Thursday, May 12, 2022

कर्ज में डूबा पाकिस्तान पीओके के बड़े भाग को चीन को सौंपने की कर रहा तैयारी



भारत के खिलाफ पाकिस्तान सदियों से साजिश रचता रहा है. इस बार उसने चीन से मिलकर एक बड़ी योजना बनाई है. कर्ज में डूबा पाकिस्तान पीओके के बड़े भाग को चीन को सौंपने की तैयारी कर रहा है.

यह ठीक वैसे ही हो रहा है, जब पाकिस्तान ने 1963 में PoK में आने वाली 5 हजार वर्ग किलोमीटर एरिया में फैली शक्सगाम वैली को चीन को गिफ्ट कर दिया था. उस घाटी पर आज भी ड्रैगन का कब्जा है. अब हुंजा घाटी को चीन को दिए जाने की अटकलों के बाद स्थानीय लोगों के विरोध हिंसा की एक नई लहर शुरू हो गई है.

पाकिस्तान सरकार की योजना से नाराज गिलगित-बालटिस्तान (Gilgit Baltistan) के लोगों का पाकिस्तानी सेना के साथ संघर्ष पिछले कुछ हफ्तों में काफी बढ़ गया है. स्कार्दू में स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों उनके वाहनों पर पथराव भी किया. लोगों में इस बात को लेकर भी गुस्सा भड़का हुआ है कि पाकिस्तानी सैनिक उनके जनप्रतिनिधियों को सरेआम पीट रहे हैं.

पाकिस्तानी सैनिकों ने बीते माह के अंत में स्थानीय लोगों की आवाज उठाने पर गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit Baltistan) के पर्यटन स्वास्थ्य मंत्री राजा नासिर अली खान को बुरी तरह से पीटा गया था. मंत्री ने स्कार्दू रोड पर सेना के अधिग्रहण को लेकर अपना विरोध जताया था. राजा नासिर अली खान पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान के समर्थक रहे हैं.

जनता में विरोध शुरू

घटना 27 अप्रैल, 2022 को हुई थी. इसने सेना के खिलाफ जनता में विरोध शुरू हो गया था. घटना के बाद गुस्साए लोगों ने सेना के अधिकारियों उनके वाहनों पर जमकर पथराव किया. इस स्थानीय समुदाय ने हाल के दिनों में अलग-अलग मौके पर सेना के खिलाफ विरोध किया है.

श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला


नई दिल्ली। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद के मामलों को जल्द निपटाने की याचिका पर गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने मथुरा की अदालत को निर्देश दिया है कि अधिकतम चार महीने में सभी अर्जियों का निपटारा किया जाए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सुन्नी वक्फ बोर्ड व अन्य पक्षकारों के सुनवाई में शामिल ना होने पर एकपक्षीय आदेश जारी कर दिया जाए।

यह याचिका नारायणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष यादव की तरफ से दाखिल की गई थी। इसमें याचिकाकर्ता ने मथुरा में चल रहे मुकदमे की सुनवाई हर रोज और जल्द निपटारा कराए जाने की अपील की थी। याचिका में मांग की गई थी कि मथुरा की अदालत में इस केस से जुड़े जो भी मामले पेंडिंग हैं, उनका निस्तारण जल्द से जल्द किया जाए। अगर विपक्षी पार्टी सुनवाई के दौरान हाजिर न हों तो उनके खिलाफ कार्रवाई कर एकतरफा आदेश दिया जाए।

श्रीकृष्ण जन्मस्थान और ईदगाह प्रकरण में मथुरा की अदालत में अब तक कुल नौ वाद दर्ज हो चुके हैं। एक अपील जिला न्यायाधीश के न्यायालय में लंबित है। इस पर जिला जज ने निर्णय सुरक्षित रखा है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान प्रकरण में सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री द्वारा 13. 37 एकड़ जमीन पर दावा पेश किया गया था, लेकिन परंतु सिविल जज सीनियर डिवीजन ने उनके वाद को स्वीकार नहीं किया गया।

