Wednesday, April 20, 2022

देश में बढ़ते कोरोना मामलों को देखते हुए केंद्र ने दिल्ली समेत 5 राज्यों को आगाह किया


केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को बढ़ते पॉजिटिविटी रेट पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और मिजोरम को लेटर लिखा।

इस लेटर में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सुरक्षा उपाय और निगरानी करने को कहा गया है। वहीं, राजधानी में कोरोना को लेकर दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) ने आज बैठक बुलाई है।

उप-राज्यपाल की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में CM केजरीवाल और AIIMS डायरेक्टर भी मौजूद रहेंगे। बैठक में स्कूलों को बंद करने पर भी फैसला हो सकता है।

दिल्ली में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 632 नए मामले सामने आए हैं। वहीं, पॉजिटिविटी रेट 4.42% दर्ज किया गया।

5 फोल्ड स्ट्रैटजी पर काम करने की सलाह

भारत में रोजाना आने वाले नए केसेस में राजधानी दिल्ली समेत इन 4 राज्यों का योगदान काफी अधिक है। यहां पॉजिटिविटी रेट में लगातार इजाफा देखा गया है। केंद्र ने वैक्सीनेशन और प्रिकॉशन डोज को लेकर भी तेजी लाने को कहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों को फाइव फोल्ड स्ट्रैटजी पर काम करने को कहा है। इसमें टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट, वैक्सीनेशन और कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर फॉलो करने की सलाह दी गई है।

इंटरनेशनल पैसेंजर्स के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग करें

संक्रमण बढ़ने के शुरुआती संकेतों का पता लगाने के लिए सभी हेल्थ फैसिलिटीज को इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी की नियमित निगरानी,

​​इंटरनेशनल पैसेंजर्स के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग की भी सलाह दी गई है। मेडिकल फैसिलिटीज के साथ-साथ सीवेज के सैंपल भी जांचने की सलाह दी गई है।

दिल्ली में वीकली केस में 170% का इजाफा

स्वास्थ्य सचिव के मुताबिक, दिल्ली में 12 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में नए मामलों की संख्या 998 थी, जो 19 अप्रैल को बढ़कर 2,671 हो गई है। यहां कोविड पॉजिटिविटी रेट में भी 1.42% की बढ़ोतरी देखी गई है।

यह आंकड़ा पिछले हफ्ते 3.49% था। हरियाणा में 12 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में 521 नए मामले मिले थे, जो कि 19 अप्रैल तक से बढ़कर 1,299 हो गए।

पिछले हफ्ते पॉजिटिविटी रेट 1.22% से बढ़कर 2.86% हो गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 12 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में नए मामलों की संख्या 217 थी, जो 19 अप्रैल तक बढ़कर 637 हो गई। यहां पॉजिटिविटी रेट पिछले हफ्ते 0.03% था, जो बढ़कर 0.09% हो गया है।

यूपी में बिना इजाजत नहीं निकाल सकेंगे धार्मिक यात्रा, साउंड को लेकर भी सीएम योगी ने दिए निर्देश, 4 मई तक पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द


Yogi adityanath

दिल्ली के जहांगीरपुरी में हुई हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए धार्मिक जुलूस आदि को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। सूबे में अब बिना इजाजत के कोई जुलूस या धार्मिक यात्रा निकालने पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में सीएम योगी आदित्यनाथ ने निर्देश जारी किए हैं।

कानून व्यवस्था पर समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशासन को नए स्थानों पर माइक के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देने का भी निर्देश दिया। मुख्यमंत्री द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी को अपनी धार्मिक विचारधारा के अनुसार पूजा करने की स्वतंत्रता है। ईद और अक्षय तृतीया सहित आने वाले अन्य त्योहारों से पहले, सीएम योगी द्वारा जारी निर्देश में इस बात को सुनिश्चित करने को कहा गया है कि माइक की आवाज परिसर तक ही सीमित रहे और माइक की आवाज बाहर न जाए, जिससे दूसरे लोगों को परेशानी हो।

एक सरकारी विज्ञप्ति में सीएम आदित्यनाथ के हवाले से कहा गया है कि किसी भी नए स्थान पर माइक्रोफोन लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसमें कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस को और ज्यादा सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। एसएचओ से लेकर एडीजी तक अगले 24 घंटे में धर्मगुरुओं और समाज के अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों से अपने-अपने क्षेत्रों में बात करेंगे। साथ ही सीएम योगी ने निर्देश दिया है कि सरकार द्वारा जारी निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

