'आदिपुरुष' के मेकर्स की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। टीजर के जारी होने के बाद से ही फिल्म निर्माताओं को पहले आलोचना, फिर ट्रोलिंग और अब फिल्म पर रोक लगाने वाली याचिका का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली की एक अदालत में फिल्म 'आदिपुरुष' की रिलीज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म में भगवान राम और हनुमान का गलत चित्रण किया गया है।
उत्तर प्रदेश में दर्ज हुई शिकायत
दिल्ली में याचिका दायर होने से पहले उत्तर प्रदेश में सैफ अली खान, कृति सेनन अभिनीत फिल्म 'आदिपुरुष' के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई थी। लखनऊ में एक वकील ने फिल्म के अभिनेताओं और निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। प्राप्त जानकारी के मुताबिक लखनऊ के एक वकील प्रमोद पांडे ने गुरुवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के पास सैफ अली खान, प्रभास राघव, कृति सेनन, निर्माता-निर्देशक ओम राउत और भूषण कुमार को एक पक्ष बनाते हुए उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि हिंदू देवताओं, विशेष रूप से हनुमान और राम के चरित्रों को गलत तरीके से चित्रित करने के लिए सितारों और फिल्म निर्माताओं के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 153 (3) के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
2020 में भी सैफ अली खान के खिलाफ दर्ज हुआ था मामला
दो साल पहले भी सैफ अली खान के खिलाफ उनके एक बयान की वजह से मामला दर्ज हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिविल कोर्ट के अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव ने उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) की अदालत में याचिका दायर की थी। जिसके बाद में सैफ अली खान ने माफी मांगी थी और अपने बयान को वापस भी लिया था।
सैफ ने क्या कहा था?
हिमांशु का कहना था कि भगवान राम को अच्छाई का और रावण को बुराई का प्रतीक माना गया है। इसी सिलसिले में हर साल विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। 'आदिपुरुष' नामक फिल्म भगवान राम पर बन रही है जिसमें अभिनेता सैफ अली खान, रावण का किरदार निभा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि 6 दिसंबर, 2020 को सैफ अली खान ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा था कि ''चूंकि लक्ष्मण ने रावण की बहन सूर्पनखा की नाक काट दी थी, इसलिए यह जायज था कि रावण ने सीता का हरण किया।'' सैफ ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि इस फिल्म के जरिए "रावण के परोपकारी और मानवीय पक्ष को पेश किया जाएगा।"
Saturday, October 8, 2022
'आदिपुरुष' की रिलीज पर रोक लगवाने के लिए दिल्ली में याचिका दायर
भारत ने मतदान में भाग न लेकर दिया बड़ा संदेश, कश्मीर मुद्दे से दूर रहे चीन
संयुक्त राष्ट्र में चीन के शिनजियांग से जुड़े बहस प्रस्ताव पर मतदान न करने को लेकर हो रही सरकार की आलोचनाओं के बीच विशेषज्ञ इसे पड़ोसी को कश्मीर पर संदेश देने और अपने हितों की रक्षा करने वाली कूटनीति का हिस्सा मान रहे हैं।
विदेश मामलों के जानकारों के मुताबिक, शिनजियांग में मानवाधिकार पर मतदान से भारत की दूरी बहुत स्वाभाविक है और वह इस मुद्दे के लिए दूसरा दृष्टिकोण अपना रहा है। इसके तहत चीन को संदेश दिया जा रहा है कि जैसे नई दिल्ली देश विशेष के लिए आए प्रस्ताव से खुद को दूर रख रही है, वैसा ही रुख पड़ोसी को कश्मीर मुद्दे पर अपनाना चाहिए।
