Tuesday, April 26, 2022

दिल्ली के खजूरी खास में बिगड़ा माहौल, तीन आरोपी गिरफ्तार


Communalism in Delhi: दिल्ली के इस इलाके में बिगड़ा माहौल, तीन आरोपी गिरफ्तार

Delhi Police Investigating: दिल्ली के खजूरी खास इलाके में पुलिस उस वक्त तुरंत हरकत में आई जब कुछ युवक इलाके में माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे थे. पुलिस ने एक्शन लेते हुए 2 समुदायों के बीच माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने के आरोप में अमन (Aman), जीशान (Zeeshan) और समीर (Sameer) को गिरफ्तार कर लिया है. दरअसल ये नॉर्थ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट का वो खजूरी खास इलाका है जो 2020 में दंगों (Riots) की भेंट चढ़ गया था. इसलिए पुलिस इस इलाके में हमेशा अलर्ट पर रहती है और इसकी मॉनिटरिंग खुद डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी संजय सेन (DCP Sanjay Sen) करते हैं.

पीसीआर कॉल पर मिली जानकारी

दिल्ली पुलिस के मुताबिक 24 अप्रैल को उन्हें पीसीआर कॉल पर जानकारी मिली कि इलाके में कुछ मुस्लिम (Muslim) लोग मारपीट करने के लिए बोल रहे हैं और यहां पर भीड़ हो रही है, मदद (Help) चाहिए. कॉलर अपने आपको पुलिस का स्टाफ बता रहा था. इस सूचना पर दिल्ली पुलिस की टीम रवाना की गई.

मौके पर पहुंची दिल्ली पुलिस

मौके पर पहुंची पुलिस को इलाके में रहने वाले सोनू कुमार (Sonu Kumar) ने बताया कि वो अपने दोस्त के साथ खाना खाने के बाद खजूरी खास (Khazoori Khas) इलाके की गली में घूम रहा था. तभी रात तकरीबन 10:30 मिनट पर दोनों ने देखा कि तीन लड़के (अमन, जीशान और समीर) उस गली में पहले से खड़े थे और लगातार दिल्ली दंगों (Delhi Riots) का जिक्र करते हुए लोगों को धमका रहे थे. तीनों ने सोनू और उसके दोस्त के साथ मारपीट की और लगातार नफरत भरी बातें कर इलाके में तनाव पैदा करने की कोशिश की. इतना ही नहीं तीनों आरोपियों ने अपने कुछ और साथियों को भी मौके पर बुला लिया था.

दिल्ली पुलिस ने भीड़ को खदेड़ा

हालांकि दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर भीड़ को खदेड़ा. आस-पास के लोगों से पूछताछ की गई और मामले की जांच की गई तो पता चला कि आरोपी अमन, समीर और जीशान इलाके में दो समुदायों के बीच नफरत (Hatred) फैलाने की कोशिश कर रहे थे. पुलिस के मुताबिक जहांगीरपुरी (Jahangirpuri) इलाके में जिस तरह के हालात पैदा हुए हैं, उसे देखते हुए इस तरह का एक्ट जिसमें दो समुदायों के बीच धर्म के नाम पर नफरत और अशांति फैलाई जा रही हो, काफी गंभीर अपराध है.

तीन आरोपी गिरफ्तार

लिहाजा दिल्ली पुलिस ने खजूरी खास थाने में 25 अप्रैल को IPC की धारा 153A के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर अमन, जीशान और समीर को गिरफ्तार किया जबकि बाकी लोगों पर सीआरपीसी (CRPC) के तहत एक्शन लिया जिससे इलाके में शांति बनी रहे. आपको बता दें कि मामले की जांच जारी है.

श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले पर कोर्ट में हुई सुनवाई


श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले पर कोर्ट में हुई सुनवाई, सुन्नी वक्फ बोर्ड ने याचिका को बताया आधारहीन

मथुराः श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में सुनवाई हुई. अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह की याचिका पर न्यायालय ने सुनवाई की. अब न्यायालय 10 मई को अगली सुनवाई करेगा. श्री कृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर दायर वाद में याचिकाकर्ता द्वारा न्यायालय से शाही ईदगाह पर स्टे लगाने और कमीशन गठित करने के साथ ही एएसआई द्वारा सर्वे कराने की मांग की है.