Tuesday, April 19, 2022

धार्मिक परिसर तक सीमित रहे माइक की आवाज, CM योगी ने लाउडस्पीकर विवाद पर दिए आदेश

देशभर में लाउडस्पीकर (Loudspeaker Row) और अजान (Azan On Loudspeaker) की आज को लेकर चल रहे विवाद (Loudspeaker Controversy) के बीच उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने बड़ी पहल करते हुए उत्तर प्रदेश में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर अहम गाइडलाइंस जारी की है। बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सभी लोगों को अपनी धार्मिक विचारधारा के अनुसार अपनी उपासना पद्धति को मानने की स्वतंत्रता है। इसके लिए माइक और साउंड सिस्टम का इस्तेमाल भी किया जा सकता है लेकिन ये सुनिश्चित किया जाए कि साउंड सिस्टम की आवाज उस धार्मिक परिसर से बाहर न जाए।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि माइक और साउंड सिस्टम की आवाज धार्मिक परिसर से बाहर नहीं जानी चाहिए। इसके आवला योगी सरकार ने बिना अनुमति धार्मिक जुलूस या शोभा यात्रा निकालने पर रोक लगाई है। माइक की आवाज धार्मिक परिसर तक ही रखनी होगी और किसी प्रकार का जुलूस और शोभा यात्रा निकालने से पहले परमिशन लेनी होगी।

बता दें कि योगी सरकार के आदेश में कहा गया है कि माइक की आवाज से अन्य लोगों को असुविधा नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही योगी सरकार ने आदेश में कहा है कि नए स्थलों पर माइक या साउंड सिस्टम लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही साउंड सिस्टम के इस्तेमान की अनुमति केवल इस शर्त पर दी जा सकती हिअ कि इससे दूसरे लोगों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। साथ ही सीएम योगी ने प्रदेश के सबहि पुलिस अधिकारीयों से इस गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करवाने का निर्देश दिया है।

पाकिस्तानी विधानसभा बना जंग का अखाड़ा, नेताओं के बीच हुई जमकर मारपीट


चलिए छोड़िए बाकी मसलों की चिंता…हिंदुस्तानी सियासत में चल रहे उथल-पुथल से तो आप वाकिफ होते ही रहते हैं, लेकिन आज हम आपको अपनी इस खास रिपोर्ट में पाकिस्तानी विधानसभा कैसे जंग के अखाड़े में तब्दील हो गई। उसके बारे में बताएंगे। कैसे नेता एक-दूसरे को मरने मारने पर उतारू हो गए। वो भी बताएंगे और आपको यह जानकर हैरानी भी होगी कि कैसे विधायकों ने डिप्टी स्पीकर पर भी हमला करने से गुरेज नहीं किया। विधायकों के रवैयों से यह साफ जाहिर हो रहा है कि जनता ने उन्हें जनहित के मुद्दों को नहीं, बल्कि कुश्ती करने के वास्ते से विधानसभा में भेजा है।
जी हां… बिल्कुल….ऊपर जो भी पढ़ा आपने…बिल्कुल ठीक पढ़ा है। यह पूरा वाकया पाकिस्तानी पंजाब प्रांत का है, जहां विधायक एक-दूसरे को मरने मारने पर उतारू हो गए। दरअसल, पाकिस्तानी पंजाब के मुख्यमंत्री को लेकर विवाद जारी है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, पाकिस्तानी पंजाब प्रांत का मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहम्मद मजारी जब अपने दोस्त डिप्टी स्पीकर से मुखातिब होने पहुंचे थे, तभी पीटीआई सदस्यों ने उनके साथ मारपीट की। हालांकि, पहले विधानसभा में तैनात सुरक्षाबलों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। उन्होंने पहले मजारी के साथ अभद्र व्यवहार किया और इसके बाद मारपीट पर उतर आए। पाकिस्तानी विधानसभा सत्र सुबह 11:30 शुरू होना था, लेकिन इस मारपीट ने विधानसभा में अव्यवस्था का माहौल पैदा कर दिया जिसके चलते उसे स्थगित करना पड़ गया। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, पीटीआई सदस्यों ने अपनी अभद्रता की हदों को पार करते हुए डिप्टी स्पीकर के बाल तक खींचे। उनके लिए अभद्र शब्दों का प्रयोग किया और उनके साथ मारपीट भी की।
हालात ऐसे बन गए थे कि वहां तैनात सुरक्षाकर्मी भी खुद को असहाय महसूस कर रहे थे। हालांकि, विधानसभा की भंग होती गरिमा के बाद सुरक्षाबल डिप्टी स्पीकर को बाहर ले आए। बता दें कि इस पूरे वाकये का वीडियो अभी सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस पर अलग-अलग तरह से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नजर आ रहे हैं। ध्यान रहे कि अभी कुछ दिनों पहले कई दिनों तक चली राजनीतिक उथल-पुथल के बाद पाकिस्तान में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। बीते दिनों इमरान खान के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की वजह से उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ गया था। इमरान के बाद पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम की कुर्सी पर शहबाज शरीफ आसीन हुए हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प रहेगा कि उनके कार्यकाल में भारत और पाकिस्तान के बीच जारी विवादित मसलों पर क्या कुछ फैसला लिया जाता है और किस तरह के रुख अपनाए जाते हैं। यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जिस तरह विधायकों ने अपनी अभद्रता की नुमाइश की है, उस पर आपका क्या कुछ कहना है