आईडीएसए में एसोसिएट फेलो और चीन विषयों की जानकार एमएस प्रतिभा कहती हैं, भारतीय विदेश नीति के इतिहास को देखें तो उसने कई बार देश विशेष को निशाना बनाने वाले बहस प्रस्तावों पर मतदान से खुद को दूर रखा है। यह हमारी विदेश नीति का स्वाभाविक गुण है और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में चीन को लेकर भी नई दिल्ली ने ऐसा ही किया है। इसका यह मतलब कतई नहीं है कि भारत चीन का समर्थन कर रहा है।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में चीनी अध्ययन विभाग में प्रोफेसर श्रीकांत कोंडापल्ली ने भारत की अनुपस्थिति को अपने हितों के तहत उठाया गया कदम करार दिया है। उन्होंने कहा, सरकार ने चीन को दर्शाया है कि वह भी कश्मीर के मामले में दखल देना बंद करे। 2019 व 2020 में ड्रैगन कश्मीर पर अनौपचारिक चर्चा का मुद्दा सुरक्षा परिषद में लेकर आया था, लेकिन वह खारिज हो गया था। भारत ने चीन को संदेश दिया है वह उसके आंतरिक मामलों से भी दूरी बनाकर रखे।
बता दें, शिनजियांग के उइगर मुस्लिमों पर यूएनएचआरसी में आया मसौदा प्रस्ताव खारिज हो गया। 47 सदस्यीय परिषद में 17 ने इसके पक्ष में तो 19 ने विपक्ष में मतदान किया और भारत, ब्राजील, मैक्सिको और यूक्रेन समेत 11 देश अनुपस्थित रहे। दिलचस्प बात यह रही कि चीन के बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव में आने वाले सोमालिया जैसे देशों ने चर्चा के पक्ष में मतदान किया।
अमेरिका का जाग रहा पाकिस्तान के लिए प्यार, Pok को लेकर दिया आपत्तिजनक बयान, भारत ने दिखाया आईना
अमेरिका(USA) एक बार फिर पाकिस्तान(Pakistan) के करीब आता नजर आ रहा है। हाल ही में पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लोम ने गुलाम ने कश्मीर को लेकर विवादित बयान दिया। इससे पहले पाकिस्तान को लड़ाकू विमान एफ-16 के रखरखाव के नाम पर मदद देने की अमेरिकी रणनीति पर सवाल उठना लाजिमी है। जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद पाकिस्तान को लेकर अमेरिका के नजरिए में ये 360 डिग्री का बदलाव किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है!
अगर बात करें डोनाल्ड ट्रंप के शासन काल की तो पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्ते बेहद खराब दौर से गुजरे, ऐसे में इसमें कोई दो राय नहीं होगी। रिश्ते इतने बिगड़ गए थे कि ट्रंप ने पाकिस्तान को दीए जाने वाले लाखों डॉलर की मदद पर रोक लगा दी थी और कड़े शब्दों में कहा था कि पाकिस्तान, आतंकवादियों की पनाहगाह बन चुका है। पाकिस्तान जब तक आतंकवाद के खिलाफ ईमानदारी से नहीं लड़ता है, तब तक उसे अमेरिका की ओर से कोई मदद नहीं दी जाएगी। ऐसे में पाकिस्तान का भी चीन के प्रति झुकाव बढ़ गया था। हालांकि अब जो बाइडन के सत्ता में आते ही अमेरिका के ख्यालात पाकिस्तान को लेकर बदले-बदले नजर आ रहे हैं।
अमेरिकी राजदूत का PoK दौरा और विवादित बयान…!
पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लोम ने इस सप्ताह गुलाम कश्मीर की यात्रा की थी। उन्होंने इस पूरे क्षेत्र को लेकर विवादित बयान दिया था। पूरा कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन अमेरिकी दूत शायद इस बात को भूल गए या फिर किसी रणनीति के तहत उन्होंने ऐसा कहा ये बड़ा सवाल है? हालांकि, इससे पहले अमेरिका की ओर से ऐसा बयान शायद ही कभी सुनने को मिला था।
नया नहीं है डेमोक्रेटिक पार्टी का ‘पाक प्रेम’
राष्ट्रपति जो बाइडन डेमोक्रेटिक पार्टी से आते हैं। इतिहास इस बात का गवाह है कि पाकिस्तान के प्रति डेमोक्रेटिक पार्टी का रुख हमेशा से नर्म रहा है। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी से थे। रिपब्लिकन पार्टी के निशाने पर हमेशा पाकिस्तान रहा है। इसलिए जब-जब अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी की सरकार रही, भारत के साथ उसके मधुर संबंध रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच रहे दोस्ताना संबंध इसके गवाह रहे हैं।
भारत ने दिखाया अमेरिका को आईना
अमेरिका कह रहा है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहा है। पाकिस्तान का साथ भी वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए दे रहा है। अमेरिका के इस दोहरे रवैये से भारत ने हाल ही में पर्दा हटाने का काम किया। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि अमेरिका किसे बेवकूफ बना रहा है? यह सभी को नजर आ रहा है कि अमेरिका कैसे पाकिस्तान का समर्थन कर रहा है।