जिसके बाद वह अपील में जिला जज की अदालत पहुंची। जिला जज द्वारा निर्णय को सुरक्षित रखने के बाद के बाद 19 मई की तारीख नियत की है। जबकि नारायणी सेना, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास, अखिल भारत हिंदू महासभा और अन्य सहित कुल मिलाकर के नौ वाद अदालत में दर्ज हैं। जिनमें अलग-अलग सुनवाई चल रही है। सभी मामलों के वादी पक्षों ने हाईकोर्ट के निर्देशों को स्वागत किया है।

अब अफसरशाही पर भी चलने लगा बुलडोजर, पिछले 24 घंटों में देश के 27 टॉप अधिकारी नपे


देश में आईएएस और पीसीएस को समाज एक विशेष स्थान देता है। इस पद की प्रतिष्ठा ही है कि हर मां-बाप अपने बच्चे को अधिकारी बनाने का सपना जरूर देखता है। कोई थोड़ी भी ईमानदारी से पढ़ाई करता है तो पहले नंबर पर अफसर बनने की ही सोचता है, लेकिन वही शख्स अधिकारी की कुर्सी संभालने पर घूस लेने लगे या अपने काम में ही लापरवाह हो जाए, जिस काम की सैलरी पाता हो उसे ही भूल जाए तो आप क्या कहेंगे?
कुछ साल पहले तक क्लास-वन या टॉप पोस्ट को ‘फिकर नॉट’ टाइप माना जाता था। मतलब नौकरी मिल गई तो बस ऐश ही ऐश है। अब ऐसा नहीं चलता। अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर ही नहीं, अफसरशाही पर भी अब बुलडोजर चलने लगा है। लाल बत्ती हटाकर अपने देश में जो स्टेटस सिंबल खत्म करने की कोशिश की गई, उस दिशा में आगे बढ़ते हुए अब भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों पर नकेल कसी जाने लगी है। पिछले 24 घंटों में दिल्ली से लेकर यूपी, झारखंड, असम, तमिलनाडु तक ऐसे अकर्मण्य 27 अधिकारियों पर सरकारी बुलडोजर चला है। आइए जानते हैं कि ये अधिकारी कौन हैं और उन्होंने कैसे पूरी अफसर जमात को बदनाम किया है।
UP के DGP 
गांव में ग्राम विकास अधिकारी, थाने में SHO, ब्लॉक में बीडीओ, एसडीएम, डीएम तक लापरवाही समझ में आती है लेकिन जिस शख्स के पास किसी देश के बराबर क्षेत्र वाले प्रदेश की जिम्मेदारी हो, ऐसे डीजीपी लापरवाही में नपेंगे तो क्या संदेश जाएगा। जी हां, उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक मुकुल गोयल बुधवार को सरकारी काम में लापरवाही के आरोप में पद से हटा दिए गए। नए पुलिस महानिदेशक चुने जाने तक अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार को कार्यभार संभालने को कहा गया है। गोयल को पुलिस महानिदेशक (डीजी) नागरिक सुरक्षा के पद पर भेजा गया है। सरकारी बयान में बताया गया है कि ‘पुलिस महानिदेशक मुकुल गोयल को शासकीय कार्यों की अवहेलना करने, विभागीय कार्यों में रुचि न लेने और अकर्मण्यता के चलते डीजीपी के पद से हटा दिया गया है।’
इस मामले में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त फैसले की भी तारीफ हो रही है। जनता में यही संदेश गया है कि कोई कितनी भी बड़ी पोस्ट पर हो, अगर काम नहीं करेगा तो हटा दिया जाएगा।
1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गोयल को पिछले साल जून में प्रदेश का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया था। उत्तर प्रदेश का डीजीपी बनने से पहले वह सीमा सुरक्षा बल में अपर पुलिस महानिदेशक के पद पर तैनात थे। मुजफ्फरनगर में जन्मे गोयल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की डिग्री हासिल कर चुके हैं।