लाउडस्पीकर विवाद: दुबई से कुछ सीखने की जरुरत: प्रताप मिश्रा

मस्जिद के लाउडस्पीकर का मुद्दा आज कल पूरे देश में गर्माया हुआ है और इसे मुस्लिमों के विरोध के रूप में दर्शाया जा रहा है जबकि ऐसा नहीं है यह मुद्दा सिर्फ लाउडस्पीकर का है इसका नमाज या किसी धर्म के विरोध से कोई संबंध नहीं है। अजान की आवाज से बाकी लोगों को परेशानी होती है इसलिए इसकी आवाज कम करने की मांग हो रही है। मस्जिद के पास रहने वाले लोगों के लिए यह बहुत ही बुरा अनुभव रहा है उन्हें दिन में 5 बार नमाज के ध्वनि प्रदूषण से परेशान होना पड़ता है ऐसे में गर्भवती महिलाएं, परीक्षा देने वाले छात्र और बुजुर्गों को ज्यादा परेशानी होती है।

वैसे इस मुद्दे को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए क्योंकि इसका समाधान सिर्फ इतना है कि लाउडस्पीकर को हटा दिया जाए या फिर आवाज कम कर दी जाए जिससे किसी और को परेशानी ना हो। 2017 लाउडस्पीकर को लेकर गायक सोनू निगम ने आवाज उठाई थी और प्रेस कांफ्रेंस कर यह कहा था कि वह स्टूडियो से रात 3 बजे तक घर आते है लेकिन अजान की वजह से उन्हें सुबह 5 बजे ही जगना पड़ता है। सोनू के इस बयान के बाद से उनके खिलाफ फतवा जारी कर दिया गया और उन्हें तमाम दिक्कतों के बाद अपना सिर तक मुंडवाना पड़ा था। 

महाराष्ट्र से लाउडस्पीकर का मुद्दा अब बाकी राज्यों तक भी पहुंच गया है और लोग पार्टी से ऊपर उठ हिन्दू के नाम पर राज ठाकरे का समर्थन कर रहे हैं। महाराष्ट्र के बाद यह उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान और बिहार तक पहुंच चुका है और लोग लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा बजाना शुरू भी कर दिए हैं। राज ठाकरे के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि हिन्दू अब एक जुट हो रहा है और वह हिन्दू के लिए बयान देने वाले किसी भी नेता का स्वागत करने को तैयार है अन्यथा राज ठाकरे का इतिहास ऐसा रहा है कि वह उत्तर प्रदेश जाने की सोच भी नहीं सकते थे।

राजनीतिक दलों के साथ साथ तमाम हिंदू संगठन भी मस्जिद के लाउडस्पीकर की आवाज को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं। जबकि कुछ राजनीतिक दल इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं और मस्जिद पर लगे लाउडस्पीकर को बचाने का प्रयास भी कर रहें हैं। कांग्रेस, एनसीपी, सपा और शिवसेना सहित तमाम दल राज ठाकरे को बीजेपी का एजेंट बता रहे हैं हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है जब इन पार्टियों ने मुस्लिम समुदाय का खुला समर्थन किया है इससे पहले भी ऐसे बयान और कारनामें देखे गये हैं लेकिन इन सभी पार्टियों से सवाल यह है कि क्या किसी की नींद खराब कर के अल्लाह को याद करना कहां तक ठीक है?     