भारत की पिछले कुछ सालों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थिति मजबूत हुई हैं। कोरोना महामारी के दौरान जैसे भारत ने अन्य देशों की मदद की, उसे पूरे विश्व ने सराहा। भारत अब अपनी बात अंतरराष्ट्रीय मंच पर पुख्ता तरीके से रखने लगा है, फिर चाहे सामने रूस हो या अमेरिका। ऐसे में लगता है कि अमेरिका ने भी नई रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।
Thursday, October 6, 2022
उत्तर कोरिया ने दागी बैलेस्टिक मिसाइल, भारत का जवाब जानकार चौंक गया किम जोंग उन
उत्तर कोरिया के मिसाइल लॉन्च के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के साथ आते हुए भारत ने कहा कि हम इस मिसाइल लॉन्च की कड़ी निंदा करते हैं. इस तरह के बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च से उस क्षेत्र के साथ-साथ वैश्विक शांति और सुरक्षा पर प्रभाव पड़ेगा. संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने बुधवार को डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया को लेकर सुरक्षा परिषद के बैठक में कहा कि उत्तर कोरिया द्वारा बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण की चिंताजनक खबरें हमारे संज्ञान में है. उत्तर कोरिया ने इससे पहले भी मार्च में बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की थी जिसको लेकर काउंसिल ने विस्तार से चर्चा की थी.
संयुक्त राष्ट्र की ब्रांड एंबेसडर लिंडा थोमस ग्रीनफील्ड ने अल्बानिया, ब्राजील, फ्रांस, इंडिया, आयरलैंड, जापान, नार्वे, दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब आमीरात, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका की ओर से संयुक्त बयान जारी किया गया. बयान में कहा गया है कि चार अक्टूबर को डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया की ओर से लॉन्च की गई बैलिस्टिक मिसाइल जापान के ऊपर से गुजरी है, हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं. बयान के अनुसार 25 सितंबर के बाद से उत्तर कोरिया सात बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण कर चुका है. सिर्फ इस साल उत्तर कोरिया 35 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण कर चुका है.
संयुक्त बयान में कहा गया है कि इस तरह के मिसाइल परीक्षण सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन है. ये सिर्फ उस क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व समुदाय की सुरक्षा और शांति के लिए खतरा है. 11 देशों ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि उत्तर कोरिया ने अप्रैल और सितंबर में अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे, जब उसके नेता ने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों में तेजी लाने का संकेत दिया था. अमेरिकी राजदूत ने कहा कि संयुक्त बयान में शामिल सभी देश कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध हैं और उत्तर कोरिया से बातचीत पर लौटने की अपील करते हैं. थॉमस ग्रीनफील्ड ने कहा अगर उत्तर कोरिया वैश्विक व्यवस्था को कमजोर करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को धमकी देने का काम करता रहेगा तो हम चुप नहीं रहेंगे. ग्रीनफील्ड ने सदस्य देशों से सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को पूरी तरह से लागू करने का आह्वान किया गया है.
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटिनियो गुटेरस ने कड़ी निंदा करते हुए कहा कि, उत्तर कोरिया का यह प्रक्षेपण सुरक्षा प्रस्तावों का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया द्वारा अंतरराष्ट्रीय उड़ान या समुद्री सुरक्षा के लिए किसी भी प्रकार से विचार नहीं करना गंभीर चिंता का विषय है. गुटेरस ने कोरियाई द्वीप में शांति स्थापित करने के लिए उत्तर कोरिया से कूटनीति स्तर से बातचीत करने का आग्रह किया.
कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और सुरक्षा की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भारतीय प्रतिनिधि कंबोज ने कहा, कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारे सामूहिक हित में है. हम कोरियाई प्रायद्वीप में मुद्दों को हल करने के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन जारी रखेंगे. संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा, इस तरह के मिसाइल लॉन्च सुरक्षा परिषद द्वारा डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया से संबंधित प्रस्तावों का उल्लंघन है. भारत सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों पर अमल करने पर जोर देता है. इस तरह के प्रक्षेपण भारत समेत विश्व की सुरक्षा और शांति को प्रभावित करते हैं. कंबोज ने कहा पूरा दक्षिण क्षेत्र पहले से ही मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति और संबंधित चुनौतियों से प्रभावित है. इसलिए शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी प्रयास जारी रखना महत्वपूर्ण है.
Wednesday, October 5, 2022
आदिवासी समाज की मांग, पूरे देश में बैन हो रावण दहन, राष्ट्रपति को लिखा पत्र
जहां एक ओर आज पूरा देश असत्य पर सत्य की जीत का त्योहार दशहरा रावण दहन करके मना रहा है.
ओपी तिवारी/सूरजपुर: जहां एक ओर आज पूरा देश असत्य पर सत्य की जीत का त्योहार दशहरा रावण दहन करके मना रहा है. वहीं सूरजपुर जिले का एक तबका पिछले कई वर्षों से रावण दहन का विरोध कर रहा है और इस परंपरा को बंद करने के लिए कलेक्टर से लेकर राष्ट्रपति तक लिखित मांग कर चुका है.
दरअसल सूरजपुर जिला आदिवासी बहुल जिला है. यहां के आदिवासी अपनी अलग रीति-रिवाज और परंपरा के लिए जाने जाते हैं. जिले में एक आदिवासी वर्ग ऐसे भी हैं, जो रावण को अपना इष्ट देवता मानते हैं और उसकी पूजा करते हैं. यही वजह है कि यह समाज पिछले कई सालों से रावण दहन का विरोध कर रहा है और कलेक्टर, राज्यपाल और राष्ट्रपति तक से लिखित ज्ञापन सौंपकर पूरे देश में रावण दहन की परंपरा को बंद करने की मांग की है.
विश्व के सबसे बड़े ज्ञानी थे
आदिवासियों की मानें तो उनके अनुसार रावण उनका इष्ट देवता होने के साथ विश्व के सबसे बड़े ज्ञानी भी है. वे रावण दहन के विरोध पर संविधान के अनुच्छेद 153 और 198 की भी बात करते हैं. उनके अनुसार इस अनुच्छेद में यह साफ तौर पर लिखा गया है कि हर व्यक्ति को अपने परंपरा के अनुसार अपना धर्म मानने की आजादी है. यह आदिवासी समाज पिछले कई वर्षों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग कर रहा है लेकिन मांग ना पूरी होने की स्थिति में अब वह आंदोलन की बात कर रहे हैं.
आदिवासियों को बहलाया
वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार सभी आदिवासी रावण दहन का विरोध नहीं करते हैं, बल्कि कुछ अज्ञानी लोग हैं जो अपना निजी स्वार्थ साधने के लिए भोले-भाले आदिवासियों को बहला-फुसलाकर गुमराह कर रहे हैं.
बता दें कि धर्म एवं परंपरा को लेकर बहस कोई नई बात नहीं है, लेकिन इन आदिवासी समूहों के द्वारा रावण दहन पर पाबंदी की मांग ने एक नई बहस की शुरुआत कर दी है।
Monday, October 3, 2022
आस मोहम्मद नाम बदलकर मंदिर में घुसा, महामंडलेश्वर की हत्या की साजिश नाकाम!