‘रुपयों के बिस्तर’ पर सोने वाली पूजा सिंघल, 5% चलता था कमीशन
जैसे हम बेड पर बिस्तर बिछाते हैं उसी तरह से नोटों की गड्डियां बिछी थीं। वो तस्वीर जिसने भी देखी, हैरान रह गया। अधिकारी बनने पर ऐसी मनमर्जियां! जांच बढ़ी, पूछताछ हुई और कल झारखंड की खनन सचिव पूजा सिंघल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनरेगा फंड के कथित गबन और अन्य संदिग्ध वित्तीय लेन देन के मामले में गिरफ्तार कर लिया। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की 2000 बैच की अधिकारी को पीएमएलए के तहत ईडी ने दो दिन की पूछताछ के बाद हिरासत में लिया। सिंघल जवाब देने में टालमटोल कर रही थीं। उनके कारोबारी पति अभिषेक झा का बयान भी मामले में दर्ज किया गया है। दंपति से कथित तौर पर जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट और वित्तीय सलाहकार सुमन कुमार के बाद यह इस मामले में हुई दूसरी गिरफ्तारी है।
मामले में एक के बाद एक खुलासे शुरू हो गए। सिंघल और अन्य के खिलाफ ईडी की जांच मनी लॉन्ड्रिंग के उस मामले से संबंधित है जिसमें झारखंड सरकार में पूर्व कनिष्ठ अभियंता राम बिनोद प्रसाद सिन्हा को एजेंसी ने 17 जून 2020 को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने सिन्हा को 2012 में पीएमएलए के तहत दर्ज मामले का अध्ययन करने के बाद गिरफ्तार किया था। सिन्हा के खिलाफ जनता के धन की हेराफेरी करने के आरोप में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार में मामला दर्ज किया गया था। सिन्हा ने इस धनराशि को एक अप्रैल 2008 से 21 मार्च 2011 तक कनिष्ठ अभियंता के रूप में काम करते हुए अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर निवेश किया था। जबकि उस धनराशि को खूंटी जिले में मनरेगा के तहत सरकारी योजनाओं के लिए रखा गया था।
पूछताछ में सिन्हा ने ईडी से बताया कि उन्होंने फ्रॉड करके जो पैसे कमाए उसमें से 5 प्रतिशत कमीशन जिला प्रशासन को दिया गया था। पूजा सिंघल के खिलाफ अनियमितता के मामले उस समय के हैं जब वह 2007 और 2013 के बीच चतरा, खूंटी और पलामू के उपायुक्त/जिला मजिस्ट्रेट थीं। एजेंसी ने इस मामले में सीए सुमन कुमार को 6 मई को उसके परिसर से 17 करोड़ रुपये से ज्यादा नकदी जब्त करने के बाद गिरफ्तार किया था। अधिकारियों ने कहा कि सभी ठिकानों से कुल 19.31 करोड़ रुपये की बरामदगी की गई थी।
रेलवे ने 19 अधिकारियों को भेजा घर
डिपार्टमेंट कोई भी हो, लोगों के जेहन में इतनी आरामतलबी आ गई है कि सोचते हैं अफसर बन गए अब काम करने की क्या जरूरत है। रेलवे ने बुधवार को ऐसे ही अपने 19 अधिकारियों को घर भेज दिया। जी हां, इन्हें नौकरी से जबरन रिटायर कर दिया गया है। रेलवे ने उस नियम को लागू किया है कि किसी सरकारी कर्मी को न्यूनतम तीन महीने का नोटिस देकर या इस अवधि का वेतन देकर सेवानिवृत्त के लिए बाध्य किया जा सकता है। उम्मीद की जा रही है कि शायद इस डर से ही सही, बाकी बचे अकर्मण्य लोग कुछ काम कर लें।
