Friday, November 26, 2021

Mumbai 26/11 Attack: पहले आतंकी कसाब की गोली और कोर्ट में लड़ी, अब सिस्टम से लड़ रही है देविका

नई दिल्ली: 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले में देविका रोटावन घायल हो गईं और उन्होंने आतंकवादी अजमल कसाब की पहचान की। देविका रोटावन ने आखिरी बार अगस्त 2020 में तब सुर्खियां बटोरी थीं जब उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इसका कारण यह था कि महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें ईडब्ल्यूएस योजना के तहत आवास का वादा किया था। उन्होंने कहा कि उनका पूरा परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है. नतीजतन, उन्होंने घर की कुछ व्यवस्थाओं के साथ-साथ अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए भीख मांगी थी।

 

  देविका 22 साल की लड़की है। जब 26/11 का आतंकवादी हमला हुआ तब वह सिर्फ दस साल की थी। देविका ने अपने पिता और भाई के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) से पुणे की यात्रा की थी। इसी स्थान पर आतंकियों ने उनके पैर में गोली मार दी थी। घायल अवस्था में उन्हें सेंट जॉर्ज अस्पताल लाया गया। दो महीने के भीतर, छह सर्जिकल प्रक्रियाएं पूरी की गईं। उसे छह महीने बिस्तर पर रहना पड़ा। ठीक होने के बाद वह अदालत में लौटी और आतंकवादी अजमल कसाब के खिलाफ गवाही दी। मुंबई आतंकी हमले के मामले में वह सबसे कम उम्र की चश्मदीद गवाह थीं।

सरकार ने उस समय देविका को कई लाभ देने का वादा किया था, लेकिन उन्हें जल्दी ही भुला दिया गया। देविका ने उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में कहा, "रुपये की सहायता। मैं इसकी सराहना करता हूं, लेकिन मुझसे किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं।"

किम कार्दशियन का ब्लैक ड्रेस लुक, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें

हॉलीवुड एक्ट्रेस और मॉडल किम कार्दशियन हमेशा से ही अपने ऑल-ब्लैक आउटफिट्स के लिए जानी जाती हैं। उन्हें अक्सर काले कपड़ों में फोटोशूट कराते हुए देखा गया था और उनके फॉलोअर्स उनकी तस्वीरों को पसंद करते हैं। किम ने हाल ही में अपने काले पहनावे के लिए खबरें बनाईं, जिसे उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया।

  वहीं किम के लुक की बात करें तो डीप नेक बॉडीकॉन गाउन वाकई बहुत प्यारा लगता है। छोटे मेकअप और खुले बालों से वह अपने लुक को कंप्लीट कर रही हैं। आपको बता दें कि किम जहां ब्लैक लुक वाले फैन्स हैं वहीं किम अक्सर कैमरे के सामने खड़ी रहती हैं और कभी-कभार लेटकर फोन के साथ पोज देती नजर आती हैं.

 इतना ही नहीं उनके फैंस को उनकी ये तस्वीरें काफी पसंद आती हैं. पेशेवर मोर्चे पर, किम आगामी फिल्म PAW पेट्रोल: द मूवी में दिखाई देंगे। यह फिल्म एक कॉमेडी पर आधारित होगी।

Thursday, November 25, 2021

भारत में बदल गया लिंगानुपात, 1000 पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की आबादी अब 1020


नई दिल्ली। देश में पहली बार पुरुषों की तुलना में महिलाओं की आबादी ज्यादा हो गई है। कभी मिसिंग वूमन (Missing Women) का तोहमत झेलने वाले देश के लिए ये बड़ी खुशखबरी है। यही नहीं, देश में प्रजनन दर में भी कमी आई है। नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे (National Family and Health Survey) के अनुसार, देश में अब 1,000 पुरुषों की तुलना में महिलाओं की आबादी 1,020 हो गई है।

ऐसे बढ़ी महिलाओं की आबादी
नोबेल प्राइज विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने 1990 में एक लेख में भारत में महिलाओं की कम आबादी के लिए ‘मिसिंग वूमन’ (Missing Women) शब्द का इस्तेमाल किया किया था। लेकिन धीरे-धीरे भारत में चीजें बदली हैं और अब देश में महिलाओं की आबादी पुरुषों से ज्यादा हो गई है। 1990 के दौरान भारत में प्रति हजार पुरुषों की तुलना में महिलाओं का अनुपात 927 था। 2005-06 में यह आंकड़ा 1000-1000 तक आ गया। हालांकि, 2015-16 में यह घटकर प्रति हजार पुरुषों की तुलना में 991 पहुंच गया था लेकिन इस बार ये आंकड़ा 1000-1,020 तक पहुंच गया है।

