Tuesday, November 8, 2022

‘राजधानी कीव छोड़ने की करें तैयारी’, रूसी हमले तेज होने पर यूक्रेन के राष्ट्रपति ने किया आगाह

रूसी न्यूज एजेंसियों ने खबर दी है कि यूक्रेन ने खेरसॉन की निप्रो नदी पर बने नोवा काखोव्का बांध पर जमकर गोलाबारी की। इससे बांध को काफी नुकसान पहुंचा है। अमेरिका में बने हिमार्स मिसाइल सिस्टम से ये हमला किया गया। बांध से काफी मात्रा में पानी लगातार बह रहा है। हमले के बाद रूस ने अपने एयर डिफेंस चौकस कर दिया है।

volodymyr zelensky

कीव। रूस और यूक्रेन की जंग गंभीर रुख अपनाती दिख रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलिंस्की ने राजधानी कीव के नागरिकों को घर छोड़कर जाने के लिए तैयार रहने को कहा है। इससे पहले रूस ने खेरसॉन के नागरिकों से शहर छोड़कर चले जाने को कहा था। जेलिंस्की की ताजा चेतावनी से साफ है कि रूस अब 8 महीने पुरानी जंग में अपने हमले तेज करने जा रहा है। रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। पिछले महीने से उसने यूक्रेन की राजधानी कीव समेत अन्य शहरों पर मिसाइलों की बारिश शुरू कर दी है। ईरान से मिले ड्रोन से भी रूस लगातार यूक्रेन की फौज को निशाना बना रहा है।

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जेलिंस्की ने कहा है कि रूस अब यूक्रेन के ऊर्जा क्षेत्र को खत्म करने में जुट गया है। बिजली और पानी की सप्लाई से 40 लाख लोग महरूम हो गए हैं। रूस के हमलों में और तेजी आ सकती है। ऐसे में राजधानी कीव के लोग घर छोड़ने के लिए तैयारी रखें। जेलिंस्की ने कहा कि रूस का अब निशाना ऊर्जा के ढांचे पर है। सर्दियां शुरू हो गई हैं और बिजली के बगैर लोगों का रहना मुश्किल होगा। जेलिंस्की ने कहा है कि यूक्रेन इन सबके बावजूद मैदान में डटा रहेगा। उन्होंने कहा कि किसी सूरत में हम रूस को अपने देश पर काबिज होने नहीं देंगे।

ukraine

वहीं, रूसी न्यूज एजेंसियों ने खबर दी है कि यूक्रेन ने खेरसॉन की निप्रो नदी पर बने नोवा काखोव्का बांध पर जमकर गोलाबारी की। इससे बांध को काफी नुकसान पहुंचा है। अमेरिका में बने हिमार्स मिसाइल सिस्टम से ये हमला किया गया। बांध से काफी मात्रा में पानी लगातार बह रहा है। इस हमले के बाद रूस ने अपने एयर डिफेंस को और चौकस कर दिया है। रूस ने आरोप लगाया है कि यूक्रेन अब बांध तोड़कर मानवीय तबाही लाना चाहता है। रूस ने इसके साथ ही चेतावनी दी है कि ऐसी किसी भी कोशिश पर यूक्रेन को बड़े पैमाने पर जवाब मिलेगा।

Thursday, November 3, 2022

मुस्लिम पर्सनल लॉ को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाय: प्रताप मिश्रा

भारतीय अदालतें मुस्लिम पर्सनल लॉ सहित दशकों पुराने कानूनों की व्याख्या करने में खुद को असमर्थ पाती हैं। 15 साल से अधिक उम्र की मुस्लिम लड़कियां शादी कर सकती हैं; पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने शरिया कानून का हवाला देते हुए कहा कि यह बाल विवाह निषेध अधिनियम का उल्लंघन नहीं करेगा।