यह लिस्ट इतनी छोटी भी नहीं है। 19 अधिकारियों के अलावा पिछले 11 महीने में 75 अन्य अधिकारियों को VRS (स्वैच्छिक सेवानिवृति) लेने के लिए बाध्य किया गया जिनमें महाप्रबंधक और सचिव जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यह कदम ठीक से काम नहीं करने वालों से निजात पाने के केंद्र सरकार के प्रयासों के तहत उठाया गया है। जिन 19 लोगों को रिटायर किया गया है उनमें इलेक्ट्रिकल एवं सिग्नल सेवाओं के चार-चार अधिकारी, मेडिकल एवं सिविल से तीन-तीन अधिकारी, कार्मिक से दो, स्टोर, यातायात एवं मेकेनिकल से एक-एक अधिकारी शामिल हैं। ये सभी पश्चिम रेलवे, मध्य रेलवे, पूर्व रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे, सैंडकोच फैक्टरी कपूरथला, माडर्न कोच फैक्टरी, रायबरेली आदि से हैं।
गृह मंत्रालय के 6 अधिकारियों को लगी हथकड़ी
CBI ने 40 जगहों पर छापेमारी कर गृह मंत्रालय के छह अधिकारियों सहित 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और मोबाइल फोन मिले हैं। ये छापेमारी दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, असम और मणिपुर में की गई है। CBI ने कथित तौर पर एफसीआरए नियमों का उल्लंघन करते हुए विदेशी चंदों को मंजूरी दिलाने के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों और बिचौलियों के खिलाफ अभियान चलाया। इस कार्रवाई में 3.21 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए। एजेंसी ने मंत्रालय की शिकायत पर 10 मई को 36 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इन लोगों में गृह मंत्रालय के एफसीआरए डिवीजन के सात अधिकारी भी शामिल हैं।
मंत्रालय ने पाया कि कम से कम तीन नेटवर्क सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे थे जो गैर सरकारी संगठनों को विदेशी चंदा (विनियमन) कानून (FCRA) संबंधी मंजूरी में तेजी लाने के लिए उनसे पैसे ले रहे थे ताकि उन्हें विदेशी चंदा मिल सके। जब यह मामला गृह मंत्री अमित शाह के संज्ञान में लाया गया तो उन्होंने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कुछ अधिकारी एफसीआरए के तहत पंजीकरण और पंजीकरण के नवीनीकरण और एफसीआरए से संबंधित अन्य कार्यों के लिए गैर सरकारी संगठनों से कथित तौर पर रिश्वत ले रहे थे। जांच के दौरान दो आरोपियों को गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ लेखाकार की ओर से चार लाख रुपये की रिश्वत लेते और देते हुए पकड़ा गया।
अफसरों को याद रखना चाहिए…
ये मामले यह बताने के लिए काफी हैं कि भ्रष्टाचार किस तरह हमारे सिस्टम की नसों में दौड़ रहा है। गांव में घपला होता है तो उससे निपटने के लिए कई अधिकारी और तंत्र है लेकिन अगर जिलाधिकारी स्तर पर अफसर करोड़ों डकारने लगे तो व्यवस्था का क्या होगा। कैसे भ्रष्टाचार मुक्त देश बन पाएगा। ऐसे मामले पूरे IAS समुदाय, अधिकारियों के समूह को भी प्रदूषित करते हैं। जनता हर अधिकारी को घूसखोर की नजरों से देखने लगती है। अगर ऐसा ही रहा तो पद की गरिमा भी नहीं बचेगी। अफसरों के लिए यह ‘लिटमस टेस्ट’ होगा। जरा पिछले दिनों टीचर या कर्मचारी के रिटायरमेंट-ट्रांसफर की उन तस्वीरों को याद कर लीजिए जब पूरा स्कूल या डिपार्टमेंट रोता दिखा था। हमारे अफसर अपने रिटायरमेंट के बाद खुद को कैसे याद कराना चाहते हैं?