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा याचिका को आधारहीन
सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा याचिकाकर्ता की याचिका को गलत बताते हुए कहा कि यह याचिका आधारहीन है. साथ ही मुस्लिम पक्ष द्वारा कहा गया कि ना तो कोई कागजात न्यायालय में पेश किए गए हैं और ना ही कोई नोटिस प्राप्त हुए हैं. न्यायालय में पूरे मामले की सुनवाई 10 मई को होगी. इसमें सुन्नी वक्फ बोर्ड के साथ ही शाही ईदगाह कमेटी भी अपना पक्ष रखेगी.

अगली सुनवाई पर देंगे जवाब
याचिकाकर्ता अधिवक्ता महेंद्र प्रताप ने बताया "आज श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले पर सुनवाई होनी थी, जिसमें विशेष रूप से बहस हुई है. सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता ने बहस शुरू की है. हमने कहा कि पहले आप बहस कर लीजिए, उसके बाद हम बात करेंगे. उनकी हर बात हमने सुनी और नोट की है. अगली डेट पर हम इसका जवाब देंगे. न्यायालय के द्वारा अग्रिम तिथि 10 मई दी गई है. अभी उनकी तरफ से और बहस होनी है". 

उन्होंने एक प्रोपेगेंडा रचने का प्रयास किया- महेंद्र प्रताप 
अधिवक्ता महेंद्र प्रताप ने कहा "उनके पास कुछ ऐसा खास नहीं है. एक हवाबाजी शो करने के लिए उन्होंने यह सब किया है. उनके पास कोई तथ्य तो है नहीं. एक तरह से उन्होंने एक प्रोपेगेंडा रचने का प्रयास किया है. अगली तारीख पर सुनवाई होगी. अभी उनकी ओर से बहस होनी है. इसके बाद शाही ईदगाह की तरफ से भी बहस होनी है. उनकी एविडेंस पूरे होने के बाद फिर हमारी बहस होनी है. अधिवक्ता का कहना है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास कहने के लिए कुछ नहीं है पहले जो कहते हैं वही बात आज उन्होंने कही है". 

साक्ष्य के रूप में कोई डॉक्यूमेंट पेश नहीं किया- महेंद्र प्रताप 
अधिवक्ता महेंद्र प्रताप ने बताया "आज सुनवाई थी. हमारी तरफ से एप्लीकेशन लगाई गई थी. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा कि मुकदमा चलने योग्य ही नहीं है. आज उनकी तरफ से बहस शुरू हो गई है. तमाम बिंदुओं को न्यायालय के समक्ष रखा गया, जिसके तहत पत्रावली में वादी पक्ष ने अपनी बात कही गई है उसमें कहीं भी उन्होंने साक्ष्य के रूप में कोई डॉक्यूमेंट पेश नहीं किया. किसी मुकदमे की नकल पेश नहीं की. जमीन का कागजात पेश नहीं किया. बहस आगे भी जारी रहेगी". 

सुनवाई के लिए अग्रिम तारीख 10 मई तय की गई है
अधिवक्ता ने यह भी कहा "विभिन्न कानूनी पहलुओं पर बहस हुई है. न्यायालय के समक्ष मेरे द्वारा अपने पक्षकार का पक्ष रखा गया. यह बताया गया कि यह जो 4 लोगों ने मुकदमा दाखिल किया है किस तरह से आधार हीन है. अभी बहस चल रही है. सुनवाई के लिए अग्रिम तारीख 10 मई लगा दी गई है. 10 मई को सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से बहस समाप्त होने के बाद शाही ईदगाह मस्जिद की ओर से बहस और अपना पक्ष रखेंगे. उसके बाद जो वादी पक्ष की तमाम बातों का हम जवाब देंगे".

यह है मामला 
बता दें कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में लगातार सुनवाई चल रही है. इस मामले में 13.37 एकड़ की पूरी जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपने की मांग की जा रही है. वहीं, कृष्ण जन्मस्थान परिसर में शाही मस्जिद ईदगाह को हटाने की मांग की जा रही है. 