अब एक महिला के 2 ही बच्चे
सर्वे में एक और बड़ी बात निकलकर सामने आई है। प्रजनन दर (Total Fertility Rate) या एक महिला पर बच्चों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। सर्वे के अनुसार औसतन एक महिला के अब केवल 2 बच्चे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों से भी कम है। माना जा रहा है कि भारत आबादी के मामले में पीक पर पहुंच चुका है। हालांकि, इसकी पुष्टि को नई जनगणना के बाद ही हो पाएगी।

प्रजनन दर घटी, जनसंख्या में आएगी कमी?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को NFHS के आंकड़े जारी किए हैं। प्रजनन दर घटने का असर देश की आबादी घटने में दिखेगा यहा नहीं, इसका पता तो अगली जनलगणना (National Census) में ही पता चलेगा। NFHS के पांचवें राउंड के सर्वे में 2010-14 के दौरान पुरुषों में जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) 66.4 साल है जबकि महिलाओं में 69.6 साल।

लड़के की चाहत में कमी नहीं!
सर्वे में कहा गया है कि बच्चों के जन्म का लिंग अनुपात (Gender Ratio) अभी भी 929 है। यानी अभी भी लोगों के बीच लड़के की चाहत ज्यादा दिख रही है। प्रति हजार नवजातों के जन्म में लड़कियों की संख्या 929 ही है। हालांकि, सख्ती के बाद लिंग का पता करने की कोशिशों में कमी आई है और भ्रूण हत्या में कमी देखी जा रही है। वहीं, महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा जी रही हैं।

NFHS-5 का सर्वे
NFHS का सर्वे दो चरणों में 2019 और 2021 में किया गया। देश के 707 जिलों के 6,50,000 घरों में ये सर्वे किया गया। दूसरे चरण का सर्वे अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली, ओडिशा, पुड्डुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में किया गया।

'कश्मीर रखना चाहते हैं तो बहाल कर दें अनुच्छेद 370', महबूबा मुफ्ती की केंद्र को 'धमकी',


 If you want to 'keep' Kashmir, restore Article 370 and address Kashmir issue: Mehbooba Mufti tells Centre
पीडीपी प्रमुख ने कहा कि कश्मीर का हल निकालने केंद्र सरकार।

मुख्य बातें

  • जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने अनुच्छेद 370 को बहाल करने की मांग की
  • महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर के लोग गोडसे के भारत के साथ नहीं रह सकते
  • 'जम्मू-कश्मीर के लोगों ने महात्मा गांधी के भारत के साथ अपनी किस्मत का फैसला किया'

जम्मू : अनुच्छेद 370 को लेकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की मुखिया महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर केंद्र सरकार को 'धमकी' दी है। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने बुधवार को कहा कि केंद्र यदि 'कश्मीर को देश के हिस्से के रूप में रखना चाहता है' तो उसे अनुच्छेद 370 की बहाली और कश्मीर मुद्दे का हल निकालना चाहिए। पीडीपी नेता ने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोग गोडसे के भारत के साथ नहीं रहेंगे।

'हम भी अपना फैसला वापस ले लेंगे'

बनिहाल के नील गांव में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि 'हमने महात्मा गांधी के भारत के साथ अपनी किस्मत का फैसला किया, जिसने हमें अनुच्छेद 370, हमारा संविधान और ध्वज दिया। यदि वे हमारी हर चीज छीन लेंगे तो हम भी अपना फैसला वापस ले लेंगे। उन्हें सोचना होगा कि यदि वे अपने साथ जम्मू कश्मीर को रखना चाहते हैं तो उन्हें अनुच्छेद 370 बहाल करना होगा और कश्मीर मुद्दे का हल करना होगा।’

