Tuesday, May 24, 2022

हिन्दू मन्दिरों पर कब्जा करने वाले मुस्लिम आक्रांताओं के पक्षधर मुसलमानों को भी मिलनी चाहिए सजा: प्रताप मिश्रा

भारतीय या हिन्दू संस्कृति की विशालता और उदारता व सहिष्णुता का इससे बड़ा कोई दूसरा नमूना नहीं हो सकता कि काशी विश्वनाथ धाम में 1669 ईस्वीं में तत्कालीन मुगल बादशाह औरंगजेब के फरमान पर मचाये गये विध्वंस के बाद इसके एक हिस्से में देवाधिदेव महादेव के पूजा स्थल पर तामीर की गई कथित मस्जिद के ‘जबर’ जीते-जागते निशान और सबूत होने के बावजूद हिन्दू समाज के लोग न्यायालय की शरण में हैं और अपना शास्त्र सम्मत जायज हक मुस्लिमों से लेने के लिए कानूनी दांव-पेंचों का सामना करना चाहते हैं। पूरी दुनिया में ऐसी कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलती कि जब किसी स्थान विशेष पर अलग-अलग धर्मों के अनुयायियों का विवाद पैदा हो जाने पर इसका निपटारा न्यायालय पर छोड़ दिया जाये। मैं बड़े अदब से पूछना चाहता हूं कि क्या मुस्लिम, इसाई व यहूदी ‘यरुशलम’ विवाद के  मामले को न्यायालय के ऊपर  छोड़ने पर सहमत हो सकते हैं? यरुशलम को तीनों ही धर्मों के अनुयायी अपना-अपना पवित्र स्थल मानते हैं। वे पवित्र स्थल इसलिए मानते हैं क्योंकि उनकी धार्मिक पुस्तकें और अकीदा और आस्था बताते हैं कि उनके पैगम्बरों के यरुशलम से गहरे आध्यात्मिक सम्बन्ध रहे हैं। इसी वजह से सदियों से ये तीनों यरुशलम को लेकर आपस में भिड़ते आ रहे हैं मगर इसका फैसला किसी न्यायालय पर नहीं छोड़ना चाहते।
मगर देखिये हिन्दुओं की विशाल उदारता कि उनके विभिन्न धर्म शास्त्राें में काशी धाम का वर्णन होने के बावजूद वे पिछले साढ़े तीन सौ साल से औरंगजेब द्वारा किये गये पैशाचिक कृत्य की विभीषिका को अपने सीने पर ढो रहे हैं और मुसलमान भाइयों के साथ अपने सामाजिक रिश्ते पूरी सहृदयता और समरसता के साथ निभाते आ रहे हैं और काशी में अपनी ही छाती पर गाड़े गये शूल की पीड़ा सहते आ रहे हैं और न्यायालय में जाकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। ठीक एेसा ही मामला मथुरा में श्रीकृष्ण जन्म स्थान का भी है जहां लीलाधर श्री कृष्ण के जन्म स्थान को मुस्लिम आक्रान्ता शासकों ने जबर्दस्ती अपवित्र करके उसके एक हिस्से में जबरन मस्जिद तामीर कराई थी। हिन्दुओं की उदार व समावेशी संस्कृति का यह ऐसा  बेनजीर नमूना है जो दुनिया की किसी दूसरी सभ्यता में देखने को नहीं मिलता है।

काशी व मथुरा में जो मन्दिर तोड़ कर मस्जिद तामीर किये जाने के सबूत खुद ही बोल रहे हैं और बता रहे हैं कि मुस्लिम शासकों ने ऐसा  केवल इस देश के हिन्दुओं को अपना ताबेदार दिखाये जाने की गरज से किया और उनके सम्मान को रौंदने की गरज से किया वरना बाबा विश्वनाथ धाम के बराबर में जबरन मस्जिद तामीर करके कौन सा ‘सबाब’ कमाया जा रहा था लेकिन यह साढ़े तीन सौ साल पहले की इस्लामी सत्ता का अपना रुआब गालिब करने का एक तरीका था और हिन्दू रियाया को यह एहसास करना था कि अब उनके मुल्क के मालिक मुसलमान हैं। मगर दीनदार मुसलमान शासकों को भी यह इल्म था कि इस मुल्क के हिन्दुओं के साथ जमकर बेइंसाफी हुई है क्यों हिन्दोस्तान की सारी दौलत उन्हीं की है। इसी वजह से 1857 के स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान जब अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर को उत्तर भारत के बहुसंख्यक देशी राजे-रजवाड़ों ने ईस्ट इंडिया कम्पनी के खिलाफ बगावत करते हुए उसे हिन्दोस्तान का बादशाह घोषित किया तो उसने हिन्दू रजवाड़ों को अपने  विद्वान व देशभक्त वजीर मौलवी हजीमुल्ला के हाथों यह सन्देश भिजवाया कि काशी का पूरा विश्वनाथ धाम हिन्दुओं को सौंप दिया जायेगा। मौलवी हजीमुल्ला की वीर सावरकर ने अपनी पुस्तक ‘1857 का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम’ में जमकर तारीफ की है।