हालांकि, केरल उच्च न्यायालय ने कहा कि अदालतें मुस्लिम मौलवियों पर भरोसा नहीं कर सकती हैं, जिनके पास मामलों का फैसला करने के लिए कोई कानूनी प्रशिक्षण नहीं है। अदालतें मुस्लिम विद्वान द्वारा दी गई राय का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं। और उससे पहले भी, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि पॉस्को मुस्लिम पर्सनल लॉ से आगे निकल जाता है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ खत्म करो

मुस्लिम पर्सनल लॉ और शरिया की व्याख्या में कानूनी विद्वानों के बीच मतभेद समाज में बहुत अधिक घर्षण पैदा कर रहे हैं जिससे विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। सरकार पहले से ही महिलाओं की शादी की उम्र को पुरुषों के बराबर करने के लिए 21 साल करने पर विचार कर रही है।

यदि सरकार इसे लागू करती है, तो यह मुस्लिम लड़कियों और हिंदू लड़कियों की विवाह योग्य उम्र के बीच उम्र के अंतर को और बढ़ा देगी (संविधान के अनुसार, हिंदू में सिख, जैन और बौद्ध शामिल हैं – भारतीय धर्म)।

सबसे अच्छा आह्वान यह होगा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के साथ-साथ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को भी खत्म कर दिया जाए और नागरिकों की कानूनी स्थिति में समानता ला दी जाए। न्याय की देवी ने अपनी आँखें बंद कर ली हैं ताकि वह अपने धर्म के आधार पर लोगों के बीच अंतर न कर सकें, लेकिन भारतीय न्याय प्रणाली सात दशकों से अधिक समय से ऐसा ही कर रही है।

तीन तलाक के सफल कानून ने प्रतिगामी प्रथाओं और पूरी तरह से धार्मिक प्रतिबंधों पर आधारित असमान कानूनों के खिलाफ सरकारी कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त किया है। मुस्लिम पर्सनल लॉ की अवधारणा एक असमान कानून का एक ऐसा उदाहरण है जो भारतीय संविधान की कानून के तहत समानता की धारणा की भावना के विपरीत है। ऐसे कई मुद्दे हैं जहां तथाकथित अल्पसंख्यक समुदाय के लिए कानून अलग है लेकिन “मुस्लिम पर्सनल लॉ” के नाम पर संरक्षित है।

मुस्लिम महिलाओं के लिए विरासत कानून एक और क्षेत्र है जहां इस्लाम में पुरुषों के संबंध में महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है। पूर्वज की मृत्यु की स्थिति में, मुस्लिम महिलाएं अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में विरासत के केवल आधे हिस्से की हकदार हैं, जो न केवल लिंग के आधार पर भेदभावपूर्ण है, बल्कि मुस्लिम महिलाओं की तुलना में नुकसान में भी है। उनके पुरुष भाई-बहन।

मृत पति या पत्नी से विरासत में मिली संपत्ति के मामलों में भी महिलाओं को नुकसान होता है। उदाहरण के लिए, एक पत्नी उस मामले में हिस्सेदारी का 1/4 हिस्सा लेती है जहां दंपति बिना वंशज वंशज हैं और एक-आठवां हिस्सा अन्यथा। एक पति (पत्नी की संपत्ति के उत्तराधिकार के मामले में) उस मामले में 12 हिस्सा लेता है जहां युगल वंश के बिना है और 14 हिस्सा अन्यथा। मूल रूप से, यहां भी, एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना की स्थिति में एक व्यक्ति विरासत के अधिक हिस्से का हकदार है।

मुस्लिम महिलाएं केवल इद्दत (नौ महीने) की अवधि के दौरान गुजारा भत्ता की हकदार हैं, जिसके दौरान तलाक को अंतिम रूप दिया जाता है, लेकिन ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो इस इद्दत की अवधि के समाप्त होने के बाद उसके लिए सुरक्षा जाल प्रदान करता हो। फिर भी, सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न अवसरों पर यह माना है कि मुस्लिम महिलाओं को इद्दत अवधि के बाद गुजारा भत्ता प्राप्त करने का अधिकार है।