Tuesday, May 10, 2022

रेपिस्ट मौलवी को उम्रकैद की सजा, फैसला सुनाते भावुक हुये जज, पीड़िता के लिये लिखी ये मार्मिक कविता


जज ने लिखा ''ओ मेरी नन्ही मासूम परी रानी तुम खुश हो जाओ, तुम्हें रुलाने वाले दुष्ट राक्षस को हमने जिंदगी की आखिरी सांस तक के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया है''.

 जज ने लिखा ''ओ मेरी नन्ही मासूम परी रानी तुम खुश हो जाओ, तुम्हें रुलाने वाले दुष्ट राक्षस को हमने जिंदगी की आखिरी सांस तक के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया है''.
घटना गत वर्ष 13 नवंबर को दीगोद इलाके में हुई थी
मौलवी एक गांव में बच्चों को उर्दू की तालीम देता था
 कोटा जिले में 6 साल की मासूम के साथ रेप करने वाले मौलवी एवं उर्दू टीचर अब्दुल रहीम (Rapist Maulavee Abdul Rahim) को पोक्सो कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने रेपिस्ट को जीवन की आखिरी सांस तक (Till the last breath of life) सलाखों के पीछे रखने की सजा सुनाई है. रेप केस का फैसला सुनाने के दौरान जज भावुक हो गये. उन्होंने पीड़िता के लिये एक कविता भी लिखी. उन्होंने लिखा ”ओ मेरी नन्ही मासूम परी रानी तुम खुश हो जाओ, तुम्हें रुलाने वाले दुष्ट राक्षस को हमने जिंदगी की आखिरी सांस तक के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया है, अब तुम इस धरती पर निडर होकर अपने सपनों के खुले आसमान में पंख लगाकर उड़ सकती हो, तुम सदा हंसते रही बस यही प्रयास है हमारा”.

किसी किताब में लिखी हुई लग रही इन पंक्तियों को पोक्सो कोर्ट के विशिष्ट न्यायाधीश दीपक दुबे ने अपने फैसले में दर्ज किया है. कोर्ट ने करीब छह माह पुराने इस मामले में मंगलवार को फैसला सुनाया. कोर्ट ने 6 वर्षीय मासूम बालिका के साथ वारदात करने वाले अभियुक्त उर्दू पढ़ाने वाले मौलवी को शेष-प्राकृत जीवनकाल तक के कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी मौलवी पर 1 लाख का भारी जुर्माना भी लगाया है.

कोटा के दीगोद इलाके में हुई थी वारदात
विशिष्ट लोक अभियोजक ललित शर्मा ने बताया कि अब्दुल रहीम पेशे से उर्दू टीचर था. वह बच्चों को उर्दू पढ़ाता था. उसने गत वर्ष ट्यूशन पढ़ने आई 6 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म किया था. मासूम के परिजनों ने गत वर्ष 14 नवंबर को दीगोद थाने में एक शिकायत दी थी. इसमें उन्होंने बताया कि उर्दू टीचर अब्दुल रहीम पिछले 4 महीने से गांव के मदरसे में रहता है. वह बच्चों को उर्दू की तालीम देता है. उनकी 6 साल की बेटी भी उर्दू पढ़ने मौलवी के पास जाती थी.