अतः आजकल विश्वनाथ धाम में बनी मस्जिद के पक्ष को लेकर जिस तरह मुस्लिम मुल्ला व उलेमा बांहे चढ़ा-चढ़ा कर विभिन्न टीवी चैनलों पर बहस कर रहे हैं उन्हें सबसे पहले ज्ञानवापी क्षेत्र की कैफियत के बारे में जानकारी होनी चाहिए। उनका ही यह फर्ज बनता है कि हिन्दोस्तानी मुसलमान होने की वजह से वे ज्ञानवापी क्षेत्र की हिन्दू शास्त्रों में गाई गई महिमा को देखते हुए इसे ससम्मान हिन्दुओं को लौटा दें और औरंगजेब को इस्लाम को दुश्मन घोषित करें क्योंकि औरंगजेब साढ़े तीन सौ साल पहले का आज की ‘आईएसआईएस का सरगना’ के अलावा और कुछ नहीं था। भारतीय मुसलमानों को पता होना चाहिए कि काशी का हिन्दू संस्कृति में वही स्थान है जो मुस्लिम संस्कृति या विश्वासों में ‘पवित्र मक्का’ का है। भाजपा नेता उमा भारती ने इस बारे में बहुत स्पष्ट रूप से कह दिया है कि काशी की पवित्रता से अब किसी भी प्रकार से समझौता नहीं किया जायेगा । काशी का प्रश्न सियासत का नहीं है बल्कि ‘शराफत’ का है और शराफत कहती है कि मजहब की बुनियाद पर 75 साल पहले भारत के दो टुकड़े कराने वालों को भारत को भीतर से टुकड़े-टुकड़े करने का कोई हक नहीं है क्योंकि भारत के संविधान ने सभी हिन्दू-मुसलमानों को एक समान अधिकार दिये हैं बल्कि हकीकतन मुस्लिम नागरिकों को फिर  उन्हें धार्मिक अधिकारों का ‘बोनस’ देकर ज्यादा ही कृपा की है अतः उन्हें भी भारत की उदार संस्कृति के रंग में रंग कर इसका मुरीद हो जाना चाहिए।

Friday, May 20, 2022

अमेरिका ने कभी भारत को गेहूं के लिए ‘भिखारियों की भूमि’ कहा था, आज भारत से गेहूं की भीख मांग रहा है!


गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारत सरकार की आलोचना की गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दुनिया भर के कई देशों ने सरकार के फैसले पर चिंता व्यक्त की है। हालांकि, भारत ने यह फैसला देश में गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लिया है।

अमेरिका गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध से खफा है। जर्मनी में जी -7 की बैठक में, अमेरिकी कृषि सचिव टॉम विल्सैक ने कहा कि यह गेहूं की पहुंच को रोक रहा है। उन्होंने इसे “गलत समय पर गलत कदम” कहा। “हमें एक ऐसे बाजार की आवश्यकता है जो जरूरतमंद लोगों तक सामान पहुंचाने में मदद करे,” विल्साक ने कहा।

भारत ने 13 मई को गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी थी। भारत ने यह प्रतिबंध ऐसे समय लगाया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध ने विश्व गेहूं की आपूर्ति को प्रभावित किया है। भारत दुनिया में गेहूं के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है। चीन के बाद भारत गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत ने 2021-22 में 1,113 लाख टन गेहूं का उत्पादन किया है।

अमेरिका ने गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के भारत के फैसले पर आज नाराजगी जताई, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब अमेरिका गेहूं के लिए भारत को धमका रहा था। उस समय भारत गेहूं के लिए अमेरिका पर निर्भर था। 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान, अमेरिका ने भारत को गेहूं की आपूर्ति नहीं करने की धमकी दी। इतना ही नहीं अमेरिका ने कभी भारत को ‘भिखारियों’ का देश कहा था।