निकाह हलाला जैसी कई प्रथाएं भी आज तक मुस्लिम महिलाओं की गरिमा को बनाए रखती हैं और उन्हें अपमानित करती हैं और तत्काल ट्रिपल तालक की प्रथा के समान, इसे त्यागने की आवश्यकता है। मुस्लिम कानून में प्रथा के अनुसार, एक मुस्लिम पुरुष को एक ही महिला को दो बार तलाक देने और दोबारा शादी करने की स्वतंत्रता है। हालाँकि, यदि पुरुष तीसरी बार उसे तलाक देना चाहता है और पुनर्विवाह करना चाहता है, तो महिला उससे केवल तभी पुनर्विवाह कर सकती है जब वह किसी अन्य पुरुष से विवाह करती है, विवाह को समाप्त कर देती है, और वह पुरुष मर जाता है या स्वेच्छा से तलाक मांगता है; तभी उसकी शादी उसके पहले पति से होगी। निकाह हलाला की आड़ में मुस्लिम महिलाओं का यौन शोषण किए जाने की कई खबरें भी सामने आई हैं।

जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ता है और छद्म-धर्मनिरपेक्ष पूर्वाग्रह से मुक्त महिलाओं के लिए समान अधिकारों के लिए रास्ता बनाता है, ये पुरातन प्रथाएं बड़े सुधारों का आह्वान करती हैं और अंततः समान नागरिक संहिता को लागू करने का मार्ग प्रशस्त करती हैं ताकि सभी समुदायों की महिलाएं इसका आनंद उठा सकें। समान अधिकार जो संविधान ने उन्हें गारंटी दी है। तीन तलाक कानून के सफल पारित होने ने सही तरह की प्रेरणा दी है और ऐसे सुधारों के लिए टोन सेट किया है।

भारत को थर्मोन्‍यूक्लियर बम के परीक्षण की जरूरत, अमेरिकी विशेषज्ञों ने दी सलाह


Thermonuclear Weapon India: भारत को थर्मोन्‍यूक्लियर बम के परीक्षण की जरूरत, अमेरिकी विशेषज्ञों ने दी सलाह

रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन-ताइवान टेंशन के बीच दुनियाभर में परमाणु जंग का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. खबरों में हम आए दिन देखते हैं कि रूस यूक्रेन को लगातार धमकी देते रहता है कि उसके सब्र का इम्तिहान न लिया जाए. दूसरी ओर ताइवान-चीन के बीच अमेरिका की दखल से मामला सातवें आसमान पर है. मौजूदा दौर में अमेरिका चीन को अपने प्रतिद्वंदी के तौर पर देखता है. इसे लेकर अमेरिका ने अपने नौसैनिक अड्डे गुआम से लेकर ऑस्‍ट्रेलिया तक हथियारों को तैनात करना शुरू कर दिया है. दुनिया का माहौल जंग की ओर झुकता जा रहा है. इस बीच कुछ अमेरिकी एक्सपर्ट्स ने कहा है कि भारत को थर्मोन्‍यूक्लियर बम का परीक्षण एकबार फिर से शुरू करना चाहिए. बता दें अब से 24 साल पहले भी भारत ने थर्मोन्‍यूक्लियर बम का परीक्षण किया था हालांकि 1998 के उस थर्मोन्‍यूक्लियर बम के परीक्षण के लिए ऐसा कहा जाता है कि वह सफल नहीं हो पाया था।

एश्‍ले जे टेलिस ने भारत को दी सलाह

अमेरिका के फेमस थिंक टैंक कार्नेगी इंडोमेंट फॉर इंटरनैशनल पीस के सीनियर फेलो एश्‍ले जे टेलिस का कहना है कि भारत को अपने 1998 के थर्मोन्‍यूक्लियर बम का परीक्षण फिर से शुरू करना चाहिए और भारत को हथियारों के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हथियारों की वजह से दो शत्रु देशों में बैलेंस बना रहता है. उन्होंने कहा कि इसके लिए अगर भारत को किसी तरह की मदद की जरूरत होती है तो अमेरिका को उसके लिए आगे आना चाहिए. एश्‍ले जे टेलिस ने कहा कि भारत को इस दिशा में विचार करना चाहिए. एश्‍ले जे ने ये भी कहा कि अगर चीन अपने परमाणु हथियारों में इजाफा करता है तो यह भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