दुबई एक इस्लामिक देश है और वहां हर एक किमी पर एक मस्जिद है लेकिन वहां पर ध्वनि प्रदूषण नहीं होता है क्योंकि वहां मस्जिद पर लगे लाउडस्पीकर से अजान की आवाज नहीं आती है वजह है लाउडस्पीकर की आवाज बिल्कुल कम होती है क्योंकि भारत की मस्जिदों से आने वाली आवाज के जितना आवाज वहां होगी तो ध्वनि प्रदूषण का स्तर उच्चतम स्तर पर पहुंच जायेगा। दुबई में लाउडस्पीकर की आवाज ना होने से मरीज, छात्र और आम जनता को कोई परेशानी नहीं होती है। भारत के मुस्लिम धर्म गुरुओं को दुबई से सीख लेनी चाहिए क्योंकि कोई भी धर्म किसी दूसरे को परेशानी करने की इजाजत नहीं देता है। मुस्लिम समाज हजरत मुहम्मद को मानता तो जरुर है लेकिन राजनीतिक द्वेष की वजह से उनके दिखाए मार्ग पर नहीं चल पाता है।     

देश की सर्वोच्च अदालत ने भी ध्वनि प्रदूषण को लेकर गाइडलाइन जारी किया है लेकिन मुस्लिम समुदाय ने उसे नकार दिया और राजनीतिक लाभ की वजह से किसी भी नेता ने इसका पालन कराने की जहमत नहीं उठाई क्योंकि वोट बैंक सभी को प्यारा है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में ध्वनि की एक सीमा तय की और सभी से इसका पालन करने को कहा है लेकिन राज्य सरकार के दबाव की वजह से प्रशासन इस पर कार्रवाई नहीं कर पाता है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक- 

      क्षेत्र                                       दिन                           रात 

आवासीय क्षेत्र –                          55 डेसीबल           45 डेसीबल 

औद्योगिक क्षेत्र-                          75 डेसीबल           70 डेसीबल

व्यावसायिक क्षेत्र-                       65 डेसीबल           55 डेसीबल

Monday, April 18, 2022

मस्जिदों के लाउडस्पीकर चालू तो महाकाल मंदिर के माइक बंद क्यों…हिन्दू नामों से चल रहे होटलों पर भी उठाए सवाल – संतों ने जताया विरोध


महाकाल मंदिर की व्यवस्था सवाल खड़े करते हुए संत डॉ. अवधेशपुरी महाराज ने कहा है कि महाकाल मंदिर जाने पर अजान की आवाज आती है, आरती व मंत्रों की मंगल ध्वनि सुनाई ही नहीं देती है। जब मंदिर के आसपास स्थित मस्जिदों के लाउडस्पीकर चालू हैं, तो मंदिर के माइक क्यों बंद हैं। इसी तरह आह्वान अखाड़े के महामंडलेश्वर अतुलेशानंद महाराज ने महाकाल मंदिर के बाहर मुस्लिम समाज के होटलों पर सवाल उठाए हैं।

दरअसल लाउडस्पीकर को लेकर देशभर में छिड़ी बहस के बाद उज्जैन के संत भी इसमें शामिल हुए हैं। संत डॉ. अवधेशपुरी महाराज ने कहा है कि मस्जिदों की मीनारों पर आठ-आठ लाउडस्पीकर लगे हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन पांच बार अजान की आवाज आती है। इसके परिणाम स्वरूप आसपास के रहवासी क्षेत्र में हजारों विद्यार्थियों को पढ़ाई में व्यवधान होता है। बीमार व्यक्यिों को भी आराम करने में परेशानी होती है।

महाकाल मंदिर प्रशासन माइक व लाउडस्पीकर का संधारण तक नहीं करा पा रहा है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि श्रद्धालु आरती व मंत्रोच्चार की ध्वनि सुनकर धर्मलाभ ले सकें। इसके चलते महाकाल मंदिर के नजदीक जाने पर भी अजान की आवाज तो आती है, लेकिन महाकाल की भस्मआरती की नहीं। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि हिंदुओं के साथ इस प्रकार का भेदभाव न करे। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर के शिखर के ऊपर चलने वाला तुरई लाउडस्पीकर पिछले कई साल से बंद हैं।