Sunday, April 24, 2022

रूस को लेकर पाकिस्तान का नहीं बदला प्लान, इमरान खान के नक्शे कदम पर PM शहबाज!


shahbaz sharif

पाकिस्तान अमेरिका को छोड़कर रूस की तरफ आना चाहता है. पाकिस्तान के हुक्मरान लंबे समय से रूस के संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इमरान खान ने पीएम पद से हटने के कुछ वक्त पहले ही बेवक्त रूस यात्रा की थी. पाक-रूस संबंध में इस यात्रा का बड़ा रोल रहा है. पाकिस्तान में अब प्रधानमंत्री बदल चुके हैं और पीएमएल एन के नेता शहबाज शरीफ देश के नए वजीर-ए-आजम बने हैं. लेकिन अगर रूस की बात करें शहबाज शरीफ भी इमरान खान को फॉलो करते नजर आ रहे हैं और रूस के साथ संबंधों को सुधारने के लिए चुपचाप राष्ट्रपति पुतिन को चिट्ठी लिख रहे हैं. बता दें कि इमरान खान ने साफ-साफ कहा था कि अमेरिका की मर्जी के खिलाफ उनका मास्को की यात्रा पर जाना पीएम पद से उनकी विदाई की वजह बनी थी.

पाकिस्तान के एक समाचार पत्र का मुताबिक जब शहबाज शरीफ पीएम बने तो रूस और पाकिस्तान के बीच पत्रों का आदान-प्रदान हुआ, लेकिन बिना वजह विवाद पैदा न हो इसलिए इस अहम घटनाक्रम की जानकारी मीडिया को नहीं दी गई. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को उनके पीएम बनने पर बधाई देते हुए एक पत्र लिखा था. रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारी ने अपनी पहचान सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि पुतिन ने पत्र में कहा कि उनका देश पाकिस्तान के साथ संबंधों को और भी मजबूत बनाना चाहता है.

रिपोर्ट के अनुसार शहबाज शरीफ के पीएम बनने के बाद राष्ट्रपति पुतिन ने शहबाज शरीफ को बधाई संदेश दिया. इसकी जानकारी क्रेमलिन प्रेस ऑफिस ने सार्वजनिक की है. पुतिन ने शहबाज शरीफ को 12 अप्रैल को भेजे गए अपने बधाई संदेश में लिखा, "हमारे देश मैत्रीपूर्ण और रचनात्मक संबंध साझा करते हैं, मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री के रूप में आप रूस और पाकिस्तान के बीच घनिष्ठ बहुआयामी सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ अफगान समझौते में साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का मुकाबला करने की कोशिश करेंगे."

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शहबाज ने पुतिन को उनके बधाई संदेश के लिए धन्यवाद दिया और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने का भरोसा दिया साथ ही अफगानिस्तान पर सहयोग करने की बात कही. इस्लामाबाद में रूसी दूतावास ने अपने ट्विटर हैंडल से 12 अप्रैल को शहबाज को बधाई दी थी और उम्मीद जताई कि उनकी सरकार के तहत दोनों देशों के बीच संबंध विकसित होंगे.

24 फरवरी को रूस के राष्ट्रपति पुतिन जब अपने देश की सेनाओं को यूक्रेन पर हमले की इजाजत दे रहे थे तो उसी दिन पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम इमरान खान मास्को में पुतिन के साथ थे. इमरान खान के इस यात्रा से लौटते ही पाकिस्तान में उनके खिलाफ माहौल बनना शुरू हो गया. इमरान खान का आरोप है कि उनकी रूस यात्रा को अमेरिकी हुक्मरानों ने पसंद नहीं किया और उनके खिलाफ अमेरिका समर्थित अविश्वास प्रस्ताव लाया गया. 

इमरान खान ने बार-बार कहा है कि अमेरिका नहीं चाहता था कि वे रूस का दौरा करें और राष्ट्रपति जो बिडेन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ को फोन किया और उनसे कहा कि वे इमरान के रूस दौरे को रुकवायें. हालांकि अमेरिका इमरान खान के इन आरोपों को तवज्जो नहीं देता है और इसे निराधार बताता रहा है.

पाकिस्तान का द एक्सप्रेस ट्रिब्यून लिखता है शहबाज शरीफ और पुतिन के बीच पत्रों का सिलसिला ये बताता है कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने की कवायद नई सरकार में भी जारी रहेगी. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि रूस के साथ संबंधों को नई दिशा देने का कवायद का फैसला पहले लिया गया था. ये फैसला बदलने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को ध्यान में रखते हुए लिया गया था. अधिकारियों ने बताया कि ये प्रक्रिया बिना मीडिया में बिना शोर मचाये जारी रहेगी.