पिछले दिनों चीन को लेकर ये थी बड़ी खबर

आपको बता दें कि पिछले दिनों चीन को लेकर एक बड़ी बात सामने आई थी जिसमें कहा गया था कि चीन साल 2030 तक 1000 बम बनाने की तैयारी में है. खबर ये भी थी कि चीन सैकड़ों मिसाइलों के लिए रेगिस्‍तानी इलाकों में साइलो का निर्माण भी कर रहा है।

अमेरिका की युद्ध मे एंट्री, बेलारूस खौफ से दहला, रूस का NATO पर सीधा हमला


Belarus

यूक्रेन की रणभूमि में अमेरिका केउतरने का सीधा सीधा मतलब है आने वाले वक्त में दो सुपर पावर मुल्कों के बीच में महायुद्ध की शुरुआत। इन दोनों देशों के बीच जंग होती है तो यह केवल दोनों देशों के बीच सीमित नहीं रहेगी बल्कि विश्व युद्ध का आगाज हो सकता है।

क्या तीसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत हो चुकी है? पिछले 9 महीने से यूक्रेन की जंग अमेरिकी हथियारों के दम पर लड़ी जा रही है। लेकिन अब अमेरिकी सेना की वार जोन में डायरेक्ट एंट्री हो चुकी है। दुनिया के लिहाज से यह कतई अच्छी खबर नहीं है। बीते 9 महीने से इसी जंग को टालने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन अमेरिका ने यूक्रेन में अमेरिकी ट्रूप उतार दिया है। यूक्रेन की रणभूमि में अमेरिका केउतरने का सीधा सीधा मतलब है आने वाले वक्त में दो सुपर पावर मुल्कों के बीच में महायुद्ध की शुरुआत। इन दोनों देशों के बीच जंग होती है तो यह केवल दोनों देशों के बीच सीमित नहीं रहेगी बल्कि विश्व युद्ध का आगाज हो सकता है।

क्या बीते 8 महीने से बाइडेन रूस के हथियारों को देखना, तोलना और कम करना चाहते थे? क्या यूक्रेन की बर्बादी पेंटागन की सोची-समझी रणनीति थी। यह सारे सवाल ताजा हालातों में जायज नजर आ रहा है। जब रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू हुआ था तो जो बाइडेन ने कहा था कि वह यूक्रेन की मदद करेंगे, हथियार देंगे लेकिन सीधे यूएस आर्मी इस जंग में नहीं एंट्री लेगी क्योंकि ऐसा होने का मतलब था कि रूस और अमेरिका आमने सामने आ जाते तो विश्वयुद्ध की शुरुआत मुमकिन थी। लेकिन 9 महीने में बैगन का सब्र जवाब दे गया है और इसलिए यूक्रेन में अमेरिकी सेना उत्तर गई है।

यूक्रेन की जमीन पर अमेरिकी सैनिक

रूसी मीडिया rt.com ने यूक्रेन में उतरे अमेरिकी ट्रिप को लेकर एक डिटेल रिपोर्ट पब्लिश की है। अमेरिकी सैनिक यूक्रेन की जमीन पर है। वह यहां नाटो हथियारों की डिलीवरी की निगरानी कर रहे हैं। पेंटागन के एक अधिकारी ने इसका खुलासा किया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है की वहां अमेरिका के कितने सैनिक है। अमेरिकी सैनिकों की टुकड़ी का नेतृत्व ब्रिगेडियर जनरल गैरिक हार्मोन कर रहे हैं।

