Wednesday, May 4, 2022

पाकिस्तान में पढ़ने वाला भारतीय छात्र निकला हिजबुल आतंकी, पिता भी आतंकी


जम्मू-कश्मीर पुलिस की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने एक पाकिस्तानी संस्थान में दाखिला लेने के लिए एक भारतीय छात्र और उसके पिता सहित तीन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। पुलिस ने मंगलवार को कहा कि डोडा जिले के कश्तीगढ़ के छात्र आसिफ शब्बीर नाइक, उसके पिता शब्बीर हुसैन नाइक और सफदर हुसैन के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत आरोप पत्र दायर किया गया है।

ये सभी आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े हैं। शब्बीर के फोन की फोरेंसिक जांच से पता चला कि उसने बारामूला-श्रीनगर रोड पर सैन्य प्रतिष्ठानों की वीडियोग्राफी की थी। हवाई अड्डे और आसपास के सुरक्षा चौकियों के लिए पहुँच मार्ग की तस्वीरें भी ली गईं।

जांच में खुलासा हुआ है कि आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने नाइक को बचाने के लिए उसे स्टूडेंट के तौर पर ऑफर किया था। पाकिस्तान में रहते हुए, शब्बीर ने अपने पिता से भी मुलाकात की, जो खुद हिज़्बुल्लाह की मीडिया इकाई में काम कर रहे थे। शब्बीर ने पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों की ट्रेनिंग भी ली थी।

आसिफ शब्बीर को इस्लामाबाद में इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी में मैस्कॉम के छात्र के रूप में दिखाया गया था, लेकिन वह हिज़्बुल्लाह की मीडिया यूनिट में काम करता था। इनमें से शब्बीर और सफदर फिलहाल पाकिस्तान में हैं। गुप्त सूचना के आधार पर शब्बीर को श्रीनगर एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया।

अधिकारियों ने कहा कि वह पढ़ने के लिए नहीं बल्कि आतंकवादियों से मिलने और उनके प्रशिक्षण केंद्रों का दौरा करने के लिए पाकिस्तान जा रहा था। एस.आई.ए. AIADMK के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तानी एजेंसियां ​​भी वैध यात्रा दस्तावेजों के आधार पर भारतीय छात्रों का उपयोग अवैध उद्देश्यों के लिए कर रही है

जोधपुर हिंसा : आरोपियों के घर से निकलीं तलवारें और तेजाब की बोतलें, अब तक 90 से ज्यादा लोग गिरफ्तार


राजस्थान के जोधपुर में हुए सांप्रदायिक तनाव के बीच कर्फ्यू लगाने के बाद फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन माहौल अभी भी तनावपूर्ण है। दस थाना क्षेत्र पुलिस छावनी में बदल चुके हैं। पुलिस की गश्त और मार्च पास्ट जारी है।

जोधपुर हिंसा

राजस्थान के जोधपुर में हुए सांप्रदायिक तनाव के बीच कर्फ्यू लगाने के बाद फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन माहौल अब भी तनावपूर्ण है। दस थाना क्षेत्र पुलिस छावनी में बदल चुके हैं। पुलिस की गश्त और मार्च पास्ट जारी है। देर रात तक पुलिस ने 90 से ज्यादा लोगों को जिला पूर्व और पश्चिम में अब तक शांति भंग के आरोप में हिरासत में लिया है। कुल आठ प्रकरण पुलिस में दर्ज हुए हैं। इनकी संख्य बढ़ भी सकती है।

जिला पूर्व में तीन प्राथमिकी पुलिस दर्ज कर चुकी है। चौथी रिपोर्ट परिवादी की तरफ से दी जाने की कार्रवाई की जा रही थी। वहीं, जिला पश्चिम में पुलिस को पांच-छह परिवाद मिले हैं। जिनमें पांच पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। जिला पूर्व में अभी तक 50 लोगों को लगभग शांति व्यवस्था बिगाड़ने के लिए हिरासत में लिया गया है ऐसे ही पश्चिम में भी 40 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गए हैं।

पुलिस उपायुक्त पूर्व भुवनभूषण यादव ने बताया कि दो प्राथमिकी सदर बाजार, एक खांडा फलसा में दर्ज हुई है। एक अन्य भी सदर बाजार में दर्ज हो सकती है। 50 से ज्यादा लोगों को शांति भंग में हिरासत में लिया गया है। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त पश्चिम हरफूल सिंह ने बताया कि 40 से ज्यादा लोगों का राउण्डअप किया गया है। पांच-छह परिवाद पुलिस को मिले हैं। जिस पर एफआईआर कुछ में दर्ज हो गई है।