शीत युद्ध के दौरान रूस और पाकिस्तान के रिश्ते बेहद ठंडे पड़ गए थे. इस दौरान रूस का झुकाव भारत की ओर था लिहाजा पाकिस्तान अमेरिकी खेमे में था. लेकिन रूस के साथ पाकिस्तान के संबंध हाल के वर्षों में शीत युद्ध की कड़वी यादों से आगे निकल गए हैं. पाकिस्तान और अमेरिका के बीच संबंधों में कड़वाहट ने पाकिस्तान को रूस और चीन से हाथ मिलाने पर मजबूर कर दिया है.

झोलाछाप पशु चिकित्सकों पर शिकंजा कसेगी योगी सरकार, तैयार हो रहा मसौदा


झोलाछाप चिकित्सकों के बाद अब योगी सरकार प्रदेश में पशु चिकित्सा के कार्य में लगे झोलाछापों पर शिकंजा कसेगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा परिषद मसौदा तैयार कर रहा है। अगर यह विधेयक पारित हुआ तो फिर बिना डिग्री के कोई भी पशुओं की भी चिकित्सा नहीं कर पाएगा।

Yogi government will crack down on quacks veterinary doctors draft is being prepared

चिकित्सा कार्य करने वाले बिना डिग्री वाले झोलाछापों पर तो सरकारी कार्रवाई का प्रावधान पहले से ही है, अब उत्तर प्रदेश सरकार पशु चिकित्सा के लिए गांवों में काम कर रहे झोलाछापों पर भी कार्रवाई करेगी। मकसद है पशुओं की चिकित्सा भी डिग्री धारक पशु चिकित्सक ही करें। इसके लिए उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा परिषद मसौदा तय कर रही है। झोलाछाप पशु चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विधेयक बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। अगर यह विधेयक पारित हुआ तो फिर बिना डिग्री के कोई भी पशुओं की भी चिकित्सा नहीं कर पाएगा।

यह जानकारी उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष और बरेली की मीरगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक डॉ. डीसी वर्मा ने दी। बताया कि झोलाछाप पशु चिकित्सा न कर सकें, इसका मसौदा तैयार करने पर उत्तर प्रदेश के बरेली में इज्जतनगर स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में आयोजित उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा परिषद की 14 वीं सामान्य बैठक में विचार किया गया है। इसके लिए परिषद माइनर वेटरिनरी सर्विसेज को अधिसूचित भी करेगी।

इसलिए लगाया जाएगा झोलाछाप पर प्रतिबंध
परिषद के अध्यक्ष डॉ. डीसी वर्मा का कहना है कि असल में, गांवों-नगरों में पशु चिकित्सा कार्य में लिप्त झोलाछाप अप्रशिक्षित तो होते नहीं हैं इसलिए वे गाव, भैंस, बकरी आदि पशुओं को ऐसी दवाएं खिला देते हैं और ऐसे इंजेक्शन लगा देते हैं, जिनसे पशु बांझ हो जाते हैं और उन्हें साइड इफेक्ट हो जाता है। नतीजतन, पशुपालक ऐसे पशुओं को आवारा छोड़ने को विवश होते हैं। नतीजतन, ये आवारा पशु फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। डॉ. वर्मा ने कहा- उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं की बढ़ी समस्या का एक बड़ा कारण झोलाछापों की ओर से गलत तरह से किया जाने वाला इलाज भी है। ऐसे में, अगर झोलाछापों की चिकित्सा पर प्रतिबंध लगने से अवारा पशुओं की समस्या में भी कमी आएगी।

विधेयक लाने के लिए शासन को भेजेंगे प्रस्ताव
परिषद के अध्यक्ष ने बताया कि पशु चिकित्सा का कार्य करने वाले झोलाछापों पर प्रतिबंध लगाने के लिए उन पर कार्रवाई का प्रावधान भी किया जाना जरूरी है यानी बिना डिग्री के पशु चिकित्सा करना गैरकानूनी किया जाए, इसके लिए सरकार को विधेयक लाना होगा। इस विधेयक का प्रस्ताव परिषद की ओर से बनाकर शासन को भेजा जााएगा। अगर शासन इस विधेयक को पारित कर देता है तो यह कानून बन जाएगा और उसके जरिए बिना डिग्री के पशु चिकित्सा गैरकानूनी घोषित हो जाएगा। उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव जल्द से जल्द शासन को भेज देंगे।