बेलारूस बना हुआ का नया सेंटर

पेंटागन में रूस के दोस्त बेलारूस पर हमले का पेपर वर्क हो चुका है पद्मनाभ यहां तक कि बेलारूस के पास रोमानिया और पोलैंड में अमेरिकी आर्मी ने अपने सबसे घातक टुकड़ी को भेज दिया है। जिससे बेलारूस टेंशन में है। इस बाबत सेंट पीटर्सबर्ग में रूस और बेलारूस के रक्षा मंत्रालय के बीच अहम बैठक हुई। बेलारूस पर हमले के लिए अमेरिका ने 2 बार प्लान तैयार किए हैं पहला लिट्रल स्ट्राइक और दूसरा न्यूक्लियर हमला। भाई जान यह विस्फोटक कदम इसलिए उठा नहीं जा रहे हैं ताकि उस सयम जाए और पुतिन परमाणु प्रहार ना कर पाएं। बेलारूस की स्टेट सिक्योरिटी कमेटी यानी केजीबी के डिप्टी हेड एवं टर्टल ने कहा कि अमेरिका बेलारूस पर बहुत बड़ा हमला करने वाला है। यह पोलैंड की तरफ से हो सकता है।

 नाटो के रूसी सीमा के पास लामबंद होने से  भड़के पुतिन

पुतिन के शीर्ष मंत्री सर्गेई शोइगु का कहना है कि रूस की पश्चिमी सीमाओं के पास तैनात नाटो बलों की संख्या 30,000 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य ब्लॉक ने मध्य और पूर्वी यूरोप के साथ-साथ बाल्कन और बाल्टिक राज्यों में इकाइयों को बढ़ाया है। शोइगु ने कहा कि पश्चिमी ताकतों की एकाग्रता न केवल मास्को के लिए बल्कि रूस के सहयोगी बेलारूस के लिए भी एक सीधा खतरा है। जिसके बाद रूस ने भी इस तरह के उकसावे वाले प्रयास को विश्व शांति के लिए बड़ा खतरा बताया है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका को सीधी चेतावनी भी दी है कि इससे विनाश होगा। 

Tuesday, November 1, 2022

पुतिन को धोखा दे रहा है पाकिस्तान! रूसी सीनेटर ने लगाया आरोप, कहा- यूक्रेन की मदद कर रहा है पाकिस्तान


रूस के सीनेटर ने दावा किया है कि पाकिस्तान यूक्रेन की मदद कर रहा है.
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है. वहीं इस युद्ध के कारण रूस दुनिया के कई देशों से अपना संबंध बिगाड़ता नजर आ रहा है. इसी कड़ी में अब रूस ने पाकिस्तान पर धोखा देने का आरोप लगाया है. रूस के सीनेटर इगोर मोरोजोव ने एक बड़ा दावा किया है. मोरोजोव ने कहा है कि यूक्रेन और पाकिस्तान के बीच नाभिकीय हथियार तैयार करने की तकनीक पर चर्चा हुई है. रूसी न्यूज एजेंसी RIA novotski की रिपोर्ट के मुताबिक रूसी सीनेटर ने आरोप लगाया है कि यूक्रेन के विशेषज्ञ ने पाकिस्तान का दौरा किया है.

इस मुलाकात के दौरान पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल ने नाभिकीय हथियार की तकनीक पर चर्चा के लिए यूक्रेन का दौरा भी किया. रूसी सीनेटर के दावे से सवाल उठने लगा है की क्या पाकिस्तान पुतिन को धोखा दे रहा है. इगोर मोरोजोव रूस की फेडरेशन काउंसिंल की रक्षा समिति के सदस्य हैं. इगोर मोरोजोव रूस में और रूस के बाहर महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं . मोरोजोव को रूस, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से भी अवार्ड मिल चुका है. रूसी सीनेटर का दावा है कि यूक्रेन के पास डर्टी बॉम्ब की तकनीक है लेकिन बॉम्ब बनाने के लिए पैसे की कमी है.

