एक ओर जहां देश में कोरोना का खतरा हर दिन बढ़ता जा रहा है, वहीं प्राइवेट हस्पताल अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं। और लोगों की जान जोखिम में डालते हुए उन्हों छुटी रिपोर्ट सौप रहें हैं। ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुआ। हाल ही में कोरोना की रिपोर्ट नेगेटिव होने के बावजूद कुछ लोगों को पॉजिटिव मरीजों वाले आइसोलेशन वॉर्ड में रहना पड़ा। इस लापरवाही के कारण 35 लोगों की जान जोखिम में डाल दी गई। दरअसल, कुछ लोगों को हल्के बुखार, खांसी और ज़ुखाम की शिकायत थी। ये सभी इलाज के लिए प्राइवेट डॉक्टर्स के पास गए, जहां इन्हें कोरोना का शक बताकर टेस्ट लिया गया। बाद में पता चला कि सभी की रिपोर्ट पॉजिटिव है। इसके बाद इन लोगों को सरकारी द्वारा तैयार किए गए ग्रेटर नोएडा शारदा अस्पताल के कोविड आइसोलेशन वार्ड में भेज दिया गया, जहां इनकी दोबारा से जांच की गई। हैरानी की बात ये है कि 35 लोगों की रिपोर्ट कोरोना नेगेटिव आई। अब इन सभी प्राइवेट लैबों को नोटिस भेजा गया है। लाइफलाइन लैब, मॉडर्न लैब, स्टार इमेजिंग लैब, oncquest Lab, Accuris Lab ऐसी 6 लैब्स की जानकारी नोएडा प्रशासन को मिल चुकी है, जिनके खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी। इनमें से एक लैब के खिलाफ तो मुकदमा भी दर्ज किया जा चुका है। जांच में पता चला कि कुछ प्राइवेट लैब के कर्मचारी लोगों के घर जाकर गलत तरीके से सैंपल इकट्ठा कर रहे थे। उन्होंने सैंपल का टेम्परेचर मेंटेन नहीं किया। जिससे गलत रिपोर्ट आई।
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