आरोपियों के घरों से तलवारें और तेजाब की बोतलें 

दंगाईयों ने सुनारों का बास में बेजा आतंक मचाया। यहां पर खुलेआम तलवारें निकाली गईं और तेजाब की बोतलों से हमला हुआ।

सूरसागर में कर्फ्यू के बावजूद चाकूबाजी, एक घायल
इधर कमिश्नरेट का जिला पश्चिम का सूरसागर थाना क्षेत्र में दोपहर में कर्फ्यू लगा दिया था। मगर बावजूद इसके गेंवा बाइपास रोड पर एक ही पक्ष के दो लोगों में विवाद हो गया। विवाद में बीच बचाव करने गए एक युवक को चाकू से हमला कर घायल कर दिया गया। घायल युवक राजू मेवाड़ा बताया जाता है। गेंवा बाइपास रोड पर वाल्मीकि समाज के कुछ युवकों में झगड़ा हुआ था। इस झगड़े में राजू मेवाड़ा को चाकू लगने पर मथुरादास माथुर अस्पताल में भर्ती करवाया गया। सूरसागर थानाधिकारी गौतम डोटासरा ने बताया कि इस घटना का शहर में हुए विवाद का कोई लेना देना नहीं है।

Tuesday, May 3, 2022

स्वतंत्रता सेनानी की मूर्ति पर फहराया इस्लामिक झंडा, भड़का दंगा और इंटरनेट बंद


राजस्थान के जोधपुर में ईद (Eid 2022) से पहले बीते सोमवार देर रात दो समुदाय के लोग आमने सामने आ गए और उनके बीच झड़प हो गई। बताया जा रहा है जोधपुर के जालौरी गेट चौराहे पर दो गुटों में स्वतंत्रता सेनानी की मूर्ति पर इस्लामिक झंडा फहराने की बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, और उसके बाद यह विवाद बढ़ते-बढ़ते पत्थरबाजी तक पहुंच गया। इस दौरान पत्थरबाजी में कई लोग चोटिल हुए हैं। जैसे ही इस घटना की सूचना मिली वैसे ही कंट्रोल रूम से अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर पहुंच गई और तुरंत भीड़ को वहां से खदेड़ दिया।

इसी के साथ ही जहां विवाद हुआ था उस चौराहे को बंद कर दिया। बताया जा रहा है इस दौरान भीड़ को खदेड़ने में लगी पुलिस पर भी एक समुदाय की ओर से पथराव (Stone pelting on Police) किया गया। अब इस समय यहाँ पूरे शहर में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और पुलिस ने सांप्रदायिक सौहार्द (Communal Harmony) के साथ लोगों से त्योहार मनाने की अपील की है। केवल यही नहीं बल्कि इस इलाके में तनाव को देखते हुए इंटरनेट भी बंद कर दिया गया है। जी दरअसल, जोधपुर में इन दिनों तीन दिवसीय परशुराम जयंती महोत्सव चल रहा है और उसी कड़ी में जोधपुर के जालौरी गेट चौराहे पर स्वर्गीय बालमुकंद की बिस्सा के चौराहे पर भगवा ध्वज फहराए हुए थे, जिसको लेकर प्रशासन ने ब्राह्मण समाज से अनुरोध कर बीते सोमवार को दोपहर में भगवा ध्वज उतरवा लिए थे, लेकिन रात होते-होते अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों ने स्वतंत्रता सेनानी के प्रतिमा पर चढ़कर ध्वजा लगाकर उनके चेहरे को टेप से ढक दिया था।

इसी बात को लेकर स्वर्गीय स्वतंत्रता सेनानी बालमुकुंद बिस्सा के रिश्तेदार और अन्य लोगों ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से इस्लामिक ध्वजा उतारने को बोला तभी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने हिंदू संगठनों के लोगों पर हमला कर दिया और बुरी तरह से उन्हें पीटा। यह सब होने के बाद हिंदू संगठनों के लोग बचने के लिए पास स्थित पुलिस चौकी में पहुंचे, हालाँकि मुस्लिम भीड़ ने पुलिस चौकी में ही तोड़फोड़ कर दी और हिंदू संगठनों के लोगों के साथ मारपीट शुरू कर दी। वहीं दूसरी तरफ इस सारे घटनाक्रम के दौरान पुलिस मौके पर मौजूद रही, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि पुलिस उनके आगे बेबस नजर आई।