मोरोजोव ने यूक्रेन से डर्टी बॉम्ब के खतरे को वास्तविक करार दिया है. गौर करने वाली बात है कि पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने हाल ही में कहा है कि उनका देश रूस से तेल खरीदेगा अगर भारत को जिस कीमत पर तेल दिया जा रहा है अगर पाकिस्तान को भी दिया जाए. लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ रूसी सीनेटर के दावे से पाकिस्तान के वित्त मंत्री की इच्छा शायद पूरी न हो सके. RIA novotski की रिपोर्ट के अनुसार रूसी सीनेटर ने पाकिस्तान से जुड़ा दावा यूक्रेन पर एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान किया

भारतीय सेना POK पर कब्जा करने पूरी तरह तैयार, बस सरकार के इशारे का इंतजार


Indian Army fully prepared ready for action about POK kpa रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan issue) के मुद्दे को उठाने और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) के शेष हिस्सों पर फिर से भारत का कब्जा करने पर जोर देने के कुछ दिनों बाद चिनार कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एडीएस औजला(Chinar Corps Commander Lt Gen ADS Aujla) ने कहा है कि इसके लिए सरकार के आदेश पर कोई भी कार्रवाई करने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार है।

पहले जानिए राजनाथ सिंह ने क्या कहा था?
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने यह बात 1947 में बडगाम हवाई अड्डे पर भारतीय सेना के हवाई लैंडिंग ऑपरेशन के 75 वें वर्ष के उपलक्ष्य में 27 अक्टूबर, 2022 को श्रीनगर (J & K) में आयोजित 'शौर्य दिवस' समारोह में कही थी। राजनाथ सिंह ने कहा था-" POK में निर्दोष भारतीयों के खिलाफ अमानवीय घटनाओं के लिए पूरी तरह से पाकिस्तान जिम्मेदार है। आने वाले समय में पाकिस्तान को उसके अत्याचारों का परिणाम भुगतना होगा। रक्षामंत्री ने यह भी कहा था-आज, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का क्षेत्र विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यह सिर्फ शुरुआत है। हमारा उद्देश्य संकल्प को लागू करना है, गिलगित और बाल्टिस्तान जैसे शेष हिस्सों को फिर से हासिल करने के लिए 22 फरवरी, 1994 को भारतीय संसद में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया।

राजनाथ सिंह के बयान पर बोले कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एडीएस औजला
रक्षा मंत्री के इस हालिया बयान और कश्मीर और सीमावर्ती इलाकों के मौजूदा हालात पर मीडिया को संबोधित करते हुए एडीएस औजला ने कहा-''केंद्र सरकार जब भी ऐसा फैसला करेगी, हमारे पास आदेश आएंगे, तो हम पूरी तरह से तैयार हैं। हमारी परंपरागत ताकत है, हम भी आधुनिक रूप से खुद को मजबूत कर रहे हैं, ताकि हमें ऐसी स्थिति में पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़े।

बता दें कि गिलगित-बाल्टिस्तान के पश्चिम में अफगानिस्तान और इसके दक्षिण में पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) है। चिनार कॉर्प्स कमांडर ने आश्वासन दिया कि नियंत्रण रेखा (LOC) पर स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और सेना सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी ताकत से तैयार है।

सेना के अधिकारी ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की कोशिशों में उल्लेखनीय कमी आई है। 32 साल में सबसे कम घुसपैठ दिखाते हुए घाटी में शांति बहाली को देखते हुए यह साल बहुत अच्छा रहा, इस पूरे साल में अक्टूबर महीने तक सिर्फ आठ आतंकियों ने घुसपैठ की कोशिश की, जिनमें से तीन का सफाया कर दिया गया।" 

विशेषज्ञों ने कहा, शांति की स्‍थापना के लिए भारत को करना ही होगा थर्मोन्‍यूक्लियर महाबम का परीक्षण