हर जिले को दी जाएंगी मोबाइल वैन
बिना डिग्री के पशु चिकित्सा प्रतिबंधित होने की स्थिति में गांव-देहात में पशु चालकों के सामने अपने पशुओं की चिकित्सा का संकट खड़ा होने का अनुमान है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में बिना डिग्री धारक पशु चिकित्सकों की कमी है। इस पर डॉ. डीसी वर्मा का कहना है कि वैसे तो पर्याप्त पशु चिकित्सक प्रदेश में हैं, जितनों की और जरूरत है, उनकी भर्ती भी की जा रही है लेकिन पशु चिकित्सा परिषद पशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ा काम करने जा रही है। वह यह कि 530 मोबाइल वैन प्रदेश में जल्द उपलब्ध हो जाएंगी। ये हर जिलों को उपलब्ध कराई जाएंगी। एक निर्धारित नंबर पर कॉल करने पर पशुपालकों के पास यह वैन जल्दी से जल्दी पहुंचकर उनके पशुओं को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराएंगी। डॉ. वर्मा ने बताया कि इन मोबाइन वैन पर चिकित्सक, कंपाउंडर के साथ ही दवाओं के समुचित इंतजाम होंगे।

PM मोदी के दौरे से पहले रैली स्थल के करीब धमाका


PM Modi Jammu visit: PM मोदी के दौरे से पहले रैली स्थल के करीब धमाका, जांच के दौरान पुलिस ने कही ये बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के जम्मू दौरे से पहले उनके रैली स्थल से 12 किलोमीटर की दूरी पर धमाका हुआ है. इस मामले में पुलिस ने किसी आतंकवादी गतिविधि से इनकार किया है. पुलिस ने कहा है कुछ लोगों ने विस्फोट का संदिग्ध मामला बताया. संदिग्ध विस्फोट की जांच की जा रही है.

पुलिस कर रही है मामले की जांच

पुलिस ने बताया, 'जम्मू के बिश्नाह के ललियान गांव में ग्रामीणों द्वारा खुली कृषि भूमि में एक संदिग्ध विस्फोट की सूचना मिली है. इस बीच, सांबा के पल्ली गांव में कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा जांच चल रही है, जहां से पीएम मोदी देशभर की पंचायतों को संबोधित करेंगे. बता दें कि पीएम मोदी कश्मीर से आर्टिकल-370 हटने के बाद पहली बार दौरे पर जम्मू जा रहे हैं.

20,000 करोड़ रुपये योजनाओं का करेंगे शिलान्यास

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जम्मू-कश्मीर जाएंगे और देशभर की ग्राम सभाओं को संबोधित करेंगे. वो 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कई विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे. जल निकायों का कायाकल्प सुनिश्चित करने के लिए जम्मू की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री अमृत सरोवर नामक एक नई पहल भी शुरू करेंगे. इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले में 75 जल निकायों का विकास और कायाकल्प करना है.

Saturday, April 23, 2022

बैकफुट पर आए मुस्लिम संगठन: प्रताप मिश्रा


 

अवैध सम्पत्तियों पर गरजता बुलडोजर और धार्मिक स्थलों में बजता ये लाउडस्पीकर इन दिनों उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में ही नहीं बल्कि देश में भी बहस का मुद्दा बना हुआ है. सरकार ने अवैध सम्पत्तियों पर बुलडोजर क्या चलाना शुरू किया, विरोधियों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया. कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति सामने आ गयी. मुसलमानों को लगा कि इस्लाम खतरे में आ गया है. वह एकजुट होने लगे.इसी बीच कुछ मुस्लिम संगठनों ने कई बयान जारी कर प्रदेश की फिजाओं में बह रही शांति की बयार को गर्म हवाओं के थपेड़ों में बदलने का काम शुरु कर दिया. लेकिन कल तक जो मुस्लिम संगठन बड़े-बड़े बयानवीर बने घूम रहे थे, वही आज पत्र जारी कर यह कहते फिर रहे हैं कि उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है.

हाल ही में अपने जहरीले बयानों के लिए कुख्यात मौलाना तौकीर रजा ने धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देते हुए बुल्डोजर और लाउडस्पीकर विवाद पर मोदी सरकार को चेतावनी तक दे डाली.” उन्होंने कहा है कि भारत में महाभारत होने से कोई नहीं रोक सकता. देश एक बार फिर बंटवारे की ओर जा रहा है.” यह बयान मीडिया (Media) में आया तो जनता ने इनके बयानों को नकारने का काम शुरू कर दिया. जनता ने बयानों से नकारा तो मुस्लिम संगठनों ने अपने बयानों पर माफी मांगना शुरू कर दिया. कई मुस्लिम संगठनों ने अपने इस विभाजनकारी बयान से किनारा कर लिया. इस पर कई मौलानाओं ने बकायदा एक पत्र जारी कर कहा कि मीडिया (Media) ने हमारे बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का काम किया है. हमने हमेशा से वतन में अमन शांति का माहौल बनाए रखने की बात कही है.

इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने हाल ही में दिए अपने एक बयान को मीडिया (Media) द्वारा गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है. मोहतमिम नोमानी के मुताबिक उनके द्वारा अपने बयान में आत्मरक्षा (सेल्फ डिफेंस) के लिए पूरी हिम्मत और ताकत दिखाने की बात कही गई थी. उन्होंने कहा कि वह हमेशा से अमन शांति, एकता और भाईचारे के पक्षधर रहे हैं. वहीं इत्तेहाद ए मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) के मीडिया (Media) प्रभारी मुनीर इदरीसी ने पत्र जारी कर मीडिया (Media) पर ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि हमारे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है. साथ ही हमारी छवि खराब करने का काम किया गया है.

जाहिर है मुस्लिम संगठनों के माफी मांगने के बाद से ही धार्मिक सियासत करने वाले सियासतदानों का चेहरा उतर गया है. इसके साथ ही जिन लोगों ने दिल्ली से लेकर यूपी तक धमकी भरे बयानों से माहे रमजान के पाक महीने को मई-जून की गर्मी बनाने की कोशिश की थी. उनकी कोशिशों पर पानी फिर गया है. यही नहीं देश की राजधानी में इन बयानों से भले ही दंगों की तस्वीर निकली हो लेकिन उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में मुख्यमंत्री (Chief Minister) योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस की नीति का ही असर दिखा कि यहां दंगा करने की किसी में हिम्मत नहीं थी.

दिल्‍ली में फिर चलेगा बुलडोजर, ध्वस्तीकरण स्थानों का नोटिस जारी, मिला 14 दिन का समय


Delhi Forest Department

दिल्ली के जहांगीरपुरी में चलाए गए बुलडोजर का विवाद अभी तक गर्म हैं, ऐसे में अब वन विभाग भी दिल्‍ली के अंदर कई क्षेत्रों में पीला पंजा चलाने की तैयारी कर रहा है। वन विभाग ने दक्षिणी दिल्‍ली इलाके के संरक्षित वन क्षेत्र में झुग्गियां बनाकर रहने वाले लोगों को जल्द से जल्द वन क्षेत्र खाली करने का नोटिस भेजा है। वन विभाग की तरफ से इसके लिए लोगों को 14 दिन का समय दिया है। वन विभाग से मिले इस नोटिस के बाद यहां पर रहने वाले हजारों लोग काफी परेशान है। लोगों का कहना है कि, इस क्षेत्र में वे करीब 30 साल से रह रहे हैं।

बता दें कि, वन विभाग ने यह नोटिस मार्च 2022 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के एक आदेश के अनुपालन के आधार पर दिया है। इसके तहत वन विभाग ने इजरायल, नाला, गुलाबो, सपेरा व शंकर कैंप और रंगपुरी व राजोकरी जंगल क्षेत्र में रहने वाले लोगों को वन क्षेत्र खाली करने का नोटिस जारी किया है। अतिक्रमण हटाने के दौरान अगर अतिक्रमणकारी मौके पर मौजूद रहे तो ध्वस्तीकरण का खर्चा भी उनसे वसूला जाएगा। वन विभाग ने इस कार्रवाई के लिए दिल्‍ली पुलिस से 700 पुलिसकर्मियों की मदद भी मांगी है।

यहां सालों से रहते हैं हजारों परिवार

दिल्‍ली के इस इलाके में बनी इन झुग्गियों में कई सालों से हजारों परिवार रहते हैं। ये लोग उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, झारखंड और हरियाणा से आकर यहां पर करीब 30 साल पहले बसे थे। यहां रहने वाले ज्‍यादातर लोग दिहाड़ी मजदूरी व आसपास की फैक्ट्रियों में काम करते हैं। अब ये लोग अचानक से झुग्गियों के तोड़ने का नोटिस मिलने से काफी परेशान हो गए हैं। लोगों का कहना है कि, हम लोग बेहद गरीब हैं, इसके बाद कहां जाएंगे, पता नहीं। अब लग रहा है कि, अपने बच्‍चों को सड़कों पर ही रहना पड़ेगा। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि, इन झुग्गियों का ध्वस्तीकरण शहर के पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

परम तत्व दर्शन