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में बेहद गंभीर मामला सामने आ रहा है। यहां एक विशेष संप्रदाय का युवक नाम बदलकर मंदिर में घुसा और पिस्टल, चाकू व कटर के साथ पकड़ा गया।
दिल्ली (Delhi) से सटे गाजियाबाद (Ghaziabad) में बेहद गंभीर मामला सामने आ रहा है। यहां एक विशेष संप्रदाय का युवक नाम बदलकर मंदिर में घुसा और हथियारों के साथ पकड़ा (Caught With Weapons) गया। उसके पास से पिस्टल और तेजधार हथियार बरामद किए गए हैं। महामंडलेश्वर का आरोप है कि आरोपी उनकी हत्या (Murder) करना चाहता था। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर एटीएस (ATS) ओर आईबी (IB) को पूरे मामले से अवगत करा दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक थाना मसूरी इलाके में स्थित इकला मंदिर में महामंडलेश्वर स्वामी प्रबुद्ध आनंद गिरि जी मौजूद थे। इस दौरान सेवादारों ने एक संदिग्ध युवक को देखा। जब उसका नाम पूछा गया तो उसने अपना नाम समीर बताया। जब सेवादारों ने उसकी तलाशी ली तो उसके पास से पिस्टल, चाकू और कटर आदि बरामद हुआ। यह देखते ही मंदिर परिर में हड़कंप मच गया।
सेवादारों ने जब उससे सख्ती से पूछताछ की तो उसने अपना नाम आस मोहम्मद बताया। सेवादारों ने तुरंत पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची, जहां महामंडलेश्वर आनंद गिरी जी ने कहा कि इस संदिग्ध युवक ने बताया कि उसने एक लाख रुपये में महामंडलेश्वर की सुपारी ली थी। उन्होंने कहा कि उन पर पहले भी हत्या प्रयास किया जा चुका है। गनीमत रही कि मंदिर में मौजूद सेवादारों ने उस युवक को पकड़ लिया। पुलिस ने आरोपी आस मोहम्मद को हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। साथ ही एटीएस और आईबी को भी पूरी घटना की जानकारी दे दी गई है।
Saturday, October 1, 2022
केरल में PFI के निशाने पर थे संघ के पांच नेता, केंद्र देगा 'वाई' श्रेणी की सुरक्षा
PFI की हिट लिस्ट में 5 आरएसएस नेताओं के नाम, मिलेगी Y श्रेणी सुरक्षा
नई दिल्ली: पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के बाद रोज नए खुलासे हो रहे हैं। हाल ही में एनआईए और आईबी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी है जिससे पता चला है कि केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पांच बड़े नेता पीएफआई के निशाने पर थे।
बीते 21 सितंबर की रात सुरक्षा एजेंसियों ने देश भर में पीएफआई के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके बाद पीएफआई के सदस्य मोहम्मद बशीर के ठिकाने से एनआईए को आरएसएस नेताओं की सूची मिली थी जिसमें 5 नेताओं को जान से मारने का उल्लेख था। केरल में संघ के जिन नेताओं को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जान का खतरा था उन्हें अब गृह मंत्रालय ने Y कैटेगरी की सुरक्षा दी है। अब इन नेताओं की सुरक्षा में आठ सुरक्षा कर्मी 24 घंटे तैनात रहेंगे। ये सुरक्षा कर्मी तीन शिफ्ट में संघ के नेताओं को सुरक्षा देंगे।
बता दें कि केंद्र सरकार ने पीएफआई पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगाया है। इस संगठन पर कथित रूप से आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकी संगठनों के साथ संपर्क रखने और देश में सांप्रदायिक नफरत फैलाने की कोशिश का आरोप है। एनआईए, ईडी और राज्यों की पुलिस ने मिलकर देशभर में पीएफआई के ठिकानों पर 21 सितंबर की रात और 27 सितंबर को छापेमारी की थी। इस दौरान करीब 350 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों को छापे के दौरान PFI के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले थे। इसके आधार पर गृह मंत्रालय ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया। केंद्र सरकार ने यूएपीए के तहत पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और उससे जुड़े कुल नौ संगठनों को "गैरकानूनी" घोषित किया है।
पीएम मोदी भी थे पीएफआई के निशाने पर
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के निशाने पर सिर्फ संघ के नेता ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी भी थे। इस साल जुलाई में बिहार की राजधानी पटना में पीएफआई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। इसके लिए संगठन ने पटना में ट्रेनिंग कैंप भी लगाया था और कई सदस्यों को ट्रेनिंग देने का काम किया। कर्नाटक, केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में अच्छी खासी पकड़ रखने वाले इस संगठन ने हवाला के जरिए विदेशों से पैसे भी जुटाए थे।
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पैगंबर मोहम्मद पर नूपुर शर्मा की विवादित टिप्पणी के खिलाफ जुमे की नमाज के बाद हुई विभिन्न इलाकों में हिंसा पर जमात-ए-उलेमा हिंद ने असदुद्दीन...
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सरकार की तरफ से कहा गया कि एन-95 मास्क कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अपनाए गए कदमों के विपरीत है. नई दिल्ली: केंद्र ने सभी राज्यों...