गत वर्ष 13 नवंबर को आरोपी ने की थी वारदात
13 नवंबर को दोपहर 3 बजे बेटी पढ़ने के लिये मौलवी के पास गई थी. उसके बाद 4 बजे वह रोती हुई घर लौटी. उसने परिजनों को मौलवी की ओर से की गई करतूत बताई. शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 14 नवंबर को आरोपी मौलवी को गिरफ्तार किया. जांच के बाद 6 जनवरी को कोर्ट में चालान पेश किया गया था. कोर्ट में फरवरी माह में मौलवी के खिलाफ आरोप तय किए थे. कोर्ट में पेश किये गये साक्ष्यों और गवाहों के बयान के बाद जज ने मौलवी अब्दुल रहीम को रेप का दोषी करार देते हुये मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

दिल्ली में दूसरे दिन बुलडोजर ने दुकानें तोड़ी, घरों के बाहर का अतिक्रमण हटाना शुरू; JCB के आगे खड़े हुए AAP विधायक को हटाया


दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) की मंगलवार को बुलडोजर लेकर मंगोलपुरी और न्यू फ्रेडंस कॉलोनी में अतिक्रमण हटाने पहुंची। यहां बुलडोजर ने अवैध दुकानें तोड़ना शुरू कर दी हैं। दुकानदारों ने अपना अतिक्रमण हटाना खुद शुरू कर दिया है। पटरी दुकानदारों के अतिक्रमण के बाद अब बुलडोजर घरों के बाहर किए गए अतिक्रमण को तोड़ा जा रहा है। घरों के बाहर बनी पार्किंग, बाउंड्री और अन्य निर्माण को तोड़ा गया। लोगों घरों के बाहर सड़क पर रैलिंग लगाकर वहां कब्जा कर लिया था, जिसे बुलडोजर से हटा दिया गया।

SDMC दक्षिण दिल्ली के कई हिस्सों में 4 मई से 13 मई तक अतिक्रमण अभियान का पहला चरण चला रही है। इसी क्रम में वह कल शाहीन बाग में अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। लोगों के विरोध के कारण टीम अतिक्रमण नहीं हटा पाई थी।

लाल रंग का रिबिन लगाकर पहुंचे कर्मी
SDMC के कर्मचारी लाल रंग का रिबिन लगाकर एक्शन में भाग लेने पहुंचे। टीम ने यह रिबिन लगाने का डिसीजन इसलिए लिया, जिससे आम लोग और MDMC कर्मचारी अलग पहचान में आ सकें और हंगामा होने की स्थिति में पुलिस को एक्शन लेने में किसी भी प्रकार का कन्फ्यूजन न हो।

न्यू फ्रेडंस कॉलोनी पहुंचे बुलडोजर को देखकर लोगों ने अपना अतिक्रमण खुद ही हटाना शुरू कर दिया था। लोगों का कहना था कि हम अपना अतिक्रमण खुद हटा लेंगे, यहां बुलडोजर नहीं चलाएं, लेकिन टीम ने अपनी कार्रवाई जारी रखी। यहां लोगों ने सड़क पर पक्का निर्माण कर लिया था। लोगों ने दुकान बनाकर सीमेंट कंक्रीट से पक्का निर्माण किया था। इसे बुलडोजर से तोड़ा जा रहा है।

ट्रकों में भरकर ले जा रहे सामान
लोगों ने बुलडोजर देखकर अपनी दुकानें हटाकर उनका सामान पार्क में छिपा दिया था। MCD की टीम ने पार्क से सामान जब्त कर लिया। जो ट्रक वह मलबा भरने के लिए लाए थे, उसमें यह सामान भरकर ले गए।

गुरुद्वारा रोड से शुरू हुई थी कार्रवाई
SDMC का बुलडोजर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी से पहले गुरुद्वारा रोड पहुंचा और यहां रास्ते से अतिक्रमण हटाते हुए न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी पहुंचा। SDMC ने कल ही यहां 11 बजे से कार्रवाई का ऐलान किया था। SDMC का बुलडोजर 11 बजे से कुछ देर पहले ही एक्शन में आ गया और अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया।

हम सड़कों पर काम कर रहे, धर्म विशेष पर नहीं: सिंह
SDMC सेंट्रल जोन के अध्यक्ष राजपाल सिंह ने अतिक्रमण अभियान पर कहा- लोगों का आरोप रहता है कि हम धर्म विशेष पर कार्रवाई करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। जनता के जो अधिकार हैं, हम उसके लिए काम करते हैं। बच्चों की स्कूल बसें, फायर टेंडर आने के लिए सड़कें बाधित नहीं होनी चाहिए, हम इसके लिए काम कर रहे हैं।

