कदम उठाए हैं, बल्कि इसके विपरित आतंकवादी संगठन अपार स्वतंत्रता का आनंद ले रहे हैं।

अलकायदा ने तालिबान को दी थी बधाई

संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने अफगानिस्तान में विदेशी आतंकवादियों की मौजूदगी की कोई जानकारी नहीं दी है। विशेषज्ञों ने उल्लेख किया कि अल-कायदा ने 31 अगस्त को तालिबान को उसकी जीत पर बधाई देते हुए एक बयान जारी किया था, लेकिन तब से उसने एक रणनीतिक चुप्पी बनाए रखी है। संभवतः यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता एवं वैधता हासिल करने के लिए तालिबान के प्रयासों को नुकसान नहीं पहुंचाने का प्रयास है। समिति ने यह भी बताया कि जनवरी 2021 में अल-कायदा के सरगना अयमान अल-जवाहिरी के जिंदा होने की जानकारी मिली थी, लेकिन सदस्य देशों का मानना है कि उनकी हालत बेहद खराब है।

लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा पार्टियों में परिवारवाद से है: PM मोदी


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नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव (PM Modi Lok Sabha speech) की चर्चा का जवाब दे रहे हैं. पीएम मोदी ने इस दौरान बताया कि कैसे कोरोना काल में अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया गया. इससे पहले पीएम मोदी ने सोमवार को लोकसभा को संबोधित किया था.  पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि कोरोना एक वैश्विक महामारी है और बीते 100 साल में मानव जाति ने इतना बड़ा संकट नहीं देखा है. अभी भी ये संकट नए-नए रूप लेकर आफतें लेकर आ रहा है. पूरी दुनिया इससे काफी ज्यादा जूझ रही है.

पीएम मोदी ने कोरोना वैक्सीनेशन प्रोग्राम की तारीफ करते हुए कहा कि आज पूरे विश्व में भारत के कामों की सराहना हो रही है. गरीब को राशन दिया जा रहा है. इस कोरोना काल में 80 करोड़ से भी अधिक देशवासियों को मुफ्त राशन देकर दुनिया के सामने उदाहरण पेश किया है.गरीब लोगों को घर देने काम हमारी सरकार करती रही. पीएम मोदी ने कहा कि यूपी और तमिलनाडु में डिफेंस कॉरिडोर स्थापित किया जा रहा है. एमओयू साइन हो रहे हैं, एमएसएमई सेक्टर के लोग डिफेंस सेक्टर में आ रहे हैं. यह उत्साहजनक है  कि देश के लोगों में क्षमता है और वे इस क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आगे आ रहे हैं. 

रोजगार पर क्या बोले पीएम

पीएम मोदी ने रोजगार पर कहा कि 2021 में एक करोड़ 20 लाख लोग EPFO से जुड़े हैं, ये सब फॉर्मल जॉब हैं. इनमें से भी 65 लाख 18-25 आयु के हैं यानी इन लोगों की पहली बार जॉब मार्केट में जगह मिली है. कोविड प्रतिबंध खुलने के बाद नियुक्तियां  दोगुनी हो गई. 

महंगाई पर क्या बोले पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि अमरीका 40 साल में सबसे ज्यादा महंगाई का दौर झेल रहा है, ब्रिटेन 30 साल की रिकॉर्ड महंगाई झेल रहा है, ऐसे माहौल में भी हमने महंगाई को एक लेवल पर रोकने का प्रयास किया है. 2014 से 2020 तक ये दर 4-5 प्रतिशत के पास थी और इसकी तुलना यूपीए दौर से करें तो पता चलेगा महंगाई क्या होती है. यूपीए के समय महंगाई डबल डिजिट छू रही थी.

लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर अहंकार का आरोप लगाया. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का लोकसभा में जवाब देते हुए  प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस की आलोचना में एक कविता भी कही. मोदी ने कहा, ‘वो जब दिन को रात कहें, तो तुरंत मान जाएं, नहीं मानेंगे तो वो दिन में नकाब ओढ़ लेंगे. जरूरी हुआ तो वो हकीकत को थोड़ा बहुत मरोड़ देंगे, वो मगरूर हैं खुद की समझ पर बेइंतहा, इन्हें आईना मत दिखाओ, वो आईना को भी तोड़ देंगे.' 

अप्रैल में राज्यसभा से रिटायर होंगे 19 सदस्य, BJP से 5 तो कांग्रेस से 6 सांसदों का कार्यकाल होगा खत्म


 साल 2022 के अप्रैल महीने में राज्यसभा से 19 सांसद रिटायर होने वाले हैं। इनमें 5 सदस्य भाजपा के हैं तो 6 सदस्य कांग्रेस पार्टी से हैं। इसके साथ ही अब उच्च सदन में कांग्रेस सदस्यों की संख्या 34 से घटकर 28 हो जाएगी। जबकि भाजपा सांसदों की संख्या 97 से घटकर 95 हो जाएगी। भाजपा इस वक्त उच्च सदन यानी कि राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी है।

19 rajaysabha members will retire in month of april

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कई बार इशारों में बताया कि यह उनका आखिरी कार्यकाल हो सकता है। आनंद शर्मा का उच्च सदन में कार्यकाल 2 अप्रैल को खत्म हो जाएगा। कांग्रेस से पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी, प्रताप सिंह बाजवा, शमशेर सिंह डूल्लो, रिपुन बोरा और रानी नारह का अप्रैल में कार्यकाल खत्म हो जाएगा।

भाजपा के साथ गठबंधन करने के लिए चुने गए मनोनीत सदस्यों की सेवानिवृत्ति के साथ उच्च सदन में भी भाजपा की संख्या कम हो जाएगी। इस सूची में सुब्रमण्यम स्वामी, जिन्होंने अक्सर राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के मुद्दों पर अपने रुख से सरकार को शर्मिंदा किया है, अभिनेता सुरेश गोपी, अभिनेतत्री से नेता बनीं रूपा गांगुली और पत्रकार स्वप्न दासगुप्ता शामिल हैं। बॉक्सर मैरी कॉम और अर्थशास्त्री नरेंद्र जाधव सेवानिवृत्त होने वाले अन्य मनोनीत सदस्य हैं। बीजेपी के श्वेत मलिक (पंजाब) का भी कार्यकाल खत्म हो रहा है।

इसके अलावा नागालैंड से एकमात्र सदस्य नागा पीपुल्स फ्रंट के केजी केने भी सेवानिवृत्त होंगे। नागालैंड में दिसंबर में सेना द्वारा एक असफल जवाबी अभियान के दौरान 14 नागरिकों की हत्या के बाद, केने ने राज्य से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम को निरस्त करने में विफल रहने के लिए केंद्र की आलोचना की थी। लोकतांत्रिक जनता दल के एमवी श्रेयम्स कुमार (केरल), सुखदेव सिंह ढींडसा, पंजाब से शिरोमणि अकाली दल के नरेश गुजराल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के के सोमा प्रसाद (केरल) और झरना दास बैद्य (त्रिपुरा) भी अप्रैल में सेवानिवृत्त होंगे। पंजाब से राज्यसभा में पांच रिक्तियां होंगी, जहां इसी महीने मतदान होना है।

परम तत्व दर्शन