विशेषज्ञों ने कहा, शांति की स्‍थापना के लिए भारत को करना ही होगा थर्मोन्‍यूक्लियर महाबम का परीक्षण

रूस-यूक्रेन युद्ध और ताइवान पर जंग जैसे हालात के बीच दुनियाभर में परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ता जा रहा है। रूस लगातार धमकी दे रहा है कि हमारे संयम का इम्तिहान न लिया जाए। उधर, ताइवान और जापान को लेकर को लेकर अमेरिका और चीन के बीच परमाणु युद्ध का खतरा तेजी से बढ़ा है। अमेरिका ने चीन के खतरे से निपटने के लिए अपने नौसैनिक अड्डे गुआम से लेकर ऑस्‍ट्रेलिया तक महाविनाशक हथियारों की तैनाती को तेज कर दिया है। इस बीच अब विशेषज्ञ कह रहे हैं कि शांति की स्‍थापना के लिए अहिंसा के समर्थक भारत को 24 साल बाद जल्‍द ही धरती पर प्रलय लाने में सक्षम थर्मोन्‍यूक्लियर महाबम का फिर से परीक्षण करना ही होगा। यही नहीं, वे यह भी कह रहे हैं कि भारत इस परमाणु बम का परीक्षण करता है तो अमेरिका को समझदारी दिखाते हुए नई दिल्‍ली पर प्रतिबंध लगाने से बचना होगा। आइए समझते हैं क्‍या है पूरा मामला और किन खतरों का सामना कर रहा है भारत 
अमेरिका के चर्चित थिंक टैंक कार्नेगी इंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के सीनियर फेलो एश्‍ले जे टेलिस का मानना है कि आने वाले समय में एशिया की परमाणु हथियारों पर निर्भरता बढ़ने जा रही है। उनका कहना है कि साल 1998 में भारत ने थर्मोन्‍यूक्लियर बम के परीक्षण की कोशिश की थी लेकिन यह सफल नहीं रहा था। वह कहते हैं कि अगर भारत का अपने शत्रुओं चीन और पाकिस्‍तान के साथ एक स्थिर रिश्‍ता बना रहता है तो उसका काम सामान्‍य परमाणु बम से चल जाएगा लेकिन अगर चीन के साथ दुश्‍मनी ज्‍यादा बढ़ती है तो भारत को एक दिन बाध्‍य होकर थर्मोन्‍यूक्लियर बम का परीक्षण करना ही होगा। भारत का यह परीक्षण अब इस बात पर निर्भर करेगा कि नई दिल्‍ली और बीजिंग के बीच रिश्‍ते किस तरह से भविष्‍य में आगे बढ़ते हैं। 
थर्मोन्‍यूक्लियर बम से भारत को मिलेगा अभेद्य कवच
एश्‍ले जे टेलिस ने इंडियन एक्‍सप्रेस अखबार से बातचीत में यह भी कहा कि मेरा मानना है कि भविष्‍य में भारत थर्मोन्‍यूक्लियर बम बनाने के बारे में एक बार फिर से विचार कर सकता है। इससे चीन के खिलाफ भारत को एक महाविनाशक परमाणु प्रतिरोधक क्षमता हासिल हो जाएगी। उन्‍होंने कहा कि भारत जब अपने इस थर्मोन्‍यूक्लियर बम का परीक्षण करेगा तो इसका असर अमेरिका के साथ उसके रिश्‍ते पर पड़ना लाजिमी है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका-भारत नागरिक परमाणु डील, भारत का वैश्विक परमाणु व्‍यवस्‍था से जुड़ाव खासकर परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) से जुड़ाव इस आधार पर हुआ था कि अब भारत भविष्‍य में कोई भी परमाणु परीक्षण नहीं करेगा। उन्‍होंने कहा कि अगर चीन अपने परमाणु हथियारों की संख्‍या को बहुत अधिक बढ़ाता है तो इससे भारत की मुसीबत काफी बढ़ जाएगी। 