हम महात्मा गांधी का भारत चाहते हैं-महबूबा

महबूबा ने आगे कहा कि 'महात्मा गांधी की हत्या करने वाले गोडसे के भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के लोग नहीं रह सकते। हम महात्मा गांधी का भारत चाहते हैं इसलिए हमारी पहचान एवं संविधान से मिले हमारे सम्मान को लौटाएं।' उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि कोई भी शक्तिशाली देश ने बंदूक के बल पर अपने लोगों पर शासन नहीं किया है। सुपरपावर अमेरिका भी ताकत के बल पर अफगानिस्तान पर शासन नहीं कर सका, उसे देश छोड़कर जाना पड़ा। 

हैदरपोरा मुठभेड़ का जिक्र किया

पीडीपी नेता ने 15 नवंबर को श्रीनगर के हैदरपोरा में एक विवादास्पद मुठभेड़ में मारे गए आम लोगों के परिवार के सदस्यों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा, ‘आज चुनाव नहीं है और मैं आपका वोट नहीं मांग रही। जब चुनाव का समय आएगा, जिसे मन हो उसे आप वोट दें। मैं पीडीपी के लिए आपका समर्थन चाहती हूं ताकि 18 महीने के बच्चे को अपने पिता का शव हासिल करने के लिए सड़क पर फिर से नहीं आना पड़े।’ उन्होंने भाजपा पर जम्मू कश्मीर के लोगों को जाति, नस्ल और धर्म के आधार पर बांटने का आरोप लगाया। 

घटेगी देश की आबादी! प्रजनन दर में आई बड़ी गिरावट, जम्मू-कश्मीर ने चौंकाया


2005-06 में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-3 के दौरान भारत का टीएफआर (TFR) 2.7 था, जोकि 2015-16 में घटकर 2.2 हो गया है. (फाइल फोटो)

2005-06 में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-3 के दौरान भारत का टीएफआर (TFR) 2.7 था, जोकि 2015-16 में घटकर 2.2 हो गया है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. देश की आबादी घटने वाली है, क्योंकि कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate) या कहें अपने जीवन काल में एक महिला द्वारा कुल बच्चों को जन्म देने वाली औसत संख्या प्रतिस्थापन दर (Replacemeny Level) से नीचे आ गई है और अब ये 2 हो गई है. इसका खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (National Family Health Survey) के डाटा 2019-21 से हुआ है, जिसे बुधवार को जारी किया गया. प्रतिस्थापन दर टीएफआर, उसे कहते हैं जिसमें एक पीढ़ी, दूसरी पीढ़ी को रिप्लेस करती है. सर्वे के मुताबिक रिप्लेसमेंट दर 2.1 है. सर्वे के मुताबिक बिहार (3.0), उत्तर प्रदेश (2.4) और झारखंड (2.3) में कुल प्रजनन दर, प्रतिस्थापन दर से ज्यादा है.

2005-06 में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-3 के दौरान भारत का टीएफआर (TFR) 2.7 था, जोकि 2015-16 में घटकर 2.2 हो गया है. दूसरी ओर NFHS-3 और 2019-21 में हुए ताजा NFHS-5 के बीच देश की ज्यादा आबादी वाले राज्यों मसलन, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में टीएफआर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, इसकी वजह से देश की कुल प्रजनन दर में गिरावट आई है और प्रतिस्थापन दर से नीचे चली गई है.

जानिए यूपी-बिहार का हाल
NFHS-5 का पहला चरण 17 जून 2019 से 30 जनवरी 2020 के बीच किया गया था और दूसरा चरण 2 जनवरी 2020 से 30 अप्रैल 2021 तक चला था. फेज-1 में 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को टारगेट किया गया था और दूसरे चरण में 14 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश शामिल थे. बिहार को छोड़ दें तो अन्य सभी राज्यों में शहरी टीएफआर प्रतिस्थापन दर से नीचे है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुल प्रजनन दर सिर्फ बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में ज्यादा है. वहीं मेघालय, मणिपुर और मिजोरम जैसे छोटे राज्यों के ग्रामीण इलाकों में भी कुल प्रजनन दर ज्यादा है.

जम्मू-कश्मीर में सबसे कम प्रजनन दर
बड़े राज्यों में कुल प्रजनन दर सबसे कम जम्मू और कश्मीर में 1.4 है. 2015-16 में हुए पिछले NFHS सर्वे के बाद से जम्मू और कश्मीर ही वह राज्य है, जहां कुल प्रजनन दर में सबसे ज्यादा गिरावट (0.6) दर्ज की गई है. NFHS-4 में केरल और पंजाब की कुल प्रजनन दर 1.6 थी, जबकि तमिलनाडु में यह 1.7 थी. नए सर्वे में पंजाब में कुल प्रजनन दर 1.6 ही है, लेकिन केरल और तमिलनाडु की कुल प्रजनन दर में इजाफा दर्ज किया गया है. दोनों में टीएफआर 2019-21 में बढ़कर 1.8 हो गई है. सबसे कम प्रजनन दर सिक्किम की 1.1 है.