विधायक को पुलिस ने पकड़कर हटाया
गुरुद्वारा रोड पर जैसे ही बुलडोजर पहुंचा, आम आदमी पार्टी के मंगोलपुरी विधायक मुकेश अहलावत मौके पर पहुंच गए और बुलडोजर के आगे खड़े हो गए। उनका कहना था कि जब लोग खुद ही अपना अतिक्रमण हटा रहे हैं तो बुलडोजर की क्या जरूरत है। इस पर पुलिस ने पहले उन्हें पकड़कर गाड़ी में बैठाया, फिर वहां से जाने को बोल दिया। पुलिस की सख्ती देकर विधायक वहां से चले गए।

सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से मना किया था
कल शाहीन बाग में अतिक्रमण हटाने की मुहिम के खिलाफ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी यानी CPIM ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यह कहते हुए दखल देने से इनकार कर दिया कि याचिका किसी भी प्रभावित पक्ष की बजाय एक राजनीतिक दल ने दायर की है। कोर्ट ने कहा कि अदालत को इन सब के लिए मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने की मुहिम से प्रभावित लोगों से हाईकोर्ट जाने को कहा था।

सरकार जांच परखकर दुरुस्त करेगी राजद्रोह कानून, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा


सरकार जांच परखकर दुरुस्त करेगी राजद्रोह कानून

केंद्र राजद्रोह कानून की समीक्षा करेगा। इसे लेकर केंद्र ने दूसरा हलफनामा दाखिल किया है। इसमें कहा गया है कि 124ए के प्रावधानों पर पुनर्विचार और पुन: जांच के लिए केंद्र सरकार तैयार है। कोर्ट को 124ए की वैधता पर सुनवाई के साथ आगे बढ़ने से पहले केंद्र के पुनर्विचार की प्रतीक्षा करनी चाहिए। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजद्रोह कानून के प्रावधान पर फिर से विचार करने और पुनर्विचार करने को कहा है। प्रधानमंत्री ने अप्रचलित राजद्रोह कानून को हटाने का आग्रह किया। 

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने नागरिक स्वतंत्रता के संरक्षण, मानवाधिकारों के सम्मान और संवैधानिक स्वतंत्रता को अर्थ देने के पक्ष में अपने स्पष्ट विचार व्यक्त किए हैं। सरकार उपयुक्त रूप से हितधारकों के विचारों को ध्यान में रखेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि देश की संप्रभुता और अखंडता संरक्षित है। इसलिए, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आईपीसी 1860 की धारा 124ए की वैधता की जांच में अपना कीमती समय नहीं लगाने का आग्रह किया है और कहा है कि भारत सरकार द्वारा की जाने वाली धारा 124ए पर फिर से विचार करने की प्रक्रिया की प्रतीक्षा करें।

इससे पहले केंद्र ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में राजद्रोह से संबंधित दंडात्मक कानून और इसकी वैधता बरकरार रखने के संविधान पीठ के 1962 के एक निर्णय का बचाव किया था। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 5 मई को कहा था कि वह 10 मई को इसपर सुनवाई करेगी कि क्या राजद्रोह से संबंधित औपनिवेशिक युग के दंडात्मक कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी पीठ के पास भेजा जा सकता है।

कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने शुक्रवार को कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में 2014 से 2019 के बीच राजद्रोह के 326 मामले दर्ज किए गए थे। प्रदेश कांग्रेस महासचिव और प्रवक्ता सचिन सावंत ने इस आंकड़े को ट्वीट करते हुए कहा कि केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान 2019 के बाद दर्ज किए गए राजद्रोह के मामलों की संख्या अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलने के लिए राजद्रोह के कुल 149 और (उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री) योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बोलने के लिए 144 मामले दर्ज किए गए। केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन पर गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया और हाथरस बलात्कार मामले के बारे में लिखने के लिए उत्तर प्रदेश जाने के बाद डेढ़ साल से जेल में हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में बिना OBC आरक्षण के पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया


एमपी में कमलनाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी करने का फैसला लिया था.
OBC Reservation Stop. एमपी में कमलनाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी करने का फैसला लिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में बिना OBC आरक्षण के पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया है. इस आदेश के बाद एमपी में सियासी हलचल बढ़ गयी है. इस हालात के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों एक दूसरे को दोषी ठहरा रही हैं. दोनों दलों का कहना है वो पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठीक से पढ़ेंगे और फिर आगे क्या कदम उठाना है उस पर विचार करेंगे.

मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के कारण लंबे समय से अटके पंचायत और निकाय चुनाव के संबंध में आज सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही सियासी घमासान मच गया है. बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में जुट गए हैं. खुद को सबसे बड़ा ओबीसी हितैषी बताने की कोशिश में सियासी दल हैं. बिना ओबीसी आरक्षण के स्थानीय निकाय चुनाव कराए जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोलना शुरू कर दिया है.

बीजेपी ने कहा-कांग्रेस दोषी
प्रदेश के मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा आज जो हालात बने उसके पीछे कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार है. यदि पहले ही कांग्रेस के नेता कोर्ट में नहीं जाते तो आज आरक्षण पर रोक नहीं लगती. मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का परीक्षण करा रही है. इसके बाद सरकार अगला कदम उठाएगी. मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा सरकार ने पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की रिपोर्ट को कोर्ट के सामने पेश किया था. अधूरी रिपोर्ट देने पर कोर्ट की नाराजगी के बारे में मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 1 हफ्ते का अतिरिक्त समय मांगा था. कोर्ट की अपेक्षा के मुताबिक जवाब देने के लिए समय मांगा था. लेकिन अब कोर्ट का आदेश आ चुका है. कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है. राज्य सरकार कोर्ट के आदेश का परीक्षण कर अगला कदम उठाएगी. मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा सरकार पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण के साथ कराने के पक्ष में है. जरूरत पड़ी तो रिव्यू पिटिशन दाखिल की जाएगी.

कांग्रेस बोली-ये सब बीजेपी का किया धरा

बिना ओबीसी आरक्षण के पंचायत चुनाव कराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस बीजेपी सरकार पर हमलावर है. कांग्रेस में ओबीसी वर्ग के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा बीजेपी एमपी में आर एस एस का एजेंडा लागू करने की कोशिश में  है. 56 फीसदी आबादी के साथ सरकार षड्यंत्र कर रही है. अरुण यादव ने कहा इस बात की आशंका थी कि अन्य पिछड़ा वर्ग को लेकर सरकार की घोर लापरवाही सामने आएगी. बीजेपी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का आरक्षण खत्म करने का एजेंडा लागू करने की कोशिश में है. सरकार ने आधी अधूरी रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की है जो ओबीसी वर्ग के साथ धोखा है. इसका जवाब 2023 के चुनाव में ओबीसी वर्ग बीजेपी देने देगा. अरुण यादव ने कहा कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का परीक्षण कर रही है. जरूरत पड़ी तो कांग्रेस अपील कर सकती है.

OBC हितैषी बताने की होड़
मध्य प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिन के अंदर पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने बिना ओबीसी आरक्षण के ही चुनाव कराने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद खुद को सबसे बड़ा ओबीसी हितैषी बताने की कोशिश में बीजेपी और कांग्रेस जुट गए हैं. मतलब साफ है कि अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ओबीसी सुप्रीमो कौन होगा इसकी जान तेज हो गई है.

परम तत्व दर्शन