आह्वान अखाड़े के महामंडलेश्वर अतुलेशानंद महाराज ने भी इसका समर्थन किया है और दोनों संतों ने कहा कि महाकाल मंदिर के नजदीक जाने पर भी अजान की आवाज तो आती है, लेकिन महाकाल की भस्मआरती की नहीं। इसलिए महाकाल मंदिर के विकास पर हजारों करोड़ खर्च करने वाले प्रशासन को चाहिए कि हिंदुओं के साथ इस प्रकार का भेदभाव न करे। उन्होंने कहाकि तेज बजते लाउडस्पीकर से विद्यार्थी ही नहीं ह्रदय रोगी भी परेशान होते हैं।

आह्वान अखाड़े के महामंडलेश्वर अतुलेशानंद ने मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर के साथ महाकाल मंदिर के बाहर मुस्लिम समाज के होटलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मंदिर के आसपास करीब 180 होटल ऐसे हैं जो मुस्लिम, हिन्दू नाम से चला रहे हैं। संतों ने शासन से निवेदन किया है कि नाम हिन्दी में करने के साथ मालिकों के नाम व नंबर स्पष्ट रूप से भी बोर्ड पर दर्शाए जाएं। संत ने चेतावनी दी है कि मांग नहीं मानी जाती तो हर हिंदू के घर लाउडस्पीकर फुल वॉल्यूम में बजेगा। उन्होंने वीडियो जारी कर कहा है कि महाकालेश्वर मंदिर के बाहर आरती की जगह नमाज सुनाई पड़ती है। आरती की आवाज तो दबी रह जाती है, दिन में 5 बार मंदिर के आसपास करीब 2000 लाउडस्पीकर बजते हैं। इसकी वजह से साधु संत अपनी तपस्या पूर्ण नहीं कर पाते हैं।

Sunday, April 17, 2022

बसपा से निष्कासित होने के बाद नकुल दुबे ने मायावती पर बोला हमला, कहा- अच्छा हुआ मुझे कर दिया मुक्त


मायावतीविधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद बसपा सुप्रीमों मायावती काफी एक्टिव हैं. बसपा से निष्कासन के बाद रविवार को पूर्व मंत्री नकुल दुबे ने मायवती पर पलटवार किया है. उन्‍होंने कहा कि मेरे और मेरे संपूर्ण समाज के साथ न्‍याय हुआ है. पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व मंत्री दुबे ने कहा कि मैं उनके मायावती के प्रति आभार प्रकट करता हूं कि उन्‍होंने मुझे मुक्‍त कर दिया कि तुम सर्व समाज के साथ मिलकर जो एक अजीबोगरीब वातावरण उत्पन्न हो गया है और लगातार चल रहा है, उसको रोकने के लिए नई मुहिम चलाओ.

वहीं, दुबे से जब पूछा गया कि आपके निष्कासन की वजह क्या है और क्या वह हालिया चुनावी हार के बाद हुई समीक्षा बैठक में शामिल हुए थे, तो उन्होंने कहा कि मैं समीक्षा बैठक में नहीं गया था. मैं मायावती से मिला नहीं था और न ही मेरी उनसे कोई बातचीत हुई है. आरोप है कि यूपी विधानसभा चुनाव 2022  में गलत फीडबैक देने के चलते दुबे को बसपा से बाहर किया गया है.

मेरे व मेरे समाज के साथ हुआ न्‍याय

कारण बताओ नोटिस के बारे में पूछे जाने पर पूर्व मंत्री नकुल दुबे ने कहा, ‘मुझे न्याय दिया गया है और इसे अन्याय न कहें, यह मेरे साथ ही नहीं संपूर्ण समाज के साथ न्‍याय हुआ है.’ जानकारी के मुताबिक शनिवार को पूर्व मंत्री दुबे को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में बसपा से निष्‍कासित कर दिया गया. बसपा प्रमुख मायावती ने देर शाम ट्वीट कर कहा कि पूर्व मंत्री नकुल दुबे को पार्टी में अनुशासनहीनता अपनाने व पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण बसपा से निष्कासित किया जाता है.

बसपा में ब्राह्मण नेता के रूप में स्थापित रहे नकुल दुबे 2007 में मायावती के नेतृत्व की बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री थे. यही नहीं, यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में नकुल दुबे को प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन की तैयारियों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इसके अलावा बसपा सरकार व पार्टी में उनकी गिनती बड़े ब्राह्मण चेहरे में होती थी. जबकि नकुल दुबे को बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र का करीबी माना जाता है. वैसे यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री नकुल दुबे ने अभी अपने पत्‍ते सही तरीके से नहीं खोले हैं.

परम तत्व दर्शन