दक्षिण कोरिया के बराबर हुई प्रजनन दर
सिक्किम की प्रजनन दर दुनिया में सबसे कम दक्षिण कोरिया की प्रजनन दर के बराबर है. यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन डाटा के मुताबिक सबसे ज्यादा प्रजनन दर नाइजर (6.9) और सोमालिया (6.1) की है. अगर भारत के पड़ोसी राज्यों की बात करें तो नेपाल में कुल प्रजनन दर भारत और बांग्लादेश के बाद सबसे कम है, वहीं, अफ्रीका में यह 4.4 है, जबकि ओशिनिया देशों में 2.4 है.

हालांकि सभी देशों में प्रतिस्थापन स्तर की प्रजनन दर 2.1 या इससे कम है. एशिया की कुल प्रजनन दर 2.15 है, जोकि प्रतिस्थापन दर से थोड़ा ज्यादा है.

Monday, November 22, 2021

अब गाय के गोबर से मिलेगी बिजली भी ! एक गाय के वेस्ट से साल भर जगमगा सकते हैं 3 घर

Britain के किसानों ने गाय के गोबर से बिजली (cow poo can produce electricity) की बैटरियां बना ली हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

Britain के किसानों ने गाय के गोबर से बिजली (cow poo can produce electricity) की बैटरियां बना ली हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

गाय और गोबर (Cow Dung Electricity) को लेकर देश में कई बार आपने पॉजिटिव और निगेटिव चीज़ें सुनी होंगी. अब ब्रिटेन (Britain News) में गाय का गोबर (Cow dung Electricity) इस वक्त चर्चाओं में है. ब्रिटिश किसानों ने गाय के गोबर से बिजली (cow poo can produce electricity) का विकल्प तैयार कर दिया है. किसानों के एक समूह के मुताबिक उन्होंने गाय के गोबर से ऐसा पाउडर तैयार किया गया है, जिससे बैटरियां बनाई गई हैं.

गाय के एक किलोग्राम गोबर से किसानों ने इतनी बिजली तैयार कर ली है, कि 5 घंटे तक वैक्यूम क्लीनर चलाया जा सकता है. ब्रिटेन के आर्ला डेयरी की ओर से गोबर का पाउडर बनाकर उसकी बैटरियां बनाई गई हैं. इन्हें काउ पैटरी का नाम दिया गया है. AA साइज़ की पैटरीज़ से साढ़े 3 घंटे तक कपड़े भी इस्त्री किए जा सकते हैं. ये काफी उपयोगी आविष्कार है.

गोबर से पूरी होगी बिजली की ज़रूरत
ब्रिटिश डेयरी को ऑपरेटिव (Daily Co-Operative) Arla की ओर से ये बैटरी विकसित की जा रही है. बैटरी एक्सपर्ट GP Batteries का दावा है कि एक गाय के गोर से तीन घरों को साल भर बिजली मिल सकती है. एक किलोग्राम गोबर के ज़रिये 3.75 किलोवाट बिजली पैदा की जा सकती है. ऐसे में अगर 4, 60,000 गायों के गोबर से बिजली बने, तो 12 लाख ब्रिटिश घरों में बिजली सप्लाई की जा सकती है. डेयरी में साल भर में 1 मिलियन टन गोबर निकलता, जिससे बिजली उत्पादन का बड़ा लक्ष्य रखा जा सकता है.

डेयरी में इस्तेमाल हो रही है गोबर बिजली
Arla डेयरी में तमाम चीज़ों के लिए गोबर से बनी बिजली का ही इस्तेमाल किया जाता है. इससे निकले वेस्ट को खाद के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. बिजली बनाने की प्रक्रिया को एनएरोबिक डाइजेशन कहा जाता है, जिसमें जानवरों के वेस्ट से बिजली बनाई जाती है. डेयरी में 4,60,000 गायें रहती हैं, जिनके गोबर को सुखाकर पाउडर तैयार किया जाता है और उसे ऊर्जा में बदला जाता है. Daily Star से बात करते हुए Arla के एग्रीकल्चर डायरेक्टर ने कहा कि अगर इस तरफ सरकार ध्यान देगी, तो इससे रीन्यूएबल एनर्जी सप्लाई में मील का पत्थर साबित हो सकता है.