अभिनेत्री ने बयां किया दर्द, कहा- 1 नही 2 नही बल्कि 14 लोगों ने किया शारीरिक शोषण


मलयालम इंडस्ट्री की जानी-मानी अदाकारा रेवती सम्पत (Revathy Sampath) ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से खुलासा किया है कि 14 लोगों ने उनका यौ”न शो”ष”ण किया है। रेवती सम्पत ने इन सभी लोगों के नाम पोस्ट के माध्यम से उजागर कर दिए हैं। रेवती सम्पत के द्वारा जारी की गई लिस्ट में कई बड़े एक्टर्स-डायरेक्टर्स के नाम शामिल हैं। रेवती की लिस्ट में कलाकार सिद्दिकी, डायरेक्टर राजेश टचरिलर और DYFI लीडरन नंदी अशोकन के नामों का भी जिक्र है।अभिनेत्री (Revathy Sampath) द्वारा किए गए इतने हैरान कर देने वाला खुलासे ने उनके फैंस को झकझोर कर रख दिया है. रेवती के इस खुलासे के बाद पूरी मलयालम इंडस्ट्री संदेह के घेरे में आ गई है.

15 जून, 2021 को मलयालम फिल्म इंडस्ट्री (Malayalam Film Industry) से जुड़े हुए लोग उस समय दं’ग रह गए, जब मशहूर अभिनेत्री रेवती संपत (Revathy Sampath) ने इंडस्ट्री के 14 लोगों पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए. रेवती ने एक फेसबुक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने उन 14 लोगों के नाम का खुलासा किया, जिसमें एक नाम मशहूर अभिनेता सिद्दीकी का भी शामिल है. अपने आरोपियों के नाम का खुलासा करते हुए रेवती ने फे”स”बुक पोस्ट में यह भी संकेत दिए कि उन्हें इसका कोई ड’र नहीं है कि वह अपने गुनहगारों का चेहरा मीडिया के सामने रख रही हैं.

यह लिस्ट बहुत बड़ी है, जिसमें कई नामी लोग शामिल हैं. रेवती के इस खुलासे ने फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है. फिलहाल, इन आरोपों पर उन 14 लोगों में से किसी की भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि, अभिनेत्री द्वारा किए गए इतने हैरान कर देने वाला खुलासे ने उनके फैंस को झकझोर कर रख दिया है. रेवती के इस खुलासे के बाद पूरी मलयालम इंडस्ट्री संदेह के घेरे में आ गई है. सोशल मीडिया यूजर्स ने फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की सु”रक्षा को लेकर चिंता जाहिर की और इस मामले पर अपना गुस्सा भी जाहिर किया.

अभिनेत्री के आरोपों से जुड़े पांच मुख्य बिंदु:- 1. अभिनेत्री ने अपने पोस्ट में यह भी बताया कि इन 14 लोगों ने उनका न केवल शारीरिक या यौ’न रूप से बल्कि भावनात्मक और मानसिक रूप से भी उत्पीड़न किया. रेवती ने इन लोगों को अपराधी करार दिया. 2. रेवती ने सिद्दीकी के अलावा इस लिस्ट में मशहूर निर्देशक राजेश का नाम भी लिखा है, जो कई नेशनल और स्टेट लेवल पर अपनी फिल्मों के लिए अवॉर्ड्स जीत चुके हैं. 3. रेवती ने इस लिस्ट में ने”ता नंदु अशोकण समेत पुलिस विभाग से लेकर कई प्रोफेशन से जुड़े लोगों का नाम दिया है, जिनमें एक डॉक्टर भी है. 4. अभिनेत्री के इस खुलासे के बाद उनके पोस्ट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. एक तरफ जहां कुछ लोगों ने उनके इस कदम को पब्लिसिटी स्टंट बताया, तो वहीं कुछ ऐसे भी नजर आए, जिन्होंने रेवती का खुलकर समर्थन किया. 5. अपने इस पोस्ट में रेवती ने एक आदमी की फोटो भी साझा की, जिसे उन्होंने अपना अब्यूजर बताया.