वहीं बाद में कंट्रोल रूम से अतिरिक्त पुलिस बल और दोनों डीसीपी मौके पर पहुंचे। हालाँकि तब तक पूरे शहर में यह खबर आग की तरह फैल गई थी कि जालौरी गेट चौराहे पर हिंदू-मुस्लिम का दंगा हो चुका है और दोनों ही पक्षों के लोग जालौरी गेट पहुंचने शुरू हो गए। इस दौरान बिना किसी उच्च अधिकारी के आदेश के उदय मंदिर थाना अधिकारी अमित सिहाग ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया और कई पत्रकारों को भी निशाना बनाकर पीटा गया। बताया जा रहा है लाठीचार्ज के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग सैकड़ों की संख्या में जालौरी गेट चौराहे की तरफ बढ़े और उन्होंने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।

वहीं इसके साथ ही उन्हें रास्ते में जो भी मिला उनके साथ मारपीट शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस ने भीड़ पर काबू पाने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े, जिसके बाद स्थिति थोड़ी शांत हुई। हालाँकि यह सब होने के बाद मुस्लिम वर्ग के काजी साहब ने लोगों को समझाकर मामला सुलझाने का प्रयास किया।

Monday, May 2, 2022

केवल देशभक्त मुसलमानों को हृदय से ईद-उल-फितर की ढेरों शुभकामनाएं: प्रताप मिश्रा


भारत में रहने वाले सभी देशभक्त मुसलमानों को मैं ईद की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। परन्तु जो रहते भरत में हैं खाते भारत का हैं और गाते पाकिस्तान का हैं ऐसे दोगले जिहादी मानसिकता वाले आतंकवादियों को मैं अपना भाई मानने से इनकार करता हूँ। मैं ऐसे आतंकियों को इस पवित्र पर्व पर अपनी मानसिकता को सुधारने की सलाह देता हूँ, और चेतावनी देता हूँ कि यदि आपने देश में आतंक फैलाने का जरा भी प्रयास किया तो आपका स्थान सीधे 72 हूरों के पास होगा।

भारत माता सिर्फ हिन्दुओं की नहीं है आपकी भी है लेकिन इसके लिए आपको भी हमारे साथ वन्दे मातरम तथा भारत माता की जय बोलना होगा। भारत के संविधान का अक्षरसः पालन करना होगा। देश की एकता और अखण्डता में सहभागी बनना होगा।


"चुरा लिया है तुमने जो पुल को नहर नहीं चुराना सनम"

भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है, भ्रष्ट आचरण। ऐसा कार्य जो अपने स्वार्थ सिद्धि की कामना के लिए समाज में नैतिक मूल्यों को ताक पर रख किया जाता है, वही भ्रष्टाचार कहलाता है। भ्रष्टाचार के लिए केवल राजनीतिज्ञ, अफसर और माफिया ही जिम्मेदार नहीं बल्कि देश के आम नागरिक भी भ्रष्टाचार के विभिन्न स्वरूपों में भागीदार हैं। यह कहना अनुचित नहीं लगता कि आज के दौर में वही व्यक्ति ईमानदार है जिन्हें भ्रष्टाचार का मौका नहीं मिलता। देश में बड़े-बड़े करोड़ों-अरबों के घोटाले हुए हैं, जिन्हें पुस्तक के तौर पर लिखा जाए तो महाग्रंथ की रचना हो सकती है। सरकारी कामों में कितना भ्रष्टाचार होता है, इसका ताजा उदाहरण ​बिहार में मिला है। ​बिहार के भागलपुर जिले में सुल्तानगंज में 1710 करोड़ की लागत से पुल का निर्माण किया जा रहा था। रात के समय आई तेज आंधी और बारिश की वजह से ही पुल का स्ट्रक्चर ही गिर गया। जिस तरीके से पुल का हिस्सा गिरा उससे इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह पुल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। मुख्यमंत्री ने  2015 में पुल के निर्माण कार्य की शुरूआत की थी। पुल का निर्माण 2019 में ही पूरा कर लिया जाता लेकिन बाढ़ और भूमि अधिग्रहण के पेच के कारण इसकी डेडलाइन 2022 कर दी गई थी।