चीन की 1000 परमाणु बम बनाने की योजना
पिछले दिनों खुलासा हुआ था कि चीन की साल 2030 तक 1000 परमाणु बम बनाने की योजना है। चीन अपने रेगिस्‍तानी इलाकों में सैकड़ों की तादाद में परमाणु मिसाइलों के लिए साइलो बना रहा है ताकि उन्‍हें छिपाया जा सके। एश्‍ले जे टेलिस कहते हैं कि चीन के इसी खतरे को देखते हुए भारत एक दिन बाध्‍य हो जाएगा कि वह थर्मोन्‍यूक्लियर बम का परीक्षण करे। उन्‍होंने कहा कि मेरा मानना है कि जब भारत यह परीक्षण करता है तो अमेरिका को नई दिल्‍ली को दंडित करने से बचना चाहिए। मैं यहां तक कहना चाहूंगा कि अमेरिका भारत की मदद करे ताकि किसी परमाणु हमले से बचने के लिए एक कारगर प्रतिरोधक क्षमता को हासिल कर सके। इसके लिए अमेरिका भारत को परमाणु सबमरीन को बनाने में मदद कर सकता है। ऐसा वह फ्रांस के जरिए भारत की मदद करके कर सकता है। 
परमाणु बम बनाम थर्मोन्‍यूक्लियर बम, जानें अंतर
परमाणु बम हो या थर्मोन्‍यूक्लियर बम दोनों ही धरती पर महाविनाश लाने वाले हथियार माने जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इनमें एक प्रमुख अंतर है। परमाणु हथियार कम क्षमता की ताकत पैदा करते हैं जो कुछ किलोटन तक होता है। वहीं थर्मोन्‍यूक्लियर बम सैकड़ों किलोटन की क्षमता की तबाही लाते हैं। जापान में जिन दो परमाणु बमों का इस्‍तेमाल किया गया था, उनकी ताकत 15 से 20 किलोटन थी। हिरोशिमा और नागासाकी दोनों ही जापान के छोटे से शहर थे। भारत को चीन के शंघाई और बीजिंग जैसे महानगरों को तबाह करने के लिए थर्मोन्‍यूक्लियर बम का ही इस्‍तेमाल करना होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि थर्मोन्‍यूक्लियर बम भले ही संख्‍या में कम हों लेकिन उसका प्रतिरोधक क्षमता के रूप में असर बहुत ज्‍यादा होता है। उनका यह भी कहना है कि भारत एक ऐसी परमाणु ताकत है जो यह बनना नहीं चाहता था। भारत का चीन और पाकिस्‍तान के साथ तनाव है जो परमाणु हथियारों से लैस हैं। भारत का परमाणु बम केवल प्रतिरोधक क्षमता के लिए है। 
भारत को चीन-पाक से निपटने को चाहिए 400 परमाणु बम
भारत ने साल 1998 में पोखरण में परमाणु बम का परीक्षण किया था। भारत के पास अभी 165 के आसपास परमाणु बम हैं। वहीं चीन के परमाणु बमों की संख्‍या 350 को पार कर रही है। चीन अपने परमाणु हथियारों को लगातार आधुनिक बना रहा है। भारत परमाणु बम के इ‍स्‍तेमाल के लिए पृथ्‍वी, अग्नि सीरिज की मिसाइलों, फाइटर जेट और पनडुब्बियों पर निर्भर है। भारत ने परमाणु बम दागने में सक्षम परमाणु पनडुब्‍बी आईएनएस अरिहंत बनाई है। पिछले दिनों भारत ने समुद्र से एक मिसाइल दागी थी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को वास्‍तविक प्रतिरोधक क्षमता को हासिल करने के लिए कम से कम 400 परमाणु बम बनाने होंगे। इसमें 10 से 12 किलोटर के परमाणु बम से लेकन मेगाटन वाले थर्मोन्‍यूक्लियर बम शामिल हैं।

परम तत्व दर्शन