Thursday, May 19, 2022

अखिलेश यादव के विवादित बयान के बाद भाजपा नेताओं में रोष: प्रताप मिश्रा




ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के अपने एक बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर भाजपा नेताओं तक के निशाने पर पर आ गए हैं। दरअसल, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कह दिया कि ''हमारे हिन्दू धर्म में यह है कि पीपल के पेड़ के नीचे कहीं पर भी पत्थर रखकर उस पर लाल झंडा लगा दो वह मंदिर बन जाता है।'' अखिलेश यादव ने इससे भी बढकर एक बात और कह दी उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था कि रात के अंधेरे में मूर्तियां रख दी जाती थी। हालांकि उनके निशाने पर भाजपा थी पर इसका सीधा असर पूरे हिन्दू जनमानस पर पड़ा है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव को जमकर ट्रोल किया जा रहा है।

'समाज की ज्ञानवापी मस्जिद पर अखिलेश यादव क्यों चुप हैं'

दरअसल, विधानसभा चुनाव और उसके बाद आजम खां मामले पर अखिलेश यादव मुस्लिम समाज के निशाने पर है। उधर असद्दीन ओवैसी भी सवाल उठा चुके है कि समाजवादी पार्टी को 112 सीटे दिलाने वाले मुस्लिम समाज की ज्ञानवापी मस्जिद पर अखिलेश यादव क्यों चुप हैं।

माना जा रहा है कि अखिलेष यादव का यह बयान इन सब को देखते हुए ही आया है। उन्होंने योगी सरकार पर आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज को डराने के लिए बुलडोजर चलाया जा रहा है।ये बुलडोजर केवल धर्म जाति और हमारे मुसलमान भाईयों को डराने के लिए ही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास नफरत वाला कैंलेडर है जिसे वह पूरे साल चलाती हैं।

अखिलेश फिर जनता को ठगने की तैयारी कर रहे

अखिलेश यादव के इस बयान के बाद भाजपा भी हरकत में आ गयी हे। योगी सरकार के मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने उनके इस बयान को बचकाना बयान बताते हुए कहा कि न्यायपालिका का पालन हम सबको करना चाहिए। धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था आम जन से लेकर सत्ता और सत्ता से पालन करना चाहिए। जो भी हो रहा है न्यायप्रक्रिया के तहत हो रहा है। जबकि एक अन्य मंत्री नन्द गोपाल नन्दी ने कहा कि अखिले यादव एक बार फिर आजमगढ की जनता को ठगने की तैयारी कर रहे हैं। पहले वोट लिया फिर इस्तीफा दे दिया और अब जब उपचुनाव होने को है तो फिर से वहां पर शादी व्याह में पहुंचने लगे हैं।

बरेली में अतिक्रमण पर चला ‘पीला पंजा’, छाती पीट रोने लगे साधु- योगी भैया, तुमने तो हमारे ऊपर बुलडोजर चलवा दिया


Bulldozer, New Delhi, National News
अवैध निर्माण को ढहाता एक बुलडोजर। (फाइल फोटोः पीटीआई)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार अवैध कब्जों और गैरकानूनी निर्माणों के खिलाफ लगातार बुलडोजर चला रही है। इस दौरान कई लोगों ने प्रशासन पर भेदभाव करने का आरोप लगाया तो कई लोगों की शिकायत है कि उन्हें कोई पूर्व सूचना दिए बिना ही उनके निर्माणों को गिरा दिया जा रहा है। बरेली में अतिक्रमण हटाओ अभियान में कई निर्माण गिराए गए। इसी में एक साधु के आवास को भी गिरा दिया गया। इसके बाद पीले वस्त्रधारी साधु छाती पीट-पीट कर रोए। वे बोले- “योगी भैया, तुमने तो हमारे ऊपर बुलडोजर चलवा दिया।”

बरेली के बिचपुरी के रामगंगा नगर आवासीय योजना सेक्टर एक में करीब 100 मकानों पर बुलडोजर चलाकर 4 हेक्टेअर भूमि को कब्जा मुक्त कराया गया है। इस दौरान 100 करोड़ रुपए कीमत की भूमि से अतिक्रमण हटाया गया। तीन दिन से चल रहे अभियान में अधिकतर दो और तीन मंजिले वाले मकान गिराए गए। इन मकानों में 20 साल से लोग रह रहे थे। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने ऐसे 500 और मकान-दुकान चिह्नित किए हैं, जिस पर बुलडोजर चलाए जाने हैं।

भूमि पर अवैध निर्माण ढहाने पहुंची बीडीए की टीम के खिलाफ लोगों में जबर्दस्त गुस्सा था। मकानों को ढहा रहे बुलडोजर पर नाराज लोगों ने पत्थर फेंके। हालात बिगड़ने लगे तो सुरक्षाबलों ने लाठियां फटकार कर लोगों को नियंत्रित किया। अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक साधु के मकान को भी गिराए जाने के प्रशासन की कार्रवाई पर कई लोगों ने कमेंट किए हैं। पुन की बात@violent_tree नाम के यूजर ने कहा कि “योगी जी सेक्युलरिज्म का कड़ाई से पालन कराते हुए, सख्त प्रशासन इसे ही कहते है, साधुवाद।”