जनप्रतिनिधि साफ तौर पर निर्माण में धांधली का आरोप लगा रहे हैं। ​​बिहार में पुल गिरने की यह कोई अकेली घटना नहीं है। अन्य राज्यों में भी पुल पहले भी गिरते रहे हैं। अगर आप ​बिहार या अन्य राज्यों में सरकार के किसी भी विभाग को देखें तो कहने के लिए भ्रष्टाचार भुक्त व्यवस्था है लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि सरकारी विभाग भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं। अगर यह कहा जाए कि पुल, पुलिया और पथ निर्माण में सर्वाधिक घोटाले होते हैं तो यह झूठ नहीं होगा। बाढ़ के दौरान मरम्मत के नाम पर राजनीतिज्ञ और अधिकारी मालामाल होते हैं और ठेकेदार लोगों के जीवन से खिलवाड़ करते हैं। बाढ़ के दौरान मरम्मत के नाम पर करोड़ों खर्च किए जाते हैं। बाढ़ यहां के नेताओं और अधिकारियों के लिए पर्व-त्यौहार के समान है। पुलों का गिरना इस बात को स्पष्ट करता है कि मनुष्य किस हद तक गिर चुका है।

बिहार में भारी बारिश के कारण कोरोेना काल के दौरान 2020 में ​मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उद्घाटन करने के 29 दिन के भीतर ही गोपालगंज में करोड़ों की लागत से बना पुल बह गया था। झारखंड में भी पुल ढहने की खबरें आती रही हैं। पिछले एक दशक की बात करें तो पलामू में एक दर्जन के करीब पुल बह गए या टूट गए। अधिकतर मामलों की जांच और कार्रवाई की फाइलें धूल फांक रही हैं। कई लोगों ने घटिया निर्माण की आवाज कई स्तर पर उठाई लेकिन किसी को जनता के पैसे की​ चिंता ही नहीं। पुल बनते हैं फिर टिकते नहीं।  पिछले महीने बिहार में 500 टन का पुल चोरी होने पर मीम्स बड़े चर्चित हुए थे। एक मीम तो यादों की बारात फिल्म के मशहूर गाने की नकल पर बना था-

एक जंग लगे लौहे के पैदल पुल की वजह से रोहतास जिले का अमियावार गांव काफी सुर्खियों में रहा। इस पुल को दिनदहाड़े कुछ चोरों ने इसे चुराकर इसे और खास बना दिया। चोर नकली अधिकारी बनकर आए और तीन दिन में 60 फीट लम्बे पुल को सिंचाई विभाग के कर्मचारियों से ही कटवा कर ले गए। चोरों ने इतनी चालाकी से काम लिया कि ग्रामीण और स्थानीय कर्मचारी भी झांसे में आ गए। हालांकि यह पुल जर्जर हो चुका था कि सिंचाई विभाग ने इसके समानांतर कंक्रीट का पुल बना दिया था। इसके बाद ही ग्रामीण इस पुल को हटवाने का आवेदन दे चुके थे। चोरों ने इस आवेदन का सहारा लिया। यह जानकारी भी चोरों को ग्रामीणाें से ही मिली होगी।

उत्तराखंड में पिछले पांच वर्षों में 32 पुल टूट चुके हैं। 27 पुलों की हालत जर्जर है। पुलों के नीचे नदियों में बेतरबीब ढंग से खनन और अवैध खनन उन्हें ध्वस्त कर रहा है। करोड़ों के पुल धराशायी हो रहे हैं, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण कम्पनियों, ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। अगर हुई भी तो सिर्फ खानापूर्ति की गई। जिन अधिकारियों के कार्यकाल में पुल ढहे उन्हें पदोन्नति भी दी गई और सेवा विस्तार भी। यह देखना भी जरूरी है कि पुल निर्माण में तकनीकी खामी है भी या नहीं। अगर तकनीकी खामियां नहीं तो फिर इसके लिए सीधे भ्रष्टाचार ही जिम्मेदार है। हैरानी तो इस बात की है कि अंग्रेजों द्वारा बनाए गए पुल आज भी काम कर रहे हैं, जबकि नए पुल बनते ही ढहने के ​लिए हैं।

Sunday, May 1, 2022

सीएम योगी ने पुलिस को दी छूट, कहा, 'टॉप-10 अपराधियों की सूची में हर महीने होना चाहिए बदलाव'


उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने पुलिस विभाग को निर्देशों दिए हैं कि प्रत्येक जिले से बड़े माफियाओं की सूची तैयार की जाए। उन्होंने कहा है कि बड़े अपराधियों से लेकर छोटे अपराधी तक सबके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने पुलिस को खुलकर काम करने के भी निर्देश दिए हैं।