संयुक्त किसान मोर्चा ने पीएम मोदी को पत्र लिख कर की 6 मांगे


दिल्ली : पिछले एक साल से किसान कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे है. इस आंदोलन के चलते आखिरकार मोदी सरकार को किसानों के सामने झुकना ही पड़ा और तीनों कृषि कानून को रॉड करने का ऐलान किया.लेकिन इसके बावजूद भी किसान अपना आंदोलन ख़त्म नहीं करेंगे। किसानों की मांग है की जब तक सरकार MSP पर कानून नहीं लाएगी और अन्य मुद्दों पर बात नहीं करेगी तब तक तेज आंदोलन जारी रहेगा. 


संयुक्त किसान मोर्चा ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि सरकार को तुरंत किसानों से वार्ता बहाल करनी चाहिए, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. मोर्चा ने कहा कि आपके संबोधन में किसानों की प्रमुख मांगों पर ठोस घोषणा की कमी के कारण किसान निराश हैं. 

किसानों ने पीएम मोदी को पत्र में लिखा है कि देश के करोड़ों किसानों ने 19 नवंबर 2021 की सुबह राष्ट्र के नाम आपका संदेश सुना. हमने गौर किया कि 11 राउंड वार्ता के बाद आपने द्विपक्षीय समाधान की बजाय एकतरफा घोषणा का रास्ता चुना, लेकिन हमें खुशी है कि आपने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है. हम इस घोषणा का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि आपकी सरकार इस वचन को जल्द से जल्द निभाएगी.

1. खेती की संपूर्ण लागत पर आधारित न्यूनतम समर्थन मूल्य ( MSP ) को सभी कृषि उपज के ऊपर, सभी किसानों का कानूनी हक बना दिया जाए ताकि देश के हर किसान को अपनी पूरी फसल पर कम से कम सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी मिल सके.

2. सरकार द्वारा प्रस्तावित “विद्युत अधिनियम संशोधन विधेयक, 2020/2021” का ड्राफ्ट वापस लिया जाए (वार्ता के दौरान सरकार ने वादा किया था कि इसे वापस लिया जाएगा, लेकिन फिर वादाखिलाफी करते हुए इसे संसद की कार्य सूची में शामिल किया गया था).

3. “राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इससे जुड़े क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अधिनियम, 2021” में किसानों को सजा देने का प्रावधान हटाया जाए ( इस साल सरकार ने कुछ किसान विरोधी प्रावधान तो हटा दिए लेकिन सेक्शन 15 के माध्यम से फिर किसान को सजा की गुंजाइश बना दी गई है).

आपके संबोधन में इन बड़ी मांगों पर ठोस घोषणा ना  होने से किसानों को निराशा हुई है. किसान ने उम्मीद लगाई थी कि इस ऐतिहासिक आंदोलन से न सिर्फ तीन कानूनों की बला टलेगी, बल्कि उसे अपनी मेहनत के दाम की कानूनी गारंटी भी मिलेगी.

प्रधानमंत्री जी, पिछले एक वर्ष में इस ऐतिहासिक आंदोलन के दौरान कुछ और मुद्दे भी उठे हैं जिनका तत्काल निपटारा करना अनिवार्य है:

4. दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और अनेक राज्यों में हजारों किसानों को इस आंदोलन के दौरान (जून 2020 से अब तक) सैकड़ों मुकदमों में फंसाया गया है. इन केसों को तत्काल वापस लिया जाए.

5. लखीमपुर खीरी हत्याकांड के सूत्रधार और सेक्शन 120B के अभियुक्त अजय मिश्रा टेनी आज भी खुले घूम रहे हैं और आपके मंत्रिमंडल में मंत्री बने हुए हैं. वह आपके और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ मंच भी साझा कर रहे हैं. उन्हें बर्खास्त और गिरफ्तार किया जाए.

6. इस आंदोलन के दौरान अब तक लगभग 700 किसान शहादत दे चुके हैं. उनके परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास की व्यवस्था हो. शहीद किसानों की स्मृति में एक शहीद स्मारक बनाने के लिए सिंधू बॉर्डर पर जमीन दी जाए.

परम तत्व दर्शन