Wednesday, May 18, 2022

हजारों सालों से भारत की मिट्टी में दफन था दुनिया का सबसे बड़ा घड़ा, भरा जा सकता है 2 हजार लीटर पानी


खुदाई में मिले घड़े देख लोग भी हो गए हैरान

खुदाई में मिले घड़े देख लोग भी हो गए हैरान (इमेज- इंटरनेट)

गर्मियों का सीजन आ चुका है. समय के साथ तकनीक ने इतनी तरक्की कर ली है कि लोग गर्मियों को मात देने के कई तरीके अपनाने लगे हैं. अगर घर के अंदर हैं तो पंखे, कूलर और यहां तक की एयर कंडीशनर के सहारे गर्मी से बचा जा सकता है. बात अगर ठंडे पानी की करें, तो पहले के समय में गर्मियों में कुएं का ठंडा पानी लोगों को सुकून देता था. इसके बाद आई मिट्टी से बने घड़ों की बारी. अब तो फ्रिज के जरिये लोग गर्मी में भी बर्फीले पानी का मजा लेते हैं. लेकिन जो बात मिट्टी के घड़ों में थी, वो फ्रिज के बोतल के पानी में कहां?

आपने आजतक घरों या सड़कों के किनारे लगे प्याऊं में घड़े देखे होंगे. कुछ घटे मटके जैसे होते हैं तो कुछ सुराही. कोई छोटे होते हैं तो कुछ बड़े. कुछ घड़ों में तो अब नल भी लगे आते हैं ताकि पानी निकालने में आसानी हो. लेकिन आज हम आपको जिस घड़े के बारे में बताने जा रहे हैं, वो दुनिया का सबसे बड़ा घड़ा है. जी हां, इस घड़े का आकार इतना बड़ा है कि इसके अंदर दो लीटर तक पानी भरा जा सकता है. लेकिन ये घड़ा आज के दौर का नहीं है. ये घड़े अब से हजारों साल पहले मौजदू थे. खुदाई के दौरान इन्हें बाहर निकाला गया. लोग इतने बड़े घड़े को देखकर हैरान हो गए. एक घड़े का आकार आम घरों में लगी पानी की टंकी के बराबर था.

टैंकर के साइज के घड़े
आपको लग रहा होगा कि टैंकर के साइज के घड़े हो ही नहीं सकते हैं. लेकिन हम मजाक नहीं कर रहे हैं. इतना बड़ा घड़ा आज भी उत्तर प्रदेश के कन्नौज में बने एक म्यूजियम में रखा हुआ है. इसे दुनिया का सबसे बड़ा घड़ा कहा जाता है. इसके अंदर दो हजार लीटर तक पानी भरा जा सकता है. ये आज के दौर में नहीं बना है. इतिहासकारों के मुताबिक़, ये घड़ा करीब दो हजार साल पुराना है. उस समय मौजूद कुषाण वंश में ऐसे घड़ों में पानी स्टोर किया जाता था ताकि वो ठंडे रहे.

हजारों साल से मिट्टी में थे दफ़न
कुषाण वंश के ये घड़े करीब चालीस साल पहले खुदाई में निकले थे. जब इनकी उम्र पर शोध किया गया तो पता चला कि ये 78 ई से 230 ई के बीच के हैं. जिस एरिया में ये घड़े मिले, उसके पास से गंगा नदी गुजरती थी. उसी का पानी इन घड़ों ेमिन स्टोर किया जाता था. खुदाई में कुषाण वंश के दौरान इस्तेमाल कई तरह के बर्तन मिले थे. लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान इन विशाल घड़ों ने खींचा था. इन घड़ों को संभाल कर कन्नौज में बने म्यूजियम में रखा गया है. जो भी यहां इन घड़ों को देखता है हैरान रह जाता है.