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) संगीन अपराध करने वालों और भूमाफिया (Land Mafia) के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं। यूपी में जहां अपराधियों के खिलाफ उनकी संपत्ति पर बुलडोजर (Bulldozer) चल रहे हैं तो वहीं कई अपराधी जेल में बंद है। इसके बावजूद आए दिन प्रदेश में हर जिले से बड़ी वारदात सामने आ जाती है। ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ ने पुलिस (UP Police) को नए सख्त आदेश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीएम योगी आदित्यनाथ ने पुलिस विभाग को दिए निर्देशों में कहा है कि प्रत्येक जिले से बड़े माफियाओं की सूची तैयार की जाए। प्रत्येक माह थाने में टॉप-10 अपराधियों की लिस्ट तैयार कर प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में टॉप-10 अपराधियों की सूची में हर महीने बदलाव होना चाहिए। अगर पुलिस 'एक्टिव' रहकर कार्य करेगी तो एक समय बाद प्रदेश में कोई भी टॉप-10 माफिया नहीं मिलेंगे।

बता दें कि विपक्ष लगातार यूपी में अपराधों को लेकर योगी सरकार को रोजाना घेर रही है। विशेषकर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) तो रोजाना बड़े अपराधों और घटनाओं की सूचनाएं ट्विटर पर साझा करके योगी सरकार पर हमला बोल रहे हैं। सीएम योगी भी सभी अपराध और घटनाओं पर भी नजर बनाए रखते हैं और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को त्वरित जांच और दोषियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करने के आदेश भी जारी करते हैं। अब सीएम योगी ने पुलिस को सख्त निर्देश दिया है कि प्रत्येक जिले के टॉप-10 अपराधियों की सूची में हर महीने बदलाव होना चाहिए। पुलिस एक्टिव रहकर काम करेगी तो प्रदेश कुछ समय बाद ही पूरी तरह से अपराध मुक्त हो जाएगा।

संत परमहंस का ऐलान- आगरा में होगी धर्म संसद, 5 मई को ताजमहल में स्थापित करेंगे शिव की प्रतिमा


Taj Mahal

उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित विश्व प्रसिद्ध ताजमहल (Taj Mahal) में 27 अप्रैल को भगवा वस्त्र पहने होने की वजह से प्रवेश नहीं देने का दावा करने वाले अयोध्या के संत परमहंसाचार्य (Paramhans Acharya) ने एक वीडियो संदेश में 5 मई को दोबारा इस स्मारक में लौटने का ऐलान किया है. साथ ही उन्होंने वहां ‘धर्म संसद’ आयोजित करने की घोषणा की है. उन्होंने आगे कहा कि ‘संविधान का अनुपालन’ करते हुए वह भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित करेंगे और स्मारक (ताजमहल) में शिव की प्रतिमा स्थापित करेंगे. हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारी ने कहा कि संत को भगवा वस्त्र पहने होने की वजह से नहीं रोका गया और ‘मैंने उनसे बात की और ताजमहल आने के लिए आमंत्रित किया.’

एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें संत ने अपना परिचय अयोध्या स्थित तपस्विनी चवणी पीठाधीश्वर के जगदगुरु परमहंसाचार्य के तौर पर दिया है और दावा किया है कि ताजमहल वास्तव में ‘तेजो महालय’है.

संत ने कहा, ‘दौरे के दिन …सनातन धर्म संसद का आयोजन होगा और भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाएगा. ये गतिविधियां संविधान का अनुपालन करते हुए की जाएगी. मैं हिंदू संगठनों के सदस्यों, लोगों और अन्य लोगों ने बड़ी संख्या में ताजमहल पहुंचने की अपील करता हूं.’

Paramhans
संत परमहंसाचार्य

विश्व प्रसिद्ध स्मारक में प्रवेश करने से कथित तौर पर रोके जाने के संबंध में संत ने कहा, ‘भगवा वस्त्र के कारण 27 अप्रैल को मुझे प्रवेश देने से रोका गया और मैं लौट आया. उसके बाद प्रदर्शन हुआ और राजकुमार पटेल (एएसआई अधिकारी) ने माफी मांगी और मुझे दोबारा आने के लिए आमंत्रित किया. मैं पांच मई को ताजमहल जाऊंगा और वहां भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करूंगा.’

मकबरे के बारे में उन्होंने दावा किया, ‘आगरा में तेजो महालय है जिसे मुगल ताजमहल कहते हैं और इतिहास को गलत तरीके से रखा गया. वह भगवान शिव का मंदिर है.’

जब आगरा परिक्षेत्र के एएसआई अधीक्षक राजकुमार पटेल से संपर्क किया गया तो उन्होंने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, ‘इस वायरल वीडियो के बारे में मुझे कुछ नहीं कहना…उन्हें (संत को) भगवा कपड़ों की वजह से नहीं रोका और उसके बाद मैंने उनसे बात की और ताजमहल आने का न्योता दिया.’

परम तत्व दर्शन