चीन से मुकाबला करने को भारत अरुणाचल में बनाएगा दूसरा सबसे बड़ा बांध

ब्रह्मपुत्र नदी की धारा को अपनी ओर मोड़ने की योजनाओं पर लगातार काम कर रहा है चीन, चीन के प्रयासों से जल सुरक्षा सुनिश्चित

ब्रह्मपुत्र नदी

ब्रह्मपुत्र नदी की धारा को अपनी ओर मोड़ने की योजनाओं पर लगातार काम कर रहा है चीन, चीन के प्रयासों से जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और बाढ़ को कम करने में मदद मिलेगी

ब्रह्मपुत्र नदी की धारा को अपनी ओर मोड़ने की योजनाओं पर लगातार काम कर रहा है। इसी का मुकाबला करने के लिए भारत पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र नदी पर दूसरा सबसे बड़ा बांध बनाने की योजना बना रहा है। लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रस्तावित बांध से भारत को तिब्बत में नदी पर बांध बनाने के चीन के प्रयासों से जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और बाढ़ को कम करने में मदद मिलेगी।

केंद्र सरकार अरुणाचल प्रदेश के यिंगकिओंग में ब्रह्मपुत्र नदी पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा बांध बनाने की योजना बना रही है। लगभग 50 हजार करोड़ की लागत से बनने वाला यह प्रस्तावित जलाशय लगभग 10 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी का भंडारण करेगा। भारत ने यह फैसला ब्रह्मपुत्र नदी (चीन में यारलुंग त्सांगपो) पर विशाल बांधों के निर्माण की चीनी योजनाओं का मुकाबला करने के लिए किया है।

ब्रह्मपुत्र नदी की कुल लंबाई 2,880 किमी. है, जिसमें से 918 किमी. भारत में बहती है। नदी में बहने वाले पानी का 75 प्रतिशत हिस्सा भारत के जलग्रहण क्षेत्रों से आता है। साथ ही गैर-मानसून मौसम में पानी का बड़ा हिस्सा तिब्बत में बर्फ पिघलने से नदी को मिलता है। ब्रह्मपुत्र में नदी के पानी को स्टोर या डायवर्ट करने का चीनी प्रयास भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र और बांग्लादेश की जल सुरक्षा को चुनौती दे सकता है।

केंद्र सरकार ब्रह्मपुत्र नदी में पानी के भीतर रणनीतिक महत्व की 15.6 किलोमीटर लंबी जुड़वां सड़क सुरंग बनाने जा रही है। लगभग 12,807 करोड़ रुपये लागत वाले इस प्रोजेक्ट से न केवल असम राज्य के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की सुरक्षा होगी बल्कि इस सुरंग के जरिए अरुणाचल प्रदेश की कनेक्टिविटी देश के अन्य हिस्सों से और मजबूत हो सकेगी।

सरकार का अनुमान है कि अरुणाचल के ऊपरी इलाकों में बांध निर्माण से बाढ़ के प्रभाव और चीन की इसे प्रेरित करने की क्षमता कम हो जाएगी। अरुणाचल प्रदेश के यिंगकिओंग में बांध निर्माण से पनबिजली उत्पादन के अलावा जल सुरक्षा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पानी को बारिश के मौसम में संग्रहित करके और जरूरत के समय छोड़ा जा सकता है।

ब्रह्मपुत्र नदी में 500 बीसीएम (अरब घन मीटर) पानी बह रहा है, जिसमें से 75 प्रतिशत से अधिक पानी भारत के जलग्रहण क्षेत्र से आता है। गैर-मानसून के मौसम में जब बर्फ के पिघलने से नदी को पानी मिलता है, तो भारत के जलग्रहण क्षेत्र में पानी नहीं होता है। इसलिए अगर वे गैर-मानसून मौसम में बांध बनाते हैं और पानी को डायवर्ट करते हैं तो इसका असर अरुणाचल प्रदेश से बांग्लादेश पर पड़ेगा।

ब्रह्मपुत्र नदी पर चीनी बांध बन जाने के बाद भारत, बांग्लादेश समेत कई पड़ोसी देशों को सूखे और बाढ़ दोनों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि चीन अपनी मनमर्जी से कभी भी बांध का पानी रोक सकता है या बांध के दरवाजे खोल सकता है। ऐसी स्थिति में भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में जल की आपूर्ति भी बाधित हो सकती है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ब्रह्मपुत्र नदी में पानी के भीतर रणनीतिक महत्व की 15.6 किलोमीटर लंबी जुड़वां सड़क सुरंग बनाने जा रही है। लगभग 12,807 करोड़ रुपये लागत वाले इस प्रोजेक्ट से न केवल असम राज्य के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की सुरक्षा होगी बल्कि इस सुरंग के जरिए अरुणाचल प्रदेश की कनेक्टिविटी देश के अन्य हिस्सों से और मजबूत हो सकेगी।

परम